
WhatsApp New Feature: मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप अपने प्लेटफॉर्म पर एक बेहद खास और नया फीचर पेश करने की तैयारी में है. इस नए बदलाव के तहत यूजर्स को किसी अन्य व्यक्ति से बात करने के लिए अपना निजी मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस नए विकल्प को ‘यूजरनेम’ नाम दिया गया है. हालांकि इस फीचर के आने से पहले ही देश में प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. इन चिंताओं के बीच व्हाट्सएप ने गुरुवार को अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है. कंपनी का दावा है कि इस नए फीचर को पूरी तरह से यूजर की गोपनीयता और सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
क्या सभी व्हाट्सएप यूजर्स के लिए यूजरनेम बनाना जरूरी होगा
व्हाट्सएप ने अपनी सफाई में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह नया फीचर सभी के लिए अनिवार्य नहीं बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक होगा. इसका मतलब यह है कि किसी भी यूजर पर नया यूजरनेम बनाने के लिए किसी तरह का कोई प्रशासनिक दबाव नहीं रहेगा. जो लोग अपने मौजूदा तरीके से ऐप का इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे बिना यूजरनेम के भी चैटिंग जारी रख सकते हैं. यह सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी जो बड़े पब्लिक ग्रुप्स में जुड़े हैं या नए लोगों से संवाद करते समय अपनी पहचान और मोबाइल नंबर को पूरी तरह गुप्त रखना पसंद करते हैं.
अनजान लोगों से सुरक्षा के लिए साथ में मिलेगी ‘यूजरनेम की’ की ताकत
इस नए फीचर को सुरक्षित बनाने के लिए व्हाट्सएप एक और सुरक्षा चक्र जोड़ने जा रहा है जिसे ‘यूजरनेम की’ कहा जाएगा. यह व्यवस्था एक गुप्त पासकोड की तरह काम करेगी. यदि कोई अज्ञात व्यक्ति आपको व्हाट्सएप पर पहली बार मैसेज भेजना चाहता है, तो उसके पास आपके यूजरनेम के साथ-साथ इस विशेष ‘की’ की जानकारी होना भी आवश्यक होगा. इस दोहरी सुरक्षा प्रणाली की वजह से स्कैमर्स और अनजान लोगों द्वारा भेजे जाने वाले फालतू संदेशों पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी. इसके अलावा यूजर्स के पास इस गुप्त कोड को अपनी इच्छानुसार कभी भी बदलने की पूरी आजादी होगी.
मशहूर हस्तियों और ब्रांड्स का नाम चोरी होने से बचाएगी रिजर्व पॉलिसी
इस घोषणा के बाद कई लोगों के मन में यह शंका थी कि कोई भी शातिर व्यक्ति किसी मशहूर हस्ती, राजनेता या सरकारी विभाग का नकली यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकता है. इस पर स्थिति साफ करते हुए कंपनी ने कहा कि मेटा के अन्य प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पहले से मौजूद प्रमाणित नामों को उनके असली हकदारों के लिए पूरी तरह सुरक्षित (रिजर्व) रखा गया है. कोई भी आम यूजर किसी सत्यापित खाते या बड़ी संस्था के नाम का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. यदि किसी को अपने अन्य सोशल मीडिया हैंडल जैसा ही नाम चाहिए, तो उन्हें अकाउंट लिंक करके अपना मालिकाना हक साबित करना होगा.
सरकार ने जताई गंभीर आपत्ति और व्हाट्सएप को थमाया कानूनी नोटिस
इस बीच भारत सरकार ने व्हाट्सएप के इस नए कदम को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है और कंपनी को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है. सरकार का मानना है कि मोबाइल नंबर न दिखने की स्थिति में अपराधियों के लिए अपनी पहचान छुपाना बेहद आसान हो जाएगा. इससे किसी दूसरे का रूप धारण करके की जाने वाली धोखाधड़ी, फर्जी लिंक के जरिए होने वाले साइबर हमले, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने के मामले और पैसों की ऑनलाइन ठगी की घटनाएं काफी बढ़ सकती हैं. सरकार ने साफ कहा है कि जब तक इस विषय पर पूरी बातचीत नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए. साथ ही कंपनी से 3 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा गया है.
व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने दिया जवाब और बताया कब से शुरू होगा यह फीचर
सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने कहा कि वे केवल अपने यूजर्स को प्राइवेसी का एक नया और बेहतर विकल्प दे रहे हैं. कंपनी ने साफ किया कि यह फीचर अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है और इसे साल 2026 के अंत तक चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा. व्हाट्सएप प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने सिस्टम में किसी भी प्रकार के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए पुख्ता तकनीकी इंतजाम किए हैं. इसमें नाम का सही मिलान सुनिश्चित करना और एआई के जरिए किसी दूसरे की पहचान चुराने वाले संदिग्ध पैटर्न को समय रहते पकड़ना शामिल है.
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