CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें रायगढ़ में कोयला खदान का भारी विरोध और ग्रामीणों की एसडीएम से बहस, छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों के नियम बदले, चपरासी के लिए 12वीं और क्लर्क के लिए ग्रेजुएशन अनिवार्य, बिना कर्मचारी की सहमति के नहीं होगा डेपुटेशन, हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश पर लगाई रोक , रायपुर डेंटल कॉलेज की रिसर्च में खुलासा, तंबाकू और निकोटीन से वक्त से पहले खोखली हो रही हैं हड्डियां , बलौदाबाजार हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब , 23 जिलों के लिए शुरू होगा ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान, 31 सरकारी योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ , भिलाई में नीट री-एग्जाम को लेकर प्रशासन मुस्तैद, परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू , छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी, दर्जनभर जिलों के कप्तान बदले जा सकते हैं , कांग्रेस का आज से 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, 21 जून को रायपुर पहुंचेंगे राहुल गांधी , निजी अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और ज्यादा पैसे वसूलने का आरोप, महिला की मौत के बाद हंगामा समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
रायगढ़ में कोयला खदान का भारी विरोध, ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों से उलझे एसडीएम
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की प्रस्तावित कोयला खदान को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। धरमजयगढ़ इलाके में सैकड़ों की संख्या में किसान, आदिवासी और ग्रामीण अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए एसडीएम कार्यालय पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा इलाका संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आता है, जहां पेसा कानून और वनाधिकार अधिनियम लागू हैं। इन नियमों के मुताबिक जल, जंगल और जमीन से जुड़े किसी भी फैसले में ग्राम सभा की मंजूरी सबसे जरूरी है। ग्रामीणों के अनुसार, कोयला मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए करीब 1610 हेक्टेयर जमीन तय की है। इसके विरोध में पिछले साल 22 नवंबर को ग्राम सभा ने एकजुट होकर इस खदान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। लोगों का तर्क है कि जिस जगह खनन होना है, वह घने जंगलों का हिस्सा है और जंगली हाथियों का मुख्य ठिकाना है। यहाँ खुदाई होने से इंसानों और हाथियों के बीच टकराव बढ़ेगा। साथ ही आदिवासियों के देव स्थल, खेती की जमीन और पानी के स्रोत पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। इस दौरान एसडीएम कार्यालय में उस समय माहौल गरमा गया जब एसडीएम प्रवीण भगत ने कहा कि इस तरह की भीड़ या आयोजन के लिए प्रशासन से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। इस पर ग्रामीणों ने पलटवार करते हुए कहा कि वे पहले ही आवेदन देकर पावती ले चुके हैं। प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी शिकायत या ज्ञापन सौंपने के लिए भी क्या अलग से अनुमति लेने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों के नियम बदले, चपरासी के लिए 12वीं और बाबू के लिए ग्रेजुएशन जरूरी
राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी नए आदेश के तहत अब सभी सरकारी विभागों में सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता बढ़ा दी गई है। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब आने वाली सभी सरकारी वैकेंसियों में इसी नए फॉर्मूले के आधार पर फॉर्म भरे जाएंगे। नए नियमों के अनुसार, अब तक चतुर्थ श्रेणी यानी भृत्य, चौकीदार और गार्ड जैसे पदों के लिए जो योग्यता आठवीं या दसवीं पास होती थी, उसे बढ़ाकर अब न्यूनतम 12वीं पास कर दिया गया है। इसी तरह कार्यालयों में सहायक ग्रेड-3 और क्लर्क जैसे पदों के लिए पहले 12वीं पास उम्मीदवार पात्र होते थे, लेकिन अब किसी भी विषय में स्नातक यानी ग्रेजुएशन की डिग्री अनिवार्य होगी। इसके साथ ही एक साल का कंप्यूटर डिप्लोमा और टाइपिंग टेस्ट पास करना भी जरूरी कर दिया गया है। सरकारी विभागों में ड्राइवर पद के लिए भी अब 10वीं के बजाय 12वीं पास होना जरूरी होगा और साथ ही भारी या हल्के वाहन का वैध लाइसेंस होना चाहिए। पुलिस आरक्षक और जेल प्रहरी की भर्तियों में भी न्यूनतम योग्यता 10वीं से बढ़ाकर 12वीं कर दी गई है। श्रम निरीक्षक, उप निरीक्षक और महिला पर्यवेक्षक जैसे तकनीकी और मैदानी पदों के लिए भी अब ग्रेजुएशन को ही आधार बनाया गया है। इस फैसले से जहां दफ्तरों में काम की गुणवत्ता सुधरने की उम्मीद है, वहीं ग्रामीण इलाकों के उन युवाओं की चिंता बढ़ गई है जो कम उम्र में छोटी सरकारी नौकरी के सहारे आत्मनिर्भर होना चाहते थे।
