CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें बालोद एनएचएम भर्ती विवाद, भिलाई नगर निगम आयुक्त पर हाई कोर्ट का फैसला, रायपुर में डस्टबिन खरीदी घोटाला आरोप, प्रदेश में नया भू-जल कानून, राशन दुकान संचालकों की हड़ताल की चेतावनी, महादेव ऐप की तर्ज पर नए ऑनलाइन सट्टे का खुलासा, दुर्ग के अस्पतालों में आयुष्मान योजना का फर्जीवाड़ा, नारायणपुर में किसानों का ट्रैक्टर मार्च, चित्रकोट में 10 करोड़ का लेजर शो बंद होने और छत्तीसगढ़ में भवनों के सेफ्टी ऑडिट समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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बालोद एनएचएम भर्ती में फर्जीवाड़े का आरोप, डेढ़ महीने बाद भी जांच शुरू नहीं

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत बालोद में हुई सपोर्ट स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर और डेंटल असिस्टेंट की भर्ती पर सवाल उठ रहे हैं। करीब डेढ़ महीने पहले 11 उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाण पत्र पर गड़बड़ी का आरोप लगा था। इसके बाद एक महिला उम्मीदवार ने अचानक अपना इस्तीफा भी दे दिया। इस इस्तीफे से मामला और ज्यादा संदिग्ध हो गया है, लेकिन इसके बावजूद बचे हुए 10 लोगों के दस्तावेजों की जांच अब तक शुरू नहीं की जा सकी है। इस मामले में 18 मई 2026 को बालोद के एक निवासी संजीव मणि नायर ने जिला पंचायत सीईओ और स्वास्थ्य विभाग को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि अंतिम मेरिट सूची बनाते समय कुछ लोगों को उनकी असल योग्यता से ज्यादा नंबर दिए गए। इसके कारण ज्यादा योग्य उम्मीदवार दौड़ से बाहर हो गए। इसके साथ ही आरोप है कि अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच न तो मूल नियुक्ति आदेश से की गई और न ही उनके बैंक खाते या ट्रेजरी रिकॉर्ड में आए वेतन से इसका मिलान किया गया। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस सुस्ती की वजह से अब पूरी भर्ती प्रक्रिया की ईमानदारी पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

भिलाई नगर निगम आयुक्त को हटाने की कांग्रेस की याचिका हाई कोर्ट से खारिज

बिलासपुर हाई कोर्ट ने भिलाई नगर निगम के आयुक्त राजीव कुमार पांडेय को उनके पद से हटाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका भिलाई के महापौर के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने लगाई थी। पार्षदों का कहना था कि उन्होंने निगम की सामान्य सभा में आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया था। इसके बाद भी राज्य सरकार ने उन्हें नहीं हटाया और वह लगातार अपना काम कर रहे हैं। कांग्रेसी पार्षदों ने इसी सामान्य सभा के प्रस्ताव को अपना मुख्य आधार बनाकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। भिलाई नगर निगम में इस प्रस्ताव के पास होने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर काफी राजनीतिक बयानबाजी हो रही थी। हाई कोर्ट के जज ने इस मामले की सुनवाई के बाद याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अब आयुक्त राजीव कुमार पांडेय अपने पद पर बने रहेंगे और पहले की तरह ही निगम का कामकाज संभालते रहेंगे।

रायपुर नगर निगम पर डस्टबिन खरीदी में करोड़ों के घोटाले का आरोप

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नगर निगम द्वारा खरीदे गए डस्टबिन को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नगर निगम ने स्वच्छता अभियान के नाम पर जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग किया है। कांग्रेस प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार निगम ने 12 लीटर की क्षमता वाले एक डस्टबिन को करीब 235 रुपये में खरीदा है। जबकि यही डस्टबिन खुदरा बाजार में 190 से 200 रुपये और थोक बाजार में केवल 140 से 150 रुपये में मिल जाता है। नगर निगम ने शहर के लिए करीब 1 लाख 60 हजार डस्टबिन खरीदे हैं। इतनी बड़ी संख्या में खरीदी होने के कारण प्रति डस्टबिन 80 से 90 रुपये का यह अंतर सीधे तौर पर करोड़ों रुपये के अतिरिक्त भुगतान में बदल जाता है। कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि जब बाजार में कम कीमत पर सामान उपलब्ध था, तो महंगी दरों पर खरीदी क्यों की गई। इसके लिए क्या सही तरीके से टेंडर निकाले गए थे। कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरी खरीदी प्रक्रिया के दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए और किसी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच कराई जाए।

