CG School Teacher VSK APP Online Attendance: VSK ऐप पहले ही दिन धड़ाम: छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगा पाए शिक्षक; शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने पूछा- अब वेतन रोकने का डर क्यों दिखा रही सरकार

CG School Teacher VSK APP Online Attendance: छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन स्कूल शिक्षा विभाग की एक बड़ी फजीहत हो गई है. सरकार ने शिक्षकों के लिए जिस ऑनलाइन उपस्थिति और छुट्टी प्रबंधन प्रणाली को अनिवार्य किया था, वह शुरुआत में ही पूरी तरह फेल साबित हुई. प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में सोमवार से लागू हुए विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप का सर्वर लोड नहीं उठा पाया और पहले ही दिन पूरी तरह क्रैश हो गया. इस तकनीकी खराबी की वजह से राज्य के हजारों शिक्षक अपनी हाजिरी दर्ज कराने के लिए परेशान होते रहे. अब शिक्षक संगठनों ने सरकार की इस अधूरी तैयारी पर तीखे सवाल उठाए हैं और पूछा है कि जब विभाग का खुद का सिस्टम दुरुस्त नहीं है, तो फिर शिक्षकों का वेतन रोकने की धमकियां क्यों दी जा रही हैं.

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कड़े आदेश के बाद पहले ही दिन तकनीकी सिस्टम फेल, ऐप पर लॉगिन के लिए तरसते रहे कर्मचारी

स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून को एक सख्त दिशा-निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि 16 जून से सभी शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को वीएसके ऐप के जरिए ही अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी. प्रशासन ने चेतावनी भी दी थी कि ऐसा न करने पर कर्मचारियों को अनुपस्थित मान लिया जाएगा और उनके जून महीने के वेतन पर रोक लगा दी जाएगी. हालांकि, जब सोमवार सुबह शिक्षक स्कूल पहुंचे और उन्होंने ऐप खोला, तो चारों तरफ से शिकायतों की बाढ़ आ गई. अधिकांश जिलों में ऐप का होम पेज ही नहीं खुला और जहां लॉगिन हुआ भी, वहां अटेंडेंस सबमिट नहीं हो सकी.

खुद शालेय शिक्षक संघ के अध्यक्ष की नहीं लग पाई हाजिरी, प्रदेशभर से सामने आईं शिकायतें

इस पूरे तकनीकी संकट पर शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने अपनी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने बताया कि वे खुद अपने स्कूल में समय पर मौजूद थे, लेकिन वीएसके ऐप के काम न करने की वजह से उनकी खुद की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हो सकी. इतना ही नहीं, उनके स्कूल परिसर में तैनात लगभग 20 कर्मचारियों में से एक भी शिक्षक इस प्रणाली के जरिए अपनी हाजिरी मार्क करने में कामयाब नहीं हो पाया. वीरेंद्र दुबे का कहना है कि बस्तर से लेकर सरगुजा संभाग तक के लगभग सभी जिलों से शिक्षकों के फोन आ रहे हैं और हर जगह सर्वर पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है.

बिना तैयारी के नियम थोपने का आरोप, बुनियादी ढांचा सुधारे बिना डिजिटल करने की जल्दबाजी

शिक्षक संगठनों का साफ कहना है कि शिक्षा विभाग ने जमीनी हकीकत और तकनीकी क्षमता का आकलन किए बिना ही इस पूरी व्यवस्था को जबरन थोप दिया है. किसी भी बड़े डिजिटल बदलाव को लागू करने से पहले उसके सर्वर की क्षमता का परीक्षण किया जाना चाहिए था और शिक्षकों को इसके लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था. बिना किसी पूर्व तैयारी और ट्रायल रन के अचानक इतना बड़ा नियम लागू करने का नतीजा यह हुआ कि पहले ही दिन पूरा सिस्टम बैठ गया. अब इस अव्यवस्था के कारण हजारों शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं.

ऑनलाइन छुट्टी का पोर्टल भी हुआ जाम, आकस्मिक अवकाश की जरूरत पर कैसे मिलेगा अप्रूवल

विभाग ने केवल उपस्थिति ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की छुट्टियों की प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल कर दिया है. नए नियम के तहत अब कोई भी शिक्षक कागजी या ऑफलाइन आवेदन देकर छुट्टी नहीं ले सकता. इसके लिए एचआरएमआईएस (HRMIS) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना ही एकमात्र जरिया तय किया गया है. विडंबना यह है कि जिस दिन से यह नियम लागू हुआ, उसी दिन से यह मुख्य पोर्टल भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है. शिक्षकों के सामने अब यह गंभीर संकट खड़ा हो गया है कि यदि किसी कर्मचारी को अचानक कोई जरूरी पारिवारिक काम या बीमारी के कारण आकस्मिक अवकाश की जरूरत पड़ जाए, तो वह अपना आवेदन कैसे दर्ज कराएगा.

वेतन कटने के डर से सहमे ग्रामीण अंचलों के शिक्षक, नेटवर्क की समस्या ने बढ़ाई मुश्किलें

इस तकनीकी गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर छत्तीसगढ़ के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है. बस्तर और अन्य वनांचल क्षेत्रों में पहले से ही मोबाइल नेटवर्क की भारी समस्या रहती है. ऐसे में वीएसके ऐप के भारी-भरकम सर्वर का डाउन होना ग्रामीण शिक्षकों के लिए दोहरी मुसीबत बन गया है. कई जगहों पर शिक्षक इंटरनेट नेटवर्क की तलाश में स्कूलों की छतों या पहाड़ियों पर चढ़ने को मजबूर दिखे. इन सबके बीच शिक्षकों को सबसे बड़ा डर इस बात का सता रहा है कि विभाग अपनी गलती मानने के बजाय कहीं सचमुच उनका जून महीने का वेतन न काट ले.

शिक्षक संघ ने दागे गंभीर सवाल, तकनीकी विफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा

मध्यान्ह भोजन और शाला प्रवेश उत्सव जैसी अन्य समस्याओं के बीच इस नए संकट ने शिक्षकों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है. संगठन के पदाधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों से सीधे तौर पर चार बड़े सवाल पूछे हैं. पहला यह कि जब सरकारी ऐप पहले ही दिन ठप हो गया, तो इस नाकामी का जिम्मेदार कौन है? दूसरा, क्या इस विभागीय तकनीकी खराबी की वजह से निर्दोष शिक्षकों का वेतन रोका जाएगा? तीसरा, क्या उच्च अधिकारी अपनी इस विफलता को स्वीकार करेंगे? और चौथा, क्या जब तक सर्वर पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक हाजिरी के लिए कोई वैकल्पिक या ऑफलाइन व्यवस्था लागू की जाएगी?

असमंजस में बीतेगा शुरुआती हफ्ता, वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग पर अड़े कर्मचारी

फिलहाल पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है. जिन शिक्षकों की अटेंडेंस ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पाई है, वे लगातार अपने संकुल और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों से संपर्क कर रहे हैं. शिक्षक संघों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जब तक विभाग अपने सर्वर को पूरी तरह ठीक नहीं कर लेता और ग्रामीण क्षेत्रों के हिसाब से ऐप को हल्का नहीं बनाता, तब तक ऑफलाइन हाजिरी रजिस्टर की व्यवस्था को पूरी तरह मान्य रखा जाए. अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस डिजिटल विफलता के बाद अपने आदेश में क्या संशोधन करता है.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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