बिना कर्मचारी की सहमति के नहीं होगा डेपुटेशन, हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश पर लगाई रोक
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक ट्रांसफर और प्रतिनियुक्ति आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने साफ कहा है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को उसकी लिखित सहमति के बिना दूसरे विभाग या संस्थान में प्रतिनियुक्ति पर नहीं भेजा जा सकता। यह पूरा मामला सक्ती जिले की जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. कुमुदिनी वाघ द्विवेदी से जुड़ा है, जिन्हें सरकार ने बिना उनकी मर्जी के डाइट संस्थान में भेज दिया था। सरकार ने बीती 11 जून को एक आदेश जारी कर बिलासपुर के डीईओ विजय तांडे का तबादला सक्ती जिले में कर दिया था और सक्ती में तैनात डॉ. कुमुदिनी को हटाकर डाइट भेज दिया था। इस आदेश को डॉ. कुमुदिनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनके वकील ने दलील दी कि नियमों के मुताबिक प्रतिनियुक्ति पर भेजने से पहले कर्मचारी की सहमति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया। जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए माना कि यह आदेश पहली नजर में त्रुटिपूर्ण है। कोर्ट ने ट्रांसफर के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और चार हफ्ते में जवाब मांगा है। इस अदालती आदेश के बाद सक्ती जिले में एक अजीब स्थिति बन गई है क्योंकि तकनीकी रूप से अब वहां दो जिला शिक्षा अधिकारी मौजूद हैं, जो आने वाले दिनों में प्रशासनिक काम के लिए उलझन खड़ी कर सकता है।
रायपुर डेंटल कॉलेज की रिसर्च में खुलासा, तंबाकू और निकोटीन से वक्त से पहले खोखली हो रही हैं हड्डियां
रायपुर के सरकारी डेंटल कॉलेज में चल रही एक रिसर्च में सेहत को लेकर बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ओरल मेडिसिन विभाग के डॉक्टर और छात्र पिछले दो साल से एक विशेष प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस रिसर्च के शुरुआती नतीजों से पता चला है कि तंबाकू और सिगरेट में पाया जाने वाला निकोटीन शरीर के अंदर मौजूद कैल्शियम को तेजी से खत्म कर रहा है, जिससे युवाओं की हड्डियां उम्र से पहले ही कमजोर और अंदर से खोखली हो रही हैं। आमतौर पर पुरुषों में 60 साल और महिलाओं में 45 साल की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने की प्राकृतिक प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन डॉक्टरों ने जब 42 ऐसे मरीजों के ब्लड सैंपल की जांच की जो तंबाकू के आदी हैं, तो पाया कि उनके शरीर में कैल्शियम का स्तर बेहद कम हो चुका है। डॉक्टर इस डेटा का उपयोग लोगों को जागरूक करने और सही डाइट व सप्लीमेंट्स के जरिए हड्डियों को सुरक्षित रखने की सलाह देने के लिए करेंगे। इसी रिसर्च के दूसरे हिस्से में मुंह के कैंसर से पीड़ित मरीजों को लेकर भी एक राहत भरी खबर आई है। रेडियोथेरेपी के दौरान कैंसर मरीजों के मुंह में होने वाले छालों और तेज दर्द को कम करने के लिए डॉक्टरों ने एक नए माउथवॉश का ट्रायल किया है। 40 से अधिक मरीजों पर इसका असर बेहद सकारात्मक रहा है। इससे न केवल मरीजों का दर्द कम हुआ है बल्कि सरकारी अस्पतालों में कैंसर के इलाज का खर्च भी काफी कम हो जाएगा।
बलौदाबाजार हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में हुई हिंसक घटना को लेकर अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर लिखित जवाब तलब किया है। दरअसल, हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद इस मामले के मुख्य आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह कदम उठाया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को होगी। इससे पहले 19 मई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जेल में बंद आरोपी अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की जमानत याचिकाएं पूरी तरह खारिज कर दी थीं। पुलिस का आरोप है कि ये लोग संगठन के बड़े पदाधिकारी हैं और इन्होंने