CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें प्रदेश के सभी बड़े भवनों का होगा फायर सेफ्टी ऑडिट; नक्सल पीड़ित परिवार ने डॉ. रमन सिंह से मांगी पुनर्वास नीति; बंद हुई पुरानी व्यवस्था, अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सीधे मिलेगी साड़ी की रकम; राजनांदगांव में 76 करोड़ का फर्जी बिलिंग घोटाला उजागर, फर्म संचालक गिरफ्तार; अंबिकापुर में 15 साल बाद फिर खुला फर्नीचर घोटाला, एसीबी का छापा; अपेक्स बैंक में 18.13 करोड़ का गबन, 8 कर्मचारी बर्खास्त; डोंगरगढ़ में परिक्रमा पथ परियोजना का विरोध, कांग्रेस ने दी चक्काजाम की चेतावनी; वरिष्ठ नेता नंदकुमार साय का बड़ा बयान, आदिवासियों के साथ साहू समाज में भी हो रहा धर्मांतरण; अबूझमाड़ की जमीन का सच जानने 1991 से जारी है खोज, अब आईआईटी रुड़की करेगा डिजिटल मैपिंग; और खैरागढ़ के एडवर्ड पार्क भूमि मामले में प्रशासनिक आदेश बेअसर, स्टे के बाद भी निर्माण कार्य जारी समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
छत्तीसगढ़ में सभी सार्वजनिक और बहुमंजिला भवनों का होगा फायर सेफ्टी ऑडिट, सीएम साय ने दिए निर्देश
रायपुर। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की घटना से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य के सभी बहुमंजिला आवासीय परिसरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कोचिंग संस्थानों, होटलों और सार्वजनिक उपयोग के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि सुरक्षा मानकों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आम नागरिकों, छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मुख्य सचिव विकास शील ने सभी संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को मैदान में उतरने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस अभियान के तहत राज्य के सभी बड़े भवनों, कोचिंग सेंटरों, मॉल और होटलों की बारीकी से जांच की जाएगी। इस दौरान देखा जाएगा कि भवनों के पास वैध फायर एनओसी है या नहीं, आपातकालीन निकास मार्ग सही स्थिति में हैं या नहीं और वहां अग्निशमन उपकरण मौजूद हैं या नहीं। इसके साथ ही बिजली की वायरिंग, सीसीटीवी कैमरे और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का भी परीक्षण किया जाएगा। गंभीर गड़बड़ी मिलने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नक्सल पीड़ित परिवार ने डॉ. रमन सिंह से लगाई गुहार, पूछा- ‘शहादत देने वालों को कब मिलेगा न्याय?’
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा का शिकार हुए एक पीड़ित परिवार ने पुनर्वास नीति का लाभ न मिलने पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात की है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस विभाग से मंजूरी मिलने के बाद भी राजनांदगांव जिला प्रशासन के स्तर पर उनकी फाइल पिछले कई महीनों से दबी हुई है। यह स्थिति राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नक्सलवादी आत्मसमर्पण और पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। पीड़ित परिवार के सदस्य धीरेंद्र कुमार साहू ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे आवेदन में बताया कि उन्होंने 14 मई 2026 को पुनर्वास नीति के तहत मदद के लिए आवेदन किया था। इस मामले में पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक राजनांदगांव रेंज ने मई महीने में ही अपनी जांच पूरी कर जिला प्रशासन को आगे की कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया था। सभी सुरक्षा एजेंसियों से हरी झंडी मिलने के बाद भी जिला प्रशासन स्तर पर फाइल लटकी होने से परिवार में गहरी नाराजगी है। पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जल्द ही न्याय और उनका कानूनी अधिकार नहीं मिला, तो वे राजधानी रायपुर की सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
साड़ी घोटाला कांड के बाद बड़ा फैसला, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खाते में सीधे ट्रांसफर होगी रकम
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कुछ महीने पहले हुए बहुचर्चित साड़ी घोटाला कांड के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी की सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीकृत) खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर दिया है। अब साड़ियों की खरीद के लिए तय राशि सीधे इन कर्मचारियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि संचालनालय स्तर पर होने वाली केंद्रीय खरीदी व्यवस्था को खत्म कर अब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) व्यवस्था लागू की जा रही है। साड़ी खरीदी को लेकर सामने आए विवादों और मिले सुझावों के बाद यह कदम उठाया गया है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से सूती या सिंथेटिक कपड़ा चुनने की आजादी मिलेगी। पूरे प्रदेश में एकरूपता बनाए रखने के लिए साड़ी का रंग और डिजाइन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, जिसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सलाह मशविरे के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस फैसले से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और पारदर्शिता आएगी।
