CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें मानसून सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी कांग्रेस, दंतेवाड़ा में नक्सलियों से सोने के बिस्किट व हथियार बरामद, रायपुर डीजे विवाद में हाईकोर्ट का नोटिस, रिश्वत केस में कर्मचारियों को बरी करने का बड़ा फैसला, भिलाई स्टील प्लांट में करंट लगने से जूनियर इंजीनियर की मौत, 1200 नक्सल बंदियों की रिहाई की समीक्षा शुरू, 584 करोड़ के पीडीएस घोटाले की रिपोर्ट होगी पेश, नई शिक्षा नीति पर खर्च हुए 1404 करोड़, सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड बिजली मीटर अनिवार्य और खैरागढ़ में दो बारिश भी नहीं झेल सकी करोड़ों की लमानिन नहर समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाएगी कांग्रेस

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 14 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इस पांच दिवसीय सत्र में विपक्षी दल कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, बिजली संकट, महंगाई और किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। इसके अलावा महासमुंद के नकटी गांव से जुड़े मामले पर भी कांग्रेस सदन में स्थगन प्रस्ताव लाएगी। इस छोटे सत्र के लिए विधानसभा में कुल 1,033 प्रश्न लगाए गए हैं, जिनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सवाल शामिल हैं।

दंतेवाड़ा में नक्सलियों का बड़ा डंप बरामद, मिले सोने के बिस्किट

दंतेवाड़ा जिले के बारसूर थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने तोड़मा गांव के जंगलों से नक्सलियों का एक बड़ा गुप्त ठिकाना (डंप) ढूंढ निकाला है। यह कार्रवाई हाल ही में सरेंडर करने वाले एक नक्सली की निशानदेही पर की गई। जवानों को जंगल में तलाशी के दौरान जमीन के भीतर छुपाकर रखा गया एक प्लास्टिक का ड्रम मिला। जब इस ड्रम को बाहर निकालकर खोला गया, तो उसमें से सोने के बिस्किट, हथियार, भारी मात्रा में कारतूस, दैनिक उपयोग का सामान और लाखों रुपये नकद बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक यह डंप नक्सली संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, जिसका इस्तेमाल वे आगे की बड़ी वारदातों के लिए करने वाले थे।

रायपुर डीजे विवाद: सवा करोड़ के जुर्माने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

रायपुर में गणेश उत्सव के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने और ध्वनि प्रदूषण के नियमों के उल्लंघन का मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है। साल 2023 में शंकर नगर चौक पर हुए आयोजनों में नियमों के सात बार उल्लंघन की शिकायत डॉक्टर राकेश गुप्ता ने की थी। उन्होंने हर बार के उल्लंघन पर 15 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.05 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाने की मांग की है। इसके अलावा करबला तालाब सौंदर्यीकरण में वेटलैंड नियमों के उल्लंघन की शिकायत भी की गई है। यह पूरा विवाद पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में हुए नए संशोधनों के बाद खड़ा हुआ है, जिसमें आपराधिक कार्रवाई के बदले भारी आर्थिक दंड का नियम बनाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि राज्य के निर्णायक अधिकारी (आवास एवं पर्यावरण सचिव) ने प्रक्रिया तय न होने की बात कहकर शिकायत खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्णायक अधिकारी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

रिश्वत केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दो सरकारी कर्मचारी बरी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर बेंच ने भ्रष्टाचार के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो सरकारी कर्मचारियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी आरोपी को सिर्फ इसलिए दोषी नहीं माना जा सकता कि उसके पास से पैसे बरामद हुए हैं। रिश्वतखोरी साबित करने के लिए घूस मांगने का स्पष्ट और ठोस सबूत होना जरूरी है। साल 2010 के इस मामले में शिकायतकर्ता ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की मदद से जाल बिछाया था और एक वॉइस रिकॉर्डिंग भी पेश की थी। हालांकि सुनवाई के दौरान सामने आया कि जांच एजेंसी ने आरोपियों के वॉइस सैंपल नहीं लिए थे और न ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए जरूरी 65-बी का प्रमाण पत्र पेश किया गया था। इन तकनीकी कमियों और सबूतों के अभाव को देखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।

भिलाई स्टील प्लांट में बड़ा हादसा, करंट लगने से जूनियर इंजीनियर की मौत

भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के यूनिवर्सल रेल मिल विभाग में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां काम करने वाले जूनियर इंजीनियर असिस्टेंट विनोद कुमार यादव की क्रेन पर काम करने के दौरान करंट लगने से मौत हो गई। विनोद कुमार वैशाली नगर के रहने वाले थे और दूसरी पाली की ड्यूटी पर आए थे। हादसा शाम करीब साढ़े चार बजे हुआ जब विनोद जमीन से लगभग 30 से 40 फीट की ऊंचाई पर ओवरहेड क्रेन का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान वे हाई वोल्टेज डीसी करंट की चपेट में आ गए। ऊंचाई अधिक होने के कारण रेस्क्यू टीम को उन्हें नीचे उतारने में 15 से 20 मिनट का समय लगा। इसके बाद उन्हें तुरंत सेक्टर-9 अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।