ही करीब सात से आठ हजार लोगों की भीड़ को उकसाया था। इस हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने कलेक्ट्रेट और एसपी दफ्तर में आग लगा दी थी, जिससे सरकारी खजाने को करीब 13 से 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। यह पूरा विवाद मई 2024 में गिरौधपुरी धाम में सतनामी समाज के पवित्र जैतखाम को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद शुरू हुआ था। हालांकि पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को पकड़ा था, लेकिन समाज के लोग जांच से असंतुष्ट थे और न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे। सरकार द्वारा मांग माने जाने के बावजूद 10 जून को आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान भीड़ अचानक उग्र हो गई और कलेक्ट्रेट परिसर को आग के हवाले कर दिया था।
23 जिलों के लिए शुरू होगा ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान, 31 सरकारी योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ
छत्तीसगढ़ सरकार अपनी प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए एक नया मोर्चा खोलने जा रही है। राज्य के 23 जिलों में जल्द ही ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान की शुरुआत होगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित राज्य का सपना तभी पूरा हो सकता है जब योजनाओं का असर सीधे लोगों के जीवन स्तर पर दिखाई दे। इस अभियान को बस्तर संभाग में सफल रही ‘नियद नेल्लानार’ योजना की तर्ज पर ही तैयार किया गया है। नए अभियान के दायरे में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के जिले आएंगे। इसके तहत कुल 31 सरकारी योजनाओं को शामिल किया गया है, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत, महतारी वंदन योजना, राशन कार्ड और विभिन्न प्रकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन शामिल हैं। सभी योजनाओं को एक मंच पर लाने से काम में पारदर्शिता आएगी। इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसकी डिजिटल मॉनिटरिंग होगी। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी यानी चिप्स इसके लिए एक खास डिजिटल डैशबोर्ड तैयार कर रही है। इसके जरिए राज्य से लेकर गांव के स्तर तक योजनाओं की प्रगति की रियल-टाइम ट्रैकिंग होगी। जिला कलेक्टरों की देखरेख में यह अभियान तीन चरणों में चलेगा, जिसमें पहले सर्वे होगा, फिर शिविर लगाकर दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और आखिरी चरण में काम का मूल्यांकन किया जाएगा।
भिलाई में नीट री-एग्जाम को लेकर प्रशासन मुस्तैद, परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू
भिलाई में 21 जून को होने वाली नीट (NEET) की दोबारा परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क है। परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए शहर के सभी 19 परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह के आदेशानुसार, सभी सेंटर्स के चारों तरफ धारा 144 लागू कर दी गई है जो परीक्षा खत्म होने तक प्रभावी रहेगी। प्रशासनिक गाइडलाइंस के मुताबिक, परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में किसी भी तरह की भीड़ जमा होने पर पूरी पाबंदी रहेगी। इस परिधि में किसी भी कोचिंग संस्थान या शैक्षणिक मार्गदर्शक को कोई भी गतिविधि करने की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्रों के पास अस्थाई टेंट, टेबल, कुर्सी या किताबें बेचने वाले स्टॉल लगाने पर भी रोक लगा दी गई है। नियमों को तोड़ने वालों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परीक्षार्थियों को शांत माहौल देने के लिए परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक के लिए ‘साइलेंस जोन’ घोषित किया गया है। इस दौरान लाउडस्पीकर, डीजे या किसी भी तरह के ध्वनि विस्तारक यंत्रों को बजाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, पुलिस कंट्रोल रूम में एक अस्थाई नीट मॉनिटरिंग सेंटर बनाया गया है, जहां से अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी, दर्जनभर जिलों के कप्तान बदले जा सकते हैं
