
Bilaspur Rescue Operation: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में भारी मानसूनी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी के ड्रेनेज सिस्टम के दावों की पोल खोल दी है। शहर के निचले इलाकों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक में छह से आठ फीट तक पानी भर गया है। इस आपदा में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई है, जबकि करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। प्रशासन और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
बिलासपुर में रिकॉर्ड तोड़ मानसूनी बारिश से मची भीषण तबाही
बिलासपुर में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर की सूरत बिगाड़ दी है। गुरुवार की रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शुक्रवार तक जारी रहा। इसके कारण सड़कों से लेकर रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। शहर के मुख्य मार्गों पर नाले और नालियों का पानी ओवरफ्लो होकर बहने लगा। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में ऐसी स्थिति पहली बार निर्मित हुई है, जिसने पूरे शहर के जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

जलभराव के कारण दो दशकों का रिकॉर्ड टूटा और घरों में घुसा पानी
शहर के जिन इलाकों में पिछले 20 से 25 साल में कभी पानी नहीं भरा था, इस बार वहां भी लोग जलजमाव की समस्या से जूझ रहे हैं। अरपापार, रायपुर रोड, सकरी और शहर की बाहरी सीमाओं पर स्थित नई कॉलोनियों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने दो दशकों में कई बार तेज बारिश देखी है, लेकिन इस तरह घरों के भीतर पानी घुसने की घटना पहली बार हुई है। लोग पूरी रात सो नहीं पाए और अपने घरों में जमा पानी को बाहर निकालने का प्रयास करते रहे।

रिहायशी इलाकों में लाखों रुपये के घरेलू सामान का हुआ भारी नुकसान
शहर की प्रमुख कॉलोनियों जैसे देवनंदन नगर फेस 1 और 2, गीतांजलि सिटी, फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु विहार, वसंत विहार, सरोज विहार, जोरापारा और जबड़ापारा में बाढ़ का पानी सीधे कमरों तक पहुंच गया। इसके कारण लोगों के घरों में रखा कीमती सामान जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन, कूलर, सोफा सेट और राशन पूरी तरह डूब गए। सुबह होते-होते लोगों को समझ आया कि उनका भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है। जमीनी मंजिल पूरी तरह जलमग्न होने के कारण लोगों को अपने जरूरी सामान के साथ ऊपरी मंजिलों पर शरण लेनी पड़ी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने मैदान में उतरी एसडीआरएफ
हालात बिगड़ते देख जिला प्रशासन ने राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ की टीम को मोर्चे पर उतारा। देवनंदन नगर समेत आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियों में जलस्तर इतना बढ़ गया था कि पैदल चलना या गाड़ियां चलाना असंभव था। राहत दलों ने नाव और ट्रैक्टरों की मदद से इन कॉलोनियों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। पानी में फंसे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया।

बारिश थमने के बाद कॉलोनियों में पसरा कीचड़ और मलबे का साम्राज्य
शुक्रवार की शाम को जब बारिश की रफ्तार थोड़ी कम हुई, तो लोगों की मुसीबतें घटने के बजाय और बढ़ गईं। सड़कों और घरों से पानी उतरने के बाद हर तरफ कीचड़, गाद और गंदगी फैल गई। घरों की सफाई करने और खराब हो चुके सामान को छांटने में लोगों का पूरा दिन बीत गया। इस आपदा ने यह साफ कर दिया कि शहर की बुनियादी जल निकासी व्यवस्था एक दिन की भारी बारिश को भी झेलने की स्थिति में नहीं है।
नाले के तेज बहाव में बहने से लिंगियाडीह की बुजुर्ग महिला की मौत
इस भारी बारिश के बीच एक दुखद हादसा भी सामने आया। लिंगियाडीह के ठाकुर देव मंदिर के पास रहने वाली 65 वर्षीय प्रमिला बाई शुक्रवार की सुबह अपने काम पर जाने के लिए घर से निकली थीं। शीला अपार्टमेंट के पास स्थित नाले पर पानी का बहाव बेहद तेज था और पानी सड़क के ऊपर से बह रहा था। पुल पार करने के दौरान पैर फिसलने या तेज धारा की चपेट में आने से वह नाले में बह गईं। कुछ घंटों बाद उनका शव राजकिशोर नगर स्थित ऊर्जा पार्क के पास अरपा नदी की झाड़ियों में फंसा हुआ मिला।

सरकंडा पुलिस ने शव का पंचनामा कर जांच की कार्रवाई शुरू की
स्थानीय नागरिकों द्वारा नदी में शव देखे जाने की सूचना तुरंत आपातकालीन सेवा 112 को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव को बाहर निकाला। मृतका की पहचान होने के बाद सरकंडा थाना पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सिम्स अस्पताल की मर्च्युरी भेज दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
जलजमाव के कारण बारह घंटे बाद भी पहली मंजिल पर रहने को मजबूर लोग
सरकंडा और उसके आसपास के इलाकों में शुक्रवार की रात 11 बजे तक भी जलस्तर में कोई खास कमी नहीं देखी गई। शिवम होम्स, चौबे कॉलोनी और बंधवापारा जैसी बस्तियों में घरों के अंदर तीन से पांच फीट तक पानी जमा रहा। इसके चलते प्रभावित परिवारों को पूरी रात अपने घरों की पहली मंजिल पर ही गुजारनी पड़ी। लोग निचले फ्लोर पर उतरने की स्थिति में नहीं थे, क्योंकि गंदा पानी कमरों में भरा हुआ था।

बिजली आपूर्ति ठप होने से शहर में पीने के साफ पानी का गंभीर संकट
गुरुवार की रात से ही शहर के एक बड़े हिस्से की बिजली सुरक्