
CG Legislative Assembly Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन आज शुक्रवार को सदन में भारी हंगामे के आसार हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से साय सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज विस्तार से चर्चा होगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सदन में यह प्रस्ताव रखेंगे जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। सत्र के इस आखिरी दिन को लेकर दोनों ही दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में 10वीं बार अविश्वास प्रस्ताव, डॉ. रमन सिंह के समय चली थी सबसे लंबी बहस
राज्य के गठन के बाद से छत्तीसगढ़ विधानसभा में किसी सरकार के खिलाफ लाया जाने वाला यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले राज्य में 9 बार अलग-अलग सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं लेकिन संख्या बल के कारण कभी कोई सरकार नहीं गिरी। छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अविश्वास प्रस्ताव पर सबसे लंबी चर्चा साल 2015 में हुई थी। उस समय की डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर सदन में पूरे 24 घंटे 25 मिनट तक लगातार बहस चली थी।
क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव का मतलब और सदन में कैसे तय होता है इसका अंतिम फैसला
राजनीतिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार को गिराना नहीं होता है। विपक्ष इस व्यवस्था का उपयोग सरकार के कामकाज की कमियों को उजागर करने और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने के लिए करता है। चर्चा के दौरान जहां विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करता है वहीं सत्ता पक्ष अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाता है। पूरी चर्चा समाप्त होने के बाद यदि जरूरत पड़ती है तो विधानसभा अध्यक्ष मत विभाजन करवाते हैं या फिर ध्वनिमत से प्रस्ताव के भाग्य का फैसला होता है।
कानून व्यवस्था से लेकर बुलडोजर कार्रवाई तक, इन बड़े मुद्दों पर साय सरकार को घेरेगी कांग्रेस
कांग्रेस इस बार अविश्वास प्रस्ताव के जरिए साय सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की रणनीति तैयार कर चुकी है। विपक्ष मुख्य रूप से नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई, राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति, किसानों की विभिन्न समस्याओं, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सरकार पर हमला बोलेगा। दूसरी तरफ भाजपा के मंत्रियों और विधायकों की टीम सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का ब्यौरा देकर विपक्ष के हर आरोप का जवाब देने के लिए तैयार है।
संख्या बल के हिसाब से सरकार को कोई खतरा नहीं
इस अविश्वास प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व भले ही बहुत ज्यादा हो लेकिन विधानसभा के भीतर का गणित पूरी तरह से सरकार के पक्ष में दिखाई देता है। 90 सदस्यों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस समय सत्ताधारी दल भाजपा के पास 54 विधायक हैं। वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं और 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार होने के कारण साय सरकार को इस प्रस्ताव से किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है।
प्रश्नकाल में भी उठेंगे अहम सवाल, महतारी वंदन और धान खरीदी पर सरकार से जवाब मांगेगा विपक्ष
अविश्वास प्रस्ताव के अलावा आज प्रश्नकाल के दौरान भी सदन में कई जरूरी मुद्दों पर मंत्रियों से जवाब मांगे जाएंगे। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल महतारी वंदन योजना में महिलाओं को अपात्र घोषित किए जाने के नियमों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। इसके साथ ही विधायक अनिला भेंडिया मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में हुई वित्तीय गड़बड़ियों का मुद्दा उठाएंगी। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत भी धान खरीदी के समर्थन मूल्य और समितियों में धान की कमी (शॉर्टेज) को लेकर सहकारिता मंत्री को घेरेंगे।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी पेश करेंगे कैग रिपोर्ट, स्थानीय निकायों के कामकाज का खुलेगा लेखा-जोखा
मानसून सत्र के अंतिम दिन विधायी कार्यों के तहत वित्त मंत्री ओपी चौधरी भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (कैग) की स्थानीय निकायों से संबंधित महत्वपूर्ण रिपोर्ट सदन के पटल पर रखेंगे। इस रिपोर्ट के जरिए प्रदेश के नगरीय निकायों और पंचायतों के वित्तीय कामकाज की स्थिति सामने आएगी। इसके अलावा भाजपा विधायक गोमती साय, धर्मजीत सिंह और भईयालाल राजवाड़े भी अपने-अपने विभागों से जुड़े विभिन्न प्रतिवेदनों को विधानसभा की मेज पर प्रस्तुत करेंगे।
फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के जरिए उद्योगों को जमीन देने का मुद्दा भी गरमाया, विपक्ष ने किया था वॉकआउट
सत्र के चौथे दिन भी सदन में फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योगों को जमीन बांटने का मामला जमकर गूंजा था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवाल पर मंत्री ओपी चौधरी ने माना था कि रायपुर जिले के तिल्दा ब्लॉक के अल्दा गांव में इस तरह की जालसाजी की शिकायत मिली है और पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। मंत्री के जवाब से संतुष्ट न होने के कारण कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की थी और विरोध जताते हुए बाहर चले गए थे।



