Raipur Nakti Encroachment Clash Police FIR: घर भी उजड़ा और अब पुलिस केस भी! नकटी गांव में सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में अज्ञात ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज

Raipur Nakti Encroachment Clash Police FIR: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में पिछले दिनों अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है. जमीन खाली कराने पहुंची प्रशासनिक टीम और पुलिस बल के साथ ग्रामीणों की तीखी झड़प के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है. माना थाना पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने और हंगामा करने के आरोप में अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ बलवा सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. इस घटना के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है.

सरकारी अमले से तीखी बहस के बाद हुआ पथराव और हमला

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार नकटी गांव में प्रस्तावित नई विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए सोमवार को प्रशासनिक अमला भारी लाव-लश्कर के साथ जमीन खाली कराने पहुंचा था. जैसे ही जेसीबी मशीनों ने मकानों को ढहाना शुरू किया, वहां रहने वाले सैकड़ों ग्रामीण लामबंद हो गए और कार्रवाई का पुरजोर विरोध करने लगे. देखते ही देखते प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई. आरोप है कि आक्रोशित भीड़ ने ड्युटी पर तैनात कर्मचारियों पर हमला कर दिया और उनके काम में रुकावट पैदा की.

वीडियो फुटेज और तस्वीरों से की जा रही है दंगाइयों की शिनाख्त

सरकारी कर्मचारियों के साथ हुई इस बदसलूकी और मारपीट की घटना को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस अब एक्शन मोड में आ गई है. माना थाना प्रभारी ने बताया कि मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य माध्यमों से मिले वीडियो फुटेज और तस्वीरों को खंगाला जा रहा है. इन विजुअल्स के आधार पर उन चेहरों की पहचान की जा रही है जो भीड़ को उकसाने और पथराव करने में सबसे आगे थे. चश्मदीदों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि निर्दोष लोगों को परेशान किए बिना असली उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके.

विधायक आवास परिसर के लिए जमींदोज किए गए 80 से ज्यादा आशियाने

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह वह जमीन है जहां सरकार विधायकों के लिए एक आलीशान और आधुनिक आवासीय कॉलोनी बनाना चाहती है. इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने नकटी गांव के लगभग 80 कच्चे और पक्के मकानों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है. विस्थापित हुए परिवारों का दावा है कि तोड़े गए इन मकानों में से करीब 32 मकान ऐसे थे जो पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत पूरी तरह वैध तरीके से बनाए गए थे. अचानक हुई इस कार्रवाई से कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं.

सुरक्षा के लिहाज से तैनात किए गए थे 1000 से अधिक पुलिसकर्मी

प्रशासन को इस बात का पहले से अंदाजा था कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाली तोड़फोड़ का स्थानीय स्तर पर कड़ा विरोध हो सकता है. इसी आशंका के चलते रविवार की देर रात से ही पूरे नकटी गांव और उसके आसपास के रास्तों को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए जिले के विभिन्न थानों से बुलाए गए 1,000 से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों और महिला पुलिस बल की तैनाती की गई थी. इतनी भारी सुरक्षा के बावजूद ग्रामीणों के गुस्से को दबाया नहीं जा सका और अंततः हिंसक झड़प हो ही गई.

प्रभावित ग्रामीणों ने विस्थापन नीति पर खड़े किए गंभीर सवाल

दूसरी ओर, बेघर हुए ग्रामीणों ने पुलिसिया कार्रवाई को एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया है. उनका कहना है कि वे वर्षों से इस जमीन पर शांतिपूर्वक रह रहे थे और बिना किसी उचित पुनर्वास योजना के मानसून के इस सीजन में उनके घरों को उजाड़ देना अमानवीय है. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन मिलकर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं. इस मामले को लेकर रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने भी लगातार प्रदर्शन चल रहे हैं, जहां ग्रामीण अपने लिए पक्की छत और मूलभूत सुविधाओं की मांग पर अड़े हुए हैं.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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