
Electricity Rate Hike Protest: छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से लागू हुई बिजली दरों में 6.23 प्रतिशत की नई बढ़ोतरी के खिलाफ राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है. नई दरें प्रभावी होने के पहले ही दिन आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने दुर्ग जिले में सड़क पर उतरकर राज्य सरकार की बिजली नीति के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जो अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली का उत्पादन करते हैं. इसके बावजूद यहां के आम नागरिकों पर हर साल महंगी बिजली का बोझ लाद दिया जाता है, जो पूरी तरह अनुचित है.
कोयले का विशाल भंडार फिर भी उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रहा बिल
प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रदेश महासचिव वद्दू आलम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोयले के विशाल भंडार मौजूद हैं. इसके साथ ही राज्य में कई बड़ी ताप विद्युत और जल विद्युत परियोजनाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं. बिजली उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में गिने जाने के बावजूद यहां के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली का लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने कहा कि इस नई बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर घरेलू उपभोक्ताओं, गरीब मजदूरों, मध्यम वर्ग, छोटे व्यापारियों और किसानों पर पड़ेगा, जिनका मासिक बजट पहले से ही चरमराया हुआ है.
लगातार तीसरे साल बढ़ीं कीमतें, अघोषित बिजली कटौती से जनता परेशान
दुर्ग जिला कार्यकारी अध्यक्ष जसप्रीत सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में यह लगातार तीसरा साल है जब बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ तो बिजली के दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली की क्वालिटी में कोई सुधार नहीं हो रहा है. राज्य के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में आज भी बार-बार अघोषित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज जैसी तकनीकी समस्याएं बनी हुई हैं. सरकार को दाम बढ़ाने के बजाय बिजली वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने पर ध्यान देना चाहिए.
स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और बिलिंग में गड़बड़ी पर उठाए सवाल
पार्टी नेता बलविंदर सिंह ने प्रदेश में लगाए जा रहे नए स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि राज्य के जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां से उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतें आ रही हैं. लोगों का कहना है कि अचानक उनके बिजली बिलों में भारी उछाल आया है और बिलिंग की इस नई प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है. कई जगहों पर मीटर रीडिंग में भी तकनीकी गड़बड़ियां पाई गई हैं. आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि सरकार इन सभी शिकायतों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराए.
बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की उठी मांग
दुर्ग में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बिजली दरों में की गई इस हालिया बढ़ोतरी को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की. पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि बाजार में हर जरूरी चीज के दाम पहले से बढ़े हुए हैं, ऐसे में बिजली बिल का यह नया झटका लोगों की आर्थिक परेशानियां और ज्यादा बढ़ा देगा. आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनहित में इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में ब्लॉक और वार्ड स्तर तक ले जाया जाएगा.
यहाँ छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षों के दौरान बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी का पूरा विवरण दिया गया है:
| वित्तीय वर्ष | बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी (प्रतिशत में) |
| वर्ष 2024 | 8.35% |
| वर्ष 2025 | 1.89% |
| वर्ष 2026 (वर्तमान वर्ष) | 6.23% |
यहाँ आम आदमी पार्टी द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों का संक्षिप्त ब्यौरा दिया गया है:
| विरोध का मुख्य बिंदु | उपभोक्ताओं और व्यवस्था पर प्रभाव | पार्टी की प्रमुख मांग |
| बिजली हब में महंगी दरें | घरेलू और मध्यम वर्ग के बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ | 6.23% की नई बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए |
| लगातार तीसरे साल वृद्धि | बिना सुधार के केवल बिजली के दामों में बार-बार इजाफा | अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगे और सप्लाई सुधरे |
| स्मार्ट मीटर में खराबी | उपभोक्ताओं को बिना पारदर्शिता के मिल रहे भारी-भरकम बिल | बिलिंग में गड़बड़ी की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो |



