
महासमुंद के एक जागरूक नागरिक ने बैंकिंग सिस्टम की मनमानी के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। यह मामला 27 अक्टूबर 2010 को शुरू हुआ था, जब पेशे से शिक्षक जयराम पटेल अपनी पत्नी के एटीएम कार्ड से एक्सिस बैंक की मशीन से पैसे निकालने गए थे। उन्होंने 2000 रुपये का ट्रांजैक्शन किया, लेकिन मशीन से केवल 1000 रुपये ही बाहर आए, जबकि उनके खाते से पूरे 2000 रुपये काट लिए गए। जब वे इसकी लिखित शिकायत लेकर अपने बैंक (पंजाब नेशनल बैंक) पहुंचे, तो वहां के मैनेजर ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें अपमानित किया। मैनेजर ने शिकायत पत्र को डस्टबिन में फेंकने की धमकी तक दे डाली, जिसने इस कानूनी लड़ाई की नींव रखी।
जिला फोरम से दिल्ली तक चली कानूनी जंग
मैनेजर के दुर्व्यवहार से आहत होकर जयराम पटेल ने हार नहीं मानी और साल 2011 में जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। जिला फोरम ने बैंक की सेवा में कमी पाई और ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। बैंक ने इस आदेश को चुनौती देते हुए पहले राज्य उपभोक्ता आयोग और फिर नेशनल फोरम नई दिल्ली में अपील की। बैंक ने मामले को लंबा खींचने की पूरी कोशिश की, लेकिन जयराम पटेल डटे रहे। पूरे 12 साल बाद नेशनल फोरम ने भी जिला फोरम के फैसले को बरकरार रखा और बैंक को भारी हर्जाना देने का आदेश दिया।
आरबीआई के नियम ने दिलाई बड़ी रकम
जयराम पटेल की इस बड़ी जीत के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का एक बेहद कड़ा नियम है। आरबीआई के सर्कुलर के अनुसार, अगर एटीएम ट्रांजैक्शन फेल होने या पैसे कम निकलने की शिकायत के 7 दिनों के भीतर बैंक संबंधित राशि वापस नहीं करता, तो उसे ग्राहक को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हर्जाना देना होगा। चूंकि यह मामला 12 साल यानी करीब 4182 दिनों तक चला, इसलिए सिर्फ हर्जाने की राशि ही 4.18 लाख रुपये से ज्यादा हो गई। इसके अलावा बैंक को अदालती खर्च और अन्य हर्जाने के तौर पर अलग से भुगतान करना पड़ा।
जेल जाने के डर से बैंक ने चुकाया मुआवजा
हैरानी की बात यह रही कि देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता अदालत (नेशनल फोरम) से आदेश आने के बाद भी एक्सिस बैंक भुगतान करने में आनाकानी करता रहा। बैंक की टालमटोल देख जिला उपभोक्ता फोरम महासमुंद ने कड़ा रुख अपनाया और बैंक के शाखा प्रबंधक के खिलाफ गिरफ्तारी और वसूली वारंट जारी कर दिया। जैसे ही पुलिस के वारंट और जेल जाने की नौबत आई, बैंक प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। बैंक ने बिना देरी किए जयराम पटेल के खाते में कुल 4,36,787 रुपये की पूरी राशि ट्रांसफर कर दी।
मुआवजे का पूरा हिसाब-किताब
जयराम पटेल को मिले मुआवजे का गणित काफी दिलचस्प है। मात्र 1000 रुपये की गड़बड़ी के बदले बैंक को 436 गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी। इसमें मुख्य रूप से 4,18,200 रुपये प्रतिदिन की पेनाल्टी के थे। साथ ही, 2000 रुपये कानूनी खर्च और 15,000 रुपये मानसिक कष्ट व अन्य खर्चों के तौर पर दिए गए। यह मामला उन सभी बैंक ग्राहकों के लिए एक मिसाल है जो अक्सर छोटी रकम की गड़बड़ी होने पर ‘किस्मत’ को दोष देकर चुप हो जाते हैं।
बैंक की मनमानी हो तो आप क्या करें?
अगर आपके साथ भी एटीएम ट्रांजैक्शन में ऐसी कोई गड़बड़ी होती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले अपने बैंक में इसकी लिखित शिकायत करें और आवेदन की पावती (रिसीविंग) जरूर लें। यदि 7 कामकाजी दिनों के भीतर आपका पैसा वापस नहीं आता है, तो आप भी 100 रुपये प्रतिदिन के हर्जाने का दावा कर सकते हैं। यदि बैंक मैनेजर आपकी बात न सुने या दुर्व्यवहार करे, तो सीधे जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराएं। जयराम पटेल की कहानी सिखाती है कि कानून पर भरोसा रखें तो जीत जरूर मिलती है।
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