4. राजनांदगांव में 76 करोड़ रुपये का फर्जी बिलिंग घोटाला, बिना माल बेचे टैक्स छूट लेने वाला संचालक गिरफ्तार
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में राज्य जीएसटी विभाग ने एक बड़े फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में पता चला है कि मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक नाम की एक फर्म ने महज छह महीने के भीतर कागजों पर 76 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार दिखा दिया, जबकि जमीन पर वास्तविक रूप से कोई व्यापार नहीं हुआ था। इस मामले में विभाग ने फर्म के संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। जीएसटी विभाग की पड़ताल में साफ हुआ कि सामान की खरीद-बिक्री सिर्फ बिलों में दर्ज थी। माल के परिवहन या सप्लाई का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इस फर्जी खेल के जरिए करीब 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) गलत तरीके से हासिल की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्म ने पश्चिम बंगाल की कुछ संदिग्ध कंपनियों से लोहा और स्टील की खरीद दिखाई थी, जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन भी बाद में निरस्त पाया गया। अधिकारियों को आशंका है कि इस घोटाले में एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जो सरकार को राजस्व का चूना लगा रहा था। फिलहाल अन्य संदिग्ध फर्मों की भी जांच की जा रही है।
अंबिकापुर का 15 साल पुराना फर्नीचर घोटाला, एसीबी ने शिक्षा मिशन कार्यालय में मारा छापा
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में राजीव गांधी शिक्षा मिशन से जुड़े साल 2011-12 के कथित फर्नीचर घोटाले की फाइल एक बार फिर खुल गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने अचानक मिशन कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। लंबे समय से ठंडी पड़ी इस जांच के दोबारा शुरू होने से शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।बताया जा रहा है कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे, जिसके कारण एसीबी की टीम को खुद मौके पर पहुंचना पड़ा। टीम कार्यालय में मौजूद बिल, टेंडर की फाइलें, भुगतान के विवरण और सप्लाई रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही है। कंप्यूटर सिस्टम से भी डिजिटल डेटा निकालकर उसका विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि फाइलों में कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई। इस मामले में विभाग के 6 से 7 अधिकारियों और करीब 12 निजी फर्मों की भूमिका पहले ही संदिग्ध पाई गई थी। इस मामले में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज है और आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ हो सकती है।
अपेक्स बैंक में 18.13 करोड़ रुपये का गबन, 3 नियमित और 5 आउटसोर्स कर्मचारी बर्खास्त, अब ईओडब्ल्यू करेगी जांच
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) की बरमकेला शाखा में 18.13 करोड़ रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2024 के बीच कर्मचारियों ने समितियों के खातों और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खातों में हेरफेर कर करोड़ों रुपये पार कर दिए। इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है।अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदार नाथ गुप्ता ने बताया कि नियमों के खिलाफ ट्रांजेक्शन कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। मामले में शामिल शाखा प्रबंधक डीआर वाघमारे, लेखाधिकारी मीनाक्षी मांझी और लिपिक आशीष कुमार पटेल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा 5 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इन सभी के खिलाफ बरमकेला थाने में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। अब इस मामले की विस्तृत जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) को सौंपी जा रही है। बैंक प्रबंधन ने साफ किया है कि नुकसान हुई राशि की वसूली दोषी कर्मचारियों से ही की जाएगी। भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और नए सॉफ्टवेयर सिस्टम लागू किए जा रहे हैं।
डोंगरगढ़ में परिक्रमा पथ परियोजना पर बवाल, कांग्रेस ने कहा- परिक्रमा पथ नहीं बाईपास सड़क बनाओ
डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ में 55 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भूमि अधिग्रहण और सार्वजनिक धन के खर्च को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब कांग्रेस भी इस परियोजना के विरोध में उतर आई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना को तुरंत निरस्त करने की मांग की है।इस विवाद की शुरुआत ग्राम छिरपानी और आसपास के किसानों के विरोध से हुई थी। किसानों का आरोप है कि सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बाद भी उनकी उपजाऊ निजी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि डोंगरगढ़ शहर लंबे समय से बाईपास सड़क की मांग कर रहा है क्योंकि शहर के बीच से भारी वाहनों के गुजरने के कारण हर समय दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में बाईपास जैसी जरूरी जरूरत को छोड़कर परिक्रमा पथ पर करोड़ों रुपये खर्च करना समझ से परे है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि एक हफ्ते के भीतर इस परियोजना को निरस्त कर बाईपास का काम शुरू नहीं किया गया, तो 30 जून को चक्काजाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा। दूसरी तरफ प्रशासन का दावा है कि इससे पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
आदिवासी नेता नंदकुमार साय का दावा, कहा- आदिवासियों के साथ साहू समाज में भी बड़े पैमाने पर हो रहा धर्मांतरण
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे पर राजनीति और बहस एक बार फिर तेज हो गई है। वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने इस विषय पर एक बड़ा बयान देकर हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि साहू समाज सहित कई अन्य समुदायों के लोगों का भी बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। नंदकुमार साय ने आरोप लगाया कि राज्य में एक सोचे-समझे और सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण का खेल चल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी लोग इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं, उनका डटकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। बता दें कि छत्तीसगढ़ में लागू कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को डराकर, लालच देकर या धोखे से धर्म परिवर्तन कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर सजा का प्रावधान है।
अबूझमाड़ में 1991 से चल रहा जमीन का सर्वे अब तक अधूरा, अब आईआईटी रुड़की की मदद से डिजिटल मैपिंग शुरू
रायपुर। छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ इलाका पिछले 35 वर्षों से प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी पहेली बना हुआ है। साल 1991 से सरकारें यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस विशाल क्षेत्र की जमीन का वास्तविक स्वरूप क्या है, कौन सा हिस्सा वन भूमि है और कौन सा राजस्व रिकॉर्ड में आएगा। लगभग 6,000 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश के सबसे बड़े अनसर्वेक्षित इलाके का रिकॉर्ड अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। नक्सली प्रभाव, सुरक्षा चुनौतियों और कठिन रास्तों के कारण 1991, 2013, 2017 और 2019 में किए गए सर्वे के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो सके। अब जनवरी 2026 में छत्तीसगढ़ सरकार और आईआईटी रुड़की के बीच हुए नए समझौते के तहत एक बड़ा तकनीकी अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी, जीपीएस और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि प्रशासन और आईआईटी रुड़की की टीम इस काम में गंभीरता से लगी है। अब तक 65 गांवों की सीमाएं तय की जा चुकी हैं और बाकी हिस्सों का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके बाद पहली बार इस इलाके का व्यवस्थित सरकारी नक्शा और भू-रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा।
खैरागढ़ के एडवर्ड पार्क भूमि मामले में प्रशासनिक आदेश बेअसर, स्टे के बाद भी धड़ल्ले से चल रहा निर्माण
खैरागढ़। खैरागढ़ शहर के बहुचर्चित एडवर्ड पार्क भूमि विवाद में प्रशासनिक दावों और आदेशों की हवा निकलती नजर आ रही है। जिला प्रशासन और नगर पालिका द्वारा जांच पूरी होने तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखने और निर्माण कार्य रोकने के साफ निर्देश दिए गए हैं, इसके बावजूद वहां निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। विवादित जमीन पर दीवारें खड़ी की जा रही हैं और लगातार निर्माण सामग्री पहुंचाई जा रही है। नगर पालिका की ओर से काम बंद करने का नोटिस चस्पा किए जाने के बाद भी काम न रुकने से स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह जमीन शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित है, जहां से प्रशासनिक अधिकारियों का रोज आना-जाना होता है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब आम गरीब आदमी या छोटे ठेले-गुमटी वालों पर प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर देता है, तो इस बड़े और रसूखदार मामले में अधिकारी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासनिक आदेशों का पालन केवल आम जनता के लिए ही अनिवार्य है।