गिरते वाटर लेवल को रोकने छत्तीसगढ़ में लागू होगी नई निगरानी व्यवस्था

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में लगातार नीचे जा रहे भू-जल स्तर को सुधारने के लिए एक नया कानून लागू किया है। अब छत्तीसगढ़ भू-जल अधिनियम के तहत पूरे प्रदेश में तीन स्तरों पर पानी के उपयोग की निगरानी की जाएगी। इसके तहत अब घरेलू, कृषि, औद्योगिक और व्यावसायिक तौर पर जमीन से पानी निकालने वाले सभी नए और पुराने उपयोगकर्ताओं को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। फैक्ट्रियों और व्यावसायिक संस्थानों द्वारा पानी निकालने पर सरकार शुल्क भी लगा सकती है। इस नई व्यवस्था को चलाने के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष प्राधिकरण बनाया जा रहा है, जिसकी जिम्मेदारी मुख्य सचिव संभालेंगे। इसमें जल संसाधन, वित्त, कृषि और पर्यावरण विभाग के सचिव शामिल होंगे। इसके साथ ही जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला भू-जल प्रबंधन परिषद का गठन किया जाएगा। जमीन के अंदर पानी की स्थिति जानने के लिए प्रदेश भर में पीजोमीटर और सेंसर जैसे आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे रियल टाइम डाटा मिल सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ के राशन दुकान संचालकों का अल्टीमेटम, 5 जुलाई से हड़ताल की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में राशन दुकान संचालक अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस हड़ताल से प्रदेश की करीब 13 हजार राशन दुकानें बंद हो सकती हैं, जिससे राशन कार्ड धारक लाखों गरीब परिवारों के सामने खाद्यान्न का संकट खड़ा हो जाएगा। दुकानदारों का सबसे बड़ा विरोध कमीशन की राशि को लेकर है। उनका कहना है कि राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में उन्हें केवल 30 रुपये प्रति क्विंटल और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में 90 रुपये प्रति क्विंटल का मार्जिन मिलता है। महंगाई के इस दौर में वे इसे बढ़ाकर कम से कम 150 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा दुकानदारों का पिछले सात महीने से कमीशन का भुगतान भी अटका हुआ है। दुकानदारों ने एक साथ तीन महीने का राशन बांटने की सरकारी व्यवस्था का भी विरोध किया है, क्योंकि इससे अनाज के खराब होने और दुकानों में भारी भीड़ होने की समस्या आ रही है।

महादेव ऐप की तर्ज पर चल रहा था ऑनलाइन सट्टे का बड़ा नेटवर्क, चार्जशीट में खुलासा

रायपुर पुलिस ने महादेव सट्टा ऐप मामले में अदालत के सामने जो चार्जशीट पेश की है, उसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि सटोरियों ने महादेव ऐप की कार्यप्रणाली को देखकर खुद का एक नया ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया था। इस नेटवर्क का जाल छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, महाराष्ट्र और गोवा जैसे राज्यों में भी फैला हुआ था। राज्य में ऐसे करीब 261 सटोरियों के सक्रिय होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, एक बुनियादी ऑनलाइन सट्टा ऐप तैयार करने में इंजीनियरों की मदद से करीब 20 लाख रुपये का खर्च आता है। वहीं एडवांस फीचर्स वाले ऐप को बनाने में 50 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे थे। इस गिरोह का मुख्य आरोपी सकी दरडा उर्फ बाबू खेमानी दूसरे लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों में सट्टे की रकम जमा होने के बाद, उस पैसे को यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर विदेशों में भेज दिया जाता था। पुलिस को ऐसे कई डिजिटल वॉलेट के पते मिले हैं, जहां यह पैसा ट्रांसफर किया गया था।

दुर्ग के निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा, ओडिशा से लाए जा रहे थे मरीज

