Teejan Bai Funeral Video: तीजन बाई पंचतत्व में विलीन: ‘चोला माटी के हे राम’ भजन के बीच नम आंखों से अंतिम विदाई, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

Teejan Bai Funeral Video: छत्तीसगढ़ की माटी की गौरव और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई रविवार दोपहर को पंचतत्व में विलीन हो गईं. दुर्ग जिले के अंतर्गत आने वाले उनके गृहग्राम गनियारी के मुक्तिधाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ. छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति को सात समंदर पार पहचान दिलाने वाली इस महान कलाकार के अंतिम सफर में हजारों की तादाद में आम लोग और प्रशंसक शामिल हुए. विदाई के इस भावुक पल में हर किसी की आंखें नम थीं.

‘चोला माटी के हे राम’ की गूंज के बीच बेटे ने दी मुखाग्नि

अंतिम संस्कार के समय मुक्तिधाम का पूरा माहौल बेहद गमगीन हो गया था. वहां मौजूद लोक कलाकारों, शिष्यों और ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध लोकगीत “चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा” गाकर अपनी चहेती कलाकार को श्रद्धांजलि दी. डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर को उनके मंझले बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी. इस दौरान उनके पति तुलसी राम देशमुख भी वहां उपस्थित रहे. परिजनों ने बताया कि तीजन बाई की आखिरी ख्वाहिश थी कि जब वे इस दुनिया से जाएं, तो उन्हें एक सुहागिन की तरह विदा किया जाए, जिसके तहत उनका पारंपरिक श्रृंगार किया गया था.

अंतिम दर्शन के लिए उमड़े दिग्गज, भूपेश बघेल ने अर्पित की श्रद्धांजलि

महान लोक कलाकार के अंतिम दर्शन के लिए राजनीति, कला और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े तमाम बड़े चेहरे गनियारी गांव पहुंचे. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पैतृक निवास पहुंचकर तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किए और परिवार को ढांढस बंधाया. इसके साथ ही पद्मश्री उषा बारले सहित छत्तीसगढ़ के अनेक लोक कलाकारों, जनप्रतिनिधियों और देश-विदेश से आए उनके शिष्यों ने उन्हें नमन किया. सभी ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति के विकास में उनके अमूल्य योगदान को याद किया.

साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक का सफर

डॉ. तीजन बाई का पूरा जीवन कड़े संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा. एक बेहद साधारण और गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद भी उन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़कर पंडवानी गायन को चुना. बचपन से ही इस कला के प्रति उनके अटूट लगाव ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया. उन्होंने पुरुष प्रधान विधा माने जाने वाली पंडवानी की कापालिक शैली में अपनी एक अलग और बेजोड़ पहचान बनाई. अपने हाथ में तंबूरा लेकर जब वे मंच पर महाभारत का प्रसंग सुनाती थीं, तो विदेशी दर्शक भी बिना भाषा समझे उनके अभिनय से बंध जाते थे.

कला और लोक संस्कृति जगत में कभी न भरने वाली कमी

तीजन बाई को भारत सरकार ने पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे शीर्ष नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया था. कला समीक्षकों और सांस्कृतिक जानकारों का मानना है कि उनके शांत होने से छत्तीसगढ़ी लोक कला के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है. उन्होंने पंडवानी को जो भव्यता और सम्मान दिलाया, उसकी भरपाई आने वाले समय में बहुत मुश्किल होगी. गनियारी गांव में हुए उनके अंतिम संस्कार के बाद भी उनकी आवाज और तंबूरे की थाप लोगों के दिलों में हमेशा गूंजती रहेगी.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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