
CG School Summer Vacation: छत्तीसगढ़ में गर्मी ने हालात बिगाड़ दिए हैं। प्रदेश के कई जिलों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों, खासकर नर्सरी से लेकर पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। लगातार मिल रही बीमारियों की खबरों ने स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गर्मी की छुट्टी की मांग
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में तत्काल ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया जाए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने पत्र में बताया कि छोटे बच्चे गर्मी को सहन नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें इस मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के उपाय भी नहीं मालूम होते। ऐसे में गर्मी के बीच स्कूल आना और वहां घंटों बिताना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
तबीयत बिगड़ने की खबरें कई स्कूलों से
राजीव गुप्ता ने लिखा है कि कई स्कूलों से बच्चों के बीमार होने की सूचनाएं मिली हैं। इससे साफ है कि मौजूदा तापमान में बच्चों के लिए स्कूल आना जोखिम भरा बन चुका है। एसोसिएशन ने यह भी बताया कि स्कूलों में पढ़ाई से ज्यादा बच्चों की सेहत अब प्राथमिकता होनी चाहिए।
अगर छुट्टी नहीं, तो टाइमिंग बदला जाए
एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि यदि तत्काल गर्मी की छुट्टी घोषित नहीं की जाती, तो कम से कम कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को स्कूल आने से छूट दी जाए। इसके साथ ही सभी स्कूलों का समय बदलकर सुबह के समय तक सीमित करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि बच्चे दोपहर की तेज धूप से बच सकें।
पहले भी समय से पहले बंद हुए हैं स्कूल
छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी गर्मी के प्रकोप को देखते हुए समय से पहले स्कूलों को बंद किया जा चुका है। यह नया मामला न केवल बच्चों की सेहत का सवाल है, बल्कि यह सरकार की संवेदनशीलता की परीक्षा भी है कि वह बच्चों की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता देती है।
अब फैसला सरकार के पाले में
गर्मी बढ़ रही है, बच्चे बीमार हो रहे हैं और स्कूलों में बेचैनी का माहौल है। अब देखना यह है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस पर कितना फौरन और संवेदनशील फैसला लेती है। छुट्टी होगी या टाइमिंग बदलेगा, इसका इंतजार पूरे प्रदेश को है — खासकर उन नन्हे बच्चों को, जिनके लिए ये मौसम किसी परीक्षा से कम नहीं।



