Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग: 11 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम, जानें आपके शहर का नया रेट

Petrol-Diesel Price Hike:अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब भारतीय आम जनता की जेब पर पड़ने लगा है। देश की सरकारी तेल कंपनियों ने आज, 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा इजाफा कर दिया है। आज पेट्रोल के दाम में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस ताजा वृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर ₹102.12 और डीजल की कीमत ₹95.20 हो गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के हालातों के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से भारतीय ईंधन बाजार में यह तबाही देखने को मिल रही है।

मई के महीने में ही चौथी बार बढ़े ईंधन के दाम, आम आदमी का बजट बिगड़ा

Petrol Diesel Price Today: चालू महीने में आम उपभोक्ताओं को महंगाई का यह चौथा बड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ ही दिनों के भीतर तेल कंपनियों ने लगातार कीमतें बढ़ाकर आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। मई महीने में हुई सिलसिलेवार बढ़ोतरी के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 25 मई: आज पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा किया गया।
  • 23 मई: दो दिन पहले ही पेट्रोल पर 87 पैसे और डीजल पर 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए थे।
  • 19 मई: मध्य मई के बाद कंपनियों ने औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
  • 15 मई: महीने के मध्य में सीधे ₹3 प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया गया था।

चारों महानगरों में पेट्रोल और डीजल के नए रेट: मुंबई-कोलकाता में सबसे ज्यादा मार

देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय टैक्स (वैट) की दरें भिन्न होने के कारण सभी प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बदल गई हैं। मुंबई और कोलकाता में ईंधन की कीमतें देश में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं।

पेट्रोल की नई दरें

शहरनए दाम (रुपए/लीटर)कुल बढ़ोतरी (रुपए)
दिल्ली102.12+2.61
मुंबई111.21+2.72
कोलकाता113.51+2.87
चेन्नई107.77+2.46
रायपुर107.96+2.60

डीजल की नई दरें

शहरनए दाम (रुपए/लीटर)कुल बढ़ोतरी (रुपए)
दिल्ली95.20+2.71
मुंबई97.83+2.81
कोलकाता99.82+2.80
चेन्नई99.55+2.57

ईरान-अमेरिका युद्ध की आहट से कच्चे तेल में उबाल, ₹100 के पार निकला क्रूड ऑयल

ईंधन की कीमतों में आ रही इस बेतहाशा तेजी की मुख्य वजह वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों का नियंत्रण से बाहर होना है। ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था। जंग की शुरुआत होते ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला ठप होने के डर से क्रूड के दाम बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। चूंकि भारतीय तेल कंपनियां घाटे में चल रही थीं, इसलिए उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय दबाव की भरपाई का बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है।

मालभाड़ा और खेती की लागत बढ़ने से अब चौतरफा बढ़ेगी महंगाई

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई इस भारी वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर रोजमर्रा की अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भी पड़ेगा। आने वाले दिनों में देश के भीतर इन क्षेत्रों में सीधे तौर पर महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है:

  • मालभाड़े में बढ़ोतरी: डीजल महंगा होने से ट्रक और कमर्शियल वाहनों का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और राशन महंगे हो जाएंगे।
  • कृषि लागत में इजाफा: गांवों में किसानों को ट्रैक्टर चलाने और सिंचाई के लिए पंपिंग सेट का उपयोग करने के लिए अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे, जिससे अनाज उत्पादन की लागत बढ़ेगी।
  • सार्वजनिक परिवहन: ऑटो, टैक्सी, निजी बसों और स्कूल बसों के किराए में भी जल्द ही बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे सीधे आम जनता प्रभावित होगी।

बेस प्राइस से तीन गुना तक कैसे बढ़ जाते हैं दाम, समझें टैक्स का पूरा गणित

अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल की कीमत बहुत कम होती है, लेकिन आम भारतीय उपभोक्ता की टंकी तक पहुंचते-पहुंचते इस पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई तरह के टैक्स थोप दिए जाते हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसके बाद तेल की कीमतों का निर्धारण इन पांच चरणों में होता है:

  1. बेस प्राइस (कच्चा तेल): अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए कच्चे तेल की वास्तविक कीमत।
  2. रिफाइनिंग लागत: देश की रिफाइनरियों में कच्चे तेल को साफ करने का खर्च और कंपनियों का अपना मुनाफा।
  3. एक्साइज ड्यूटी: केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क और रोड सेस, जो पूरे देश में एक समान रहता है।
  4. डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप मालिकों को तेल कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला निश्चित लाभांश।
  5. वैट (VAT): विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला स्थानीय बिक्री कर, जिसके कारण हर शहर में रेट बदल जाते हैं।

लंबे समय के बाद बदला कीमतों का मिजाज, कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान

देश में लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर आम जनता को चुनावी राहत दी थी। उसके बाद से मार्च 2024 से लेकर लंबे समय तक देश में तेल के दाम पूरी तरह स्थिर बने हुए थे। हालांकि, तकनीकी रूप से तेल कंपनियां वैश्विक बाजार के पिछले 15 दिनों के औसत के आधार पर हर दिन सुबह 6 बजे दाम बदलने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें रोका गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को इस रोक की वजह से हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी थी ईंधन के सीमित और संभलकर उपयोग की सलाह

ईंधन के इस वैश्विक संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ऊर्जा संसाधनों का संभलकर उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने तेलंगाना में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत के पास तेल के अपने बड़े कुएं नहीं हैं, हम पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं। पीएम मोदी ने नागरिकों को सुझाव दिया था कि आज समय की मांग है कि देश के लोग पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस का उपयोग बहुत संयम और समझदारी के साथ करें ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर विदेशी मुद्रा का दबाव कम किया जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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