
Yoga Day Tent Contract Irregularity: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के भव्य आयोजन की तैयारियों के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय विवाद सामने आया है. आरोप है कि इस सरकारी कार्यक्रम के लिए करीब 6 करोड़ रुपये का काम बिना किसी तय टेंडर प्रक्रिया के एक पसंदीदा ठेकेदार को सौंप दिया गया. नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस फैसले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी धन के सही इस्तेमाल पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.
सरकारी आदेश जारी होने से पहले ही ग्राउंड पर खड़ा हो गया करोड़ों का टेंट
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात काम की टाइमिंग को लेकर है. राज्य सरकार ने योग दिवस के आयोजन के लिए 16 जून को जरूरी निर्देश जारी किए और इसके अगले दिन यानी 17 जून को बजट को मंजूरी दी गई. उसी रात करीब 11 बजे कलेक्टर दफ्तर से एक आधिकारिक आदेश निकालकर पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता वीरेंद्र चौधरी को कार्यक्रम का नोडल अधिकारी बनाया गया. मजेदार बात यह है कि जब इस आदेश के जारी होने से पहले मौके पर जाकर देखा गया, तो वहां विशालकाय डोम टेंट लगभग बनकर तैयार हो चुका था. सवाल उठ रहा है कि जब तक कोई आधिकारिक आदेश ही नहीं था, तब किसके इशारे पर करोड़ों का काम शुरू कर दिया गया.

ई-टेंडरिंग के नियमों की अनदेखी, गुपचुप तरीके से चुन लिया गया वेंडर
कार्यक्रम स्थल पर लगभग 1 लाख वर्ग फीट के बड़े हिस्से में वॉटरप्रूफ जर्मन डोम टेंट लगाया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करोड़ों में है. सरकारी वित्तीय नियमों के मुताबिक इतनी बड़ी रकम के किसी भी काम के लिए सार्वजनिक रूप से ई-टेंडर निकालना कानूनी रूप से जरूरी होता है. इसके बावजूद इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए किसी भी तरह की खुली निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और बैकडोर से सीधे ठेका दे दिया गया.
स्थानीय व्यापारियों को दरकिनार कर बिलासपुर के ठेकेदार पर मेहरबानी [Local Vendors Ignored]
इस फैसले से सरगुजा संभाग के स्थानीय वेंडर्स और व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. अंबिकापुर और आसपास के इलाकों में बड़े सरकारी और निजी आयोजन कराने वाले कई अनुभवी और सक्षम वेंडर्स मौजूद हैं. इसके बाद भी स्थानीय कारोबारियों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखते हुए बिलासपुर के एक बाहरी वेंडर को इतना बड़ा काम सौंप दिया गया, जिससे पूरे मामले में पक्षपात के आरोप और गहरे हो गए हैं.
मंत्री के घरेलू धार्मिक कार्यक्रमों में काम करने का मिला इनाम
चर्चा है कि जिस ठेकेदार को बिना किसी प्रतिस्पर्धा के यह काम मिला है, उसके संबंध सत्तापक्ष के एक कद्दावर मंत्री से हैं. बताया जा रहा है कि यह वेंडर पहले उक्त मंत्री के निजी और पारिवारिक धार्मिक आयोजनों में पंडाल और टेंट लगाने का काम संभाल चुका है. स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि मंत्री के निजी कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बदले में ही उसे इस सरकारी आयोजन का यह बड़ा ठेका इनाम के तौर पर दिया गया है.
सिस्टम की पारदर्शिता पर खड़े हुए गंभीर सवाल, कागजी खानापूर्ति पर घिरी सरकार
अब यह पूरा मामला केवल एक टेंट लगाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे प्रशासनिक सिस्टम की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है. लोगों के बीच यह सवाल तैर रहा है कि क्या योग दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम को कुछ रसूखदार लोगों की कमाई का जरिया बना दिया गया है. जिस तरह से कागजी आदेश बाद में जारी हुए और काम पहले ही खत्म होने की कगार पर पहुंच गया, उससे साफ है कि ठेकेदार का नाम बहुत पहले ही तय कर लिया गया था और बाद में सिर्फ फाइलों को दुरुस्त करने का काम किया गया.