दुर्ग जिले के कुछ निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि अस्पताल संचालक एजेंटों के माध्यम से ओडिशा के मरीजों को यहाँ ला रहे थे। इन मरीजों की सामान्य बीमारियों को भी कागजों पर गंभीर दिखाकर महंगे सर्जिकल पैकेज का क्लेम पास कराया जा रहा था। दुर्ग के कलेक्टर अभिजीत सिंह ने इस मामले में शामिल दोषी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर बनी टीम ने जब कुछ अस्पतालों में औचक निरीक्षण किया, तो अकेले एसआर हॉस्पिटल में ही ओडिशा के करीब 60 से 70 मरीज भर्ती मिले। इसके अलावा कुछ अन्य अस्पतालों में भी ऐसे मरीज पाए गए। पूछताछ में पता चला कि ओडिशा के संबलपुर, बरगढ़ और नुआपाड़ा जैसे जिलों से मरीजों को लाने के लिए एजेंटों को प्रति मरीज 3 से 4 हजार रुपये का कमीशन दिया जा रहा था। यहाँ तक कि कुछ अस्पतालों में ओड़िया भाषा जानने वाले स्टाफ की अलग से भर्ती भी की गई थी ताकि मरीजों को रुकने का लालच दिया जा सके।

नारायणपुर में किसानों का ट्रैक्टर मार्च, खाद की कमी और महंगाई पर प्रदर्शन

नारायणपुर जिले में भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में स्थानीय किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर एक बड़ी ट्रैक्टर रैली निकाली। बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ बखरूपारा बाजार में जमा हुए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए धरना प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और खेती में इस्तेमाल होने वाली खाद की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत को बहुत बढ़ा दिया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। किसानों ने जिला प्रशासन से नारायणपुर में मक्का मंडी की उचित व्यवस्था करने की भी मांग की है। मंडी न होने के कारण उन्हें अपनी फसल को कम दामों पर बेचना पड़ता है। प्रदर्शन के बाद जब किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़े, तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हो गया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे आने वाले दिनों में और उग्र आंदोलन करेंगे।

चित्रकोट जलप्रपात में 10 करोड़ का लेजर शो बंद, नाइट टूरिज्म की योजना अधर में

बस्तर के प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात को रात में पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने की योजना फाइलों में दबकर रह गई है। यहाँ करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से लेजर लाइट सिस्टम लगाया गया था, जो कई साल बीतने के बाद भी नियमित रूप से शुरू नहीं हो सका है। दो से तीन बार इसका केवल ट्रायल किया गया, लेकिन यह परियोजना कभी आम जनता के लिए चालू नहीं हो पाई। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, जिस ठेकेदार ने इस सिस्टम को लगाया था, उसने इसे आधिकारिक तौर पर किसी भी सरकारी विभाग को हैंडओवर नहीं किया। देखरेख न होने के कारण अब इस परियोजना के कई कीमती उपकरण और लाइटें चोरी हो चुकी हैं। यहाँ तक कि लेजर शो के लिए आई बैटरियां भी गायब हैं। उद्घाटन से पहले ही इस परियोजना के बंद होने से सरकारी पैसे की बर्बादी हुई है। चित्रकोट के विधायक विनायक गोयल ने इस पर नाराजगी जताते हुए संबंधित विभाग से पूरी रिपोर्ट तलब की है।

कोचिंग हादसों के बाद छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों में होगा भवनों का सेफ्टी ऑडिट

दिल्ली और राजस्थान के कोटा में कोचिंग सेंटरों में आग लगने की घटनाओं के बाद छत्तीसगढ़ सरकार भी सतर्क हो गई है। राज्य के उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं को अपने क्षेत्रों के भवनों का सेफ्टी ऑडिट कराने के कड़े निर्देश दिए हैं। इसके लिए बकायदा अधिकारियों की एक विशेष टीम बनाई जाएगी जो शहरों के प्रमुख भवनों की जांच करेगी। डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि इस ऑडिट के दौरान विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि भवनों में आग से बचने के इंतजाम, इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास), बिजली की सुरक्षा और अन्य तय मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। जिन भवनों में कमियां पाई जाएंगी, उन्हें नोटिस देकर सुधार करने का समय दिया जाएगा और नियमों का पालन न करने वालों पर कार्रवाई होगी। सरकार ने सभी नगरीय निकायों से इस सेफ्टी ऑडिट की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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