अब कोरबा में कोल माइंस के खिलाफ आदिवासियों का जन आंदोलन: विधायक मरकाम बोले- जबरन जमीन ली तो खैर नहीं

कोरबा: रायगढ़ के बाद अब कोरबा जिले में भी नई कोयला खदानों को लेकर विरोध की आग सुलगने लगी है। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पुटी पखना में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के नेतृत्व में एक विशाल महापंचायत बुलाई गई। इस आंदोलन में हजारों की संख्या में आदिवासी ग्रामीण पारंपरिक हथियारों और वाद्ययंत्रों के साथ शामिल हुए। ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर निजी कंपनियों को नहीं देंगे। आंदोलन की कमान संभाल रहे पाली तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने हुंकार भरते हुए कहा कि आदिवासियों के अस्तित्व से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पंचायतों पर दबाव बनाने का आरोप

सभा को संबोधित करते हुए विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने प्रशासन और रुंगटा कोल माइंस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित होने वाली चार ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों को डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वे खदान के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर दें। विधायक ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि किसी भी पंचायत ने ग्रामीणों की मर्जी के खिलाफ जाकर खदान के लिए सहमति दी, तो उस पंचायत प्रतिनिधि के विरुद्ध तत्काल अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन अधिग्रहण की किसी भी जबरन प्रक्रिया का सड़क से सदन तक विरोध होगा।

बढ़ते प्रदूषण से ग्रामीण पहले ही परेशान

आंदोलनकारियों का दर्द है कि इस इलाके में पहले से ही दो कोयला खदानें चल रही हैं। इन खदानों की वजह से पूरे क्षेत्र का पर्यावरण प्रदूषित हो चुका है और धूल व धुएं ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, खेती और आजीविका के साधन लगातार खत्म हो रहे हैं। अब अगर एक और नई खदान खुलती है, तो स्थानीय आदिवासियों के पास बेघर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसी वजह से ग्रामीण अब वन अधिकार पट्टे की मांग को लेकर भी प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं।

प्रशासन को सौंपा गया मांगों का ज्ञापन

आंदोलन के दौरान तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के बीच ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। कार्यक्रम के समापन पर विधायक और आदिवासी प्रतिनिधियों ने पसान तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि ग्राम सभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण की किसी भी कार्रवाई को तुरंत रोका जाए और क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के ठोस उपाय किए जाएं।

आदिवासी समाज की एकजुटता का प्रदर्शन

इस महापंचायत ने यह साबित कर दिया है कि बस्तर की तरह अब उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी भी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुके हैं। कार्यक्रम में जनपद सदस्य संतोष मरावी सहित कई क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। गोंगपा नेताओं का कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक खदान का प्रस्ताव रद्द नहीं हो जाता, तब तक यह जन आंदोलन जारी रहेगा और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे जिले में फैलाया जाएगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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