
Matangi Devi Temple Birezhar: छत्तीसगढ़ अपनी अनूठी संस्कृति और प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए पूरे देश में जाना जाता है। राज्य में कई ऐसे देवस्थान हैं जिनसे बेहद दिलचस्प मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इसी कड़ी में एक ऐसा मंदिर भी है जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण इन दिनों लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। आमतौर पर लोग मंदिरों में नारियल, चुनरी या धागा बांधकर मन्नत मांगते हैं, लेकिन इस अद्भुत मंदिर में लोग अपनी मुराद पूरी करने के लिए दीवार पर घड़ी बांधते हैं।

रायपुर से पैंतालीस किलोमीटर दूर स्थित है मां मातंगी धाम
यह अनोखा मंदिर राजधानी रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर अभनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले बिरेझर गांव में स्थित है। इस पावन स्थल को मां मातंगी देवी धाम के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण इलाके में स्थित होने के बावजूद इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और चमत्कारों के कारण यह धाम श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास बन चुका है, जहां हर दिन लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है।

घड़ी का बंद होना माना जाता है अच्छे समय की शुरुआत
सामान्य तौर पर हमारे समाज में घड़ी का बंद होना या रुकी हुई घड़ी को घर में रखना अशुभ संकेत माना जाता है, लेकिन मां मातंगी धाम में इसके बिल्कुल विपरीत मान्यता प्रचलित है। यहां के लोगों का अटूट विश्वास है कि मंदिर परिसर में बांधी गई घड़ी अगर चलना बंद कर दे, तो इसका मतलब है कि इंसान के जीवन से बुरा दौर समाप्त हो गया है और उसके अच्छे समय की शुरुआत होने वाली है। इसी अनोखी आस्था के चलते मंदिर की दीवारों और ग्रिल पर सैकड़ों घड़ियां बंधी हुई दिखाई देती हैं।

घड़ी के साथ ताला और नारियल बांधने की भी है परंपरा
इस पावन धाम में केवल घड़ियां ही नहीं, बल्कि मन्नत मांगने के कई अन्य तरीके भी देखने को मिलते हैं। श्रद्धालु अपनी अलग-अलग मनोकामनाओं के अनुसार यहां पीतल की घंटियां, लोहे के ताले और लाल कपड़े में लिपटे नारियल भी बांधते हैं। भक्तों का मानना है कि मां मातंगी के दरबार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता है और सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मुराद यहां अवश्य पूरी होती है।

पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं श्रद्धालु
मां मातंगी धाम वैसे तो लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों की आस्था का मुख्य केंद्र रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ी है। अब छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य जैसे ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में लोग अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचने लगे हैं। हालांकि इस ऐतिहासिक स्थल पर मां मातंगी की वर्तमान भव्य प्रतिमा की स्थापना लगभग 6 साल पहले की गई थी, जिसके बाद से मंदिर का स्वरूप और बदल गया है।



