
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियां अब युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। एसआईआर की लंबी और पेचीदा प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब जिला प्रशासन ने मैदानी अमले को सक्रिय कर दिया है। इस बार जनगणना की कमान मुख्य रूप से शिक्षा विभाग के हाथों में होगी। जिले के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों, प्रधानपाठकों और कॉलेज स्टाफ को जनगणना ड्यूटी के लिए तैयार किया जा रहा है। प्रशासन अब शिक्षा विभाग से कर्मचारियों का पूरा डेटा जुटा रहा है ताकि जल्द ही उनकी नियुक्तियां की जा सकें।
31 मार्च तक पूरा होगा नंबरिंग का खेल
जनगणना की शुरुआत से पहले मकानों की पहचान करना सबसे जरूरी काम है। नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च तक हर हाल में मकानों की नंबरिंग और ब्लॉक बनाने का काम पूरा कर लिया जाए। जब तक हर गली और घर पर नंबर दर्ज नहीं होगा, तब तक सर्वे का काम आगे नहीं बढ़ पाएगा। इस शुरुआती प्रक्रिया के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि किस क्षेत्र में कितने प्रगणकों की जरूरत पड़ेगी।
दो चरणों में पूरा होगा महाअभियान
भारत की यह डिजिटल जनगणना दो बड़े हिस्सों में बंटी होगी। पहले चरण की शुरुआत 1 मई 2026 से होगी जो पूरे महीने यानी 30 मई तक चलेगी। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग’ या मकान सूचीकरण का काम किया जाएगा। इसमें केवल मकानों और वहां उपलब्ध सुविधाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इसके ठीक बाद दूसरे चरण का काम शुरू होगा जिसमें जनसंख्या से जुड़े व्यक्तिगत और सामाजिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इस पूरी प्रक्रिया में जिले का एक भी परिवार सर्वे से छूटने न पाए।
रिजर्व स्टाफ के साथ तैयार होगी फाइनल लिस्ट
जनगणना शाखा फिलहाल प्रगणकों (Data Collectors) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) की अंतिम सूची तैयार करने में जुटी है। इस बार प्रशासन किसी भी तरह की कमी से बचने के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाफ को ‘रिजर्व’ में रख रहा है। यानी अगर ड्यूटी के दौरान कोई कर्मचारी बीमार पड़ता है या किसी कारणवश काम नहीं कर पाता, तो रिजर्व स्टाफ तुरंत उसकी जगह ले लेगा। नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के सभी स्टाफ का मोबाइल नंबर और पता जल्द से जल्द अपडेट करें।
शहर से गांव तक डिजिटल होगी गणना
पुराने दौर की तुलना में यह जनगणना काफी आधुनिक होने वाली है। इस बार कागज-कलम के बजाय मोबाइल ऐप और डिजिटल पोर्टल का इस्तेमाल होगा। प्रगणकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा रहा है ताकि वे मौके पर ही डेटा फीड कर सकें। नगरीय निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अमले को आपस में तालमेल बिठाने के लिए कहा गया है। अफसरों का मानना है कि डिजिटल मोड से डेटा की शुद्धता बढ़ेगी और जनगणना के परिणाम भी जल्द घोषित किए जा सकेंगे।
प्रशासन की नागरिकों से खास अपील
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि भविष्य की योजनाओं का आधार है। एडीएम और निगम आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि जब शिक्षक या कर्मचारी उनके घर पहुंचें, तो वे सही जानकारी साझा करें। सटीक आंकड़ों के आधार पर ही आने वाले वर्षों में राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का बजट तय होगा। प्रशासन का पूरा जोर पारदर्शिता और शत-प्रतिशत कवरेज पर है।



