गेमिंग एडिक्शन का जानलेवा जाल: मोबाइल की दुनिया में खो रहा बचपन, छत्तीसगढ़ में भी बढ़ी माता-पिता की चिंता

छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में बच्चों के बीच गेमिंग की लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। गाजियाबाद में हुई हालिया दुखद घटना ने इस लत के भयावह नतीजों को सबके सामने ला दिया है। मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाली चमक-धमक वाली दुनिया बच्चों को इस कदर अपनी ओर खींच रही है कि वे असल जिंदगी और रिश्तों से कटते जा रहे हैं। जब बच्चों को घर में बड़ों का समय नहीं मिलता, तो वे मोबाइल गेम्स में अपना सहारा ढूंढने लगते हैं। यह आभासी दुनिया उन्हें जीत का ऐसा झूठा एहसास दिलाती है जिससे बाहर निकलना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।

माता-पिता की व्यस्तता और बढ़ता अकेलापन

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों में गेमिंग की बढ़ती लत के पीछे माता-पिता की व्यस्तता एक बड़ी वजह है। काम के दबाव और समय की कमी के चलते कई बार अभिभावक बच्चों को शांत रखने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। यही छोटी सी शुरुआत धीरे-धीरे लत का रूप ले लेती है। बच्चे इस डिजिटल दुनिया में इतने गहरे उतर जाते हैं कि उन्हें सही और गलत का अंतर समझ नहीं आता। वे मोबाइल गेम्स के किरदारों को ही अपना असली दोस्त मानने लगते हैं और बाहरी खेलकूद व सामाजिक मेलजोल से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं।

गेमिंग लत के खतरनाक संकेत

गेमिंग के इस जाल में फंसे बच्चों में व्यवहारिक बदलाव साफ देखे जा सकते हैं। नींद की कमी, स्वभाव में चिड़चिड़ापन और बात-बात पर गुस्सा करना इसके शुरुआती लक्षण हैं। कई मामलों में बच्चे हिंसक भी हो जाते हैं और मोबाइल छीनने पर घर में हंगामा करने लगते हैं। यह लत न केवल बच्चों की मानसिक स्थिति पर असर डाल रही है बल्कि उनकी शारीरिक सेहत और पढ़ाई को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है। वर्चुअल दुनिया में मिलने वाली चुनौतियों को बच्चे हकीकत समझ बैठते हैं और कई बार खतरनाक कदम उठा लेते हैं।

बचाव और जागरूकता ही एकमात्र रास्ता

इस डिजिटल महामारी से बच्चों को बचाने के लिए समाज और परिवार को एकजुट होना होगा। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं। बच्चों को मैदानी खेलों और रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करना बेहद जरूरी है। मोबाइल के इस्तेमाल के लिए समय सीमा तय करना और घर में तकनीक के सुरक्षित उपयोग का माहौल बनाना ही इस समस्या का समाधान है। समय रहते अगर हम नहीं जागे तो यह खामोश लत हमारे मासूमों के भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर सकती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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