छत्तीसगढ़ के गृह विभाग में इन दिनों आईपीएस (IPS) अधिकारियों की एक बड़ी तबादला सूची को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार प्रशासनिक सर्जरी का मुख्य आधार अधिकारियों का एक ही जगह पर लंबा कार्यकाल होना है। राज्य के ऐसे कई जिले हैं जहां पुलिस अधीक्षक डेढ़ साल या उससे अधिक समय से तैनात हैं। सरकार अब प्रशासनिक संतुलन बनाने के लिए इन्हें बदलने का मन बना चुकी है। जिन जिलों के पुलिस कप्तानों को बदले जाने की संभावना सबसे ज्यादा है, उनमें जगदलपुर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा और बेमेतरा जैसे बड़े जिले शामिल हैं। पिछले महीने जिस तरह 43 आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर में लंबे कार्यकाल वाले अफसरों को प्राथमिकता के आधार पर बदला गया था, ठीक वही फॉर्मूला अब पुलिस विभाग में भी लागू होने जा रहा है। कुछ अधिकारियों को पदोन्नति के बाद नई जिम्मेदारी मिलेगी तो कुछ को पुलिस मुख्यालय भेजा जाएगा। इस बड़े बदलाव का रास्ता बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में जाने के बाद और साफ हो गया है। बस्तर रेंज में नए नेतृत्व को लाने के लिए माओवादी मोर्चे के अनुभव और प्रशासनिक रिकॉर्ड को देखा जा रहा है। फिलहाल बस्तर आईजी की दौड़ में दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही राज्य की सशस्त्र पुलिस बटालियनों में खाली पड़े कमांडेंट के पदों पर भी स्थाई नियुक्तियां की जा सकती हैं।
कांग्रेस का आज से 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, 21 जून को रायपुर पहुंचेंगे राहुल गांधी
छत्तीसगढ़ के अभनपुर स्थित मंगल भवन में 20 से 29 जून तक कांग्रेस का दस दिनों का आवासीय जिला कांग्रेस कमेटी संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर शुरू हो रहा है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर आयोजन स्थल का दौरा किया और वहां रहने, खाने तथा बैठक की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस प्रशिक्षण शिविर के तहत लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 21 जून को छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। वे यहां नवनियुक्त जिला अध्यक्षों को सीधे संबोधित करेंगे और मैदान पर पार्टी को मजबूत करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश देंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी तय कार्यक्रम के अनुसार, राहुल गांधी 21 जून को दोपहर दो बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे और वहां से सीधे सड़क मार्ग द्वारा अभनपुर के लिए रवाना होंगे। वे शाम साढ़े पांच बजे तक शिविर में मौजूद रहकर जिला अध्यक्षों को फील्ड विजिट और राजनीतिक गतिविधियों की बारीकियां सिखाएंगे। इसके बाद वे शाम को ही वापस दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। इस तरह वे करीब पौने पांच घंटे छत्तीसगढ़ में बिताएंगे। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन भी मनाया, जिसके तहत अस्पतालों में फल बांटे गए और रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया।
निजी अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और ज्यादा पैसे वसूलने का आरोप, महिला की मौत के बाद हंगामा
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। सेमरा स्थित एक निजी अस्पताल प्रबंधन पर एक परिवार को धोखे में रखकर डेढ़ लाख रुपये वसूलने और मरीज की हालत बिगड़ने पर जबरन डिस्चार्ज करने का आरोप लगा है। सही समय पर सही इलाज न मिल पाने के कारण पीड़ित महिला की जिला अस्पताल में मौत हो गई, जिससे परिजनों में भारी आक्रोश है। जिल्दा गांव के रहने वाले आनंद सिंह अपनी गर्भवती पत्नी लीलावती को प्रसव पीड़ा होने पर आधी रात को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बिलासपुर सिम्स रेफर कर दिया। रात के समय कोई साधन न मिलने और पत्नी को तड़पता देख आनंद ने मजबूरी में पास के ही एक निजी अस्पताल में उसे भर्ती कराया। वहां सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी तो करा दी गई, लेकिन अगली सुबह से ही महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। पति का आरोप है कि डॉक्टर लगातार ठीक होने का दिलासा देकर पैसों की मांग करते रहे। आनंद ने कर्ज लेकर जैसे-तैसे डेढ़ लाख रुपये जमा किए। जब मरीज की हालत बेहद नाजुक हो गई और वे और पैसे देने में असमर्थ हो गए, तो अस्पताल प्रबंधन ने अपनी कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए आनंद से एक बॉण्ड पेपर पर जबरन दस्तखत करवा लिए कि वे अपनी मर्जी से मरीज ले जा रहे हैं। घर ले जाने के बाद जब महिला की हालत और बिगड़ी, तो उसे वापस जिला अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।