सामान्य नक्सल मामलों के 1200 बंदी होंगे रिहा, सरकार ने शुरू की समीक्षा

छत्तीसगढ़ सरकार ने जेलों में बंद 1,200 से अधिक ऐसे बंदियों को रिहा करने का फैसला किया है जिन पर सामान्य प्रकृति के नक्सली मामले दर्ज हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर इसके लिए विधि विभाग, पुलिस और अभियोजन अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम हर हफ्ते जिलों के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मुकदमों की कानूनी समीक्षा करेगी। इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो केवल नक्सलियों के दबाव में आकर रास्ता खोदने, पुलिस की सूचना देने या जन मिलिशिया के सदस्य के रूप में काम करने के आरोप में सालों से जेल में हैं। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि हत्या, आईईडी ब्लास्ट, पुलिस से हथियार लूटने और फिरौती के लिए अपहरण जैसे गंभीर मामलों के आरोपियों को कोई राहत नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने 50 नक्सल मुक्त गांवों के विकास के लिए एक-एक करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया है।

विधानसभा में पेश होगी 584 करोड़ के पीडीएस घोटाले की जांच रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित 584 करोड़ रुपये के राशन घोटाले की जांच रिपोर्ट अब विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होने जा रही है। विधानसभा की विशेष जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में तीन पूर्व खाद्य सचिवों, एक खाद्य संचालक, 23 जिला खाद्य नियंत्रकों और 181 खाद्य निरीक्षकों सहित कुल 208 अधिकारियों-कर्मचारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। यह जांच समिति फरवरी 2024 में भाजपा विधायकों की मांग पर गठित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले कर रहे थे। समिति ने पाया कि राज्य में केंद्र के नियमों के बावजूद ई-पॉस (e-PoS) प्रणाली लागू करने में चार साल की देरी की गई, जिससे खाद्यान्न के स्टॉक में भारी गड़बड़ी हुई। समिति ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।

नई शिक्षा नीति पर 1404 करोड़ खर्च, फिर भी बच्चों की पढ़ाई कमजोर

छत्तीसगढ़ में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू हुए छह साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर कुल 1404 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है, जिसमें 60 फीसदी हिस्सा केंद्र का और 40 फीसदी हिस्सा राज्य का है। इसके बावजूद जमीन पर बच्चों के सीखने का स्तर अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक इस बजट का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 404 करोड़ रुपये कौशल और व्यावसायिक शिक्षा पर खर्च किए गए, जबकि सबसे बुनियादी क्षेत्र यानी शिक्षकों के प्रशिक्षण पर छह साल में केवल 24 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर 114 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी दूरदराज के गांवों में नेटवर्क और संसाधनों की भारी कमी बनी हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि प्राथमिक कक्षाओं की किताबों को अब स्थानीय बोलियों में तैयार किया गया है।

छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब लगेगा प्रीपेड बिजली मीटर

छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी कार्यालयों में अब आम उपभोक्ताओं की तरह प्रीपेड बिजली मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। बिजली कंपनियों का सरकारी विभागों पर करीब 3,432 करोड़ रुपये का बकाया होने और केंद्र सरकार की बिजली सुधार योजना के तहत मिलने वाला वित्तीय अनुदान रुकने के बाद राज्य के ऊर्जा विभाग ने यह कड़ा आदेश जारी किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी दफ्तरों में मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज कराना होगा, तभी बिजली मिल पाएगी। यह योजना दो चरणों में लागू की जाएगी। पहले चरण की शुरुआत 1 अगस्त 2026 से होगी, जिसमें ब्लॉक स्तर और उससे बड़े कार्यालयों को शामिल किया गया है। दूसरे चरण में निचले स्तर के बाकी सभी कार्यालयों में प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे बिजली की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी।

दो साल की बारिश भी नहीं सह सकी करोड़ों की लागत से बनी लमानिन नहर

खैरागढ़ जिले में किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई लमानिन बांध से देवारीभाठ तक की नहर पहली कुछ बारिशों में ही टूट गई है। नहर की कंक्रीट जगह-जगह से उखड़ चुकी है और कंक्रीटिंग के नीचे बिछाई गई काली पॉलीथिन साफ बाहर दिखाई देने लगी है। इसके अलावा नहर के किनारे किसानों के आने-जाने के लिए बनाई गई कच्ची सड़कें भी कीचड़ में बदल गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले साल भी नहर में दरारें आई थीं, लेकिन तब ठेकेदार और अधिकारियों ने सिर्फ ऊपरी मरम्मत करके मामले को दबा दिया था। नहर टूटने और रास्ता खराब होने के कारण दपका के पास लगभग 200 एकड़ खेतों तक ट्रैक्टर और कृषि मशीनें नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे किसानों को पारंपरिक तरीकों से खेती करनी पड़ रही है। ग्रामीण अब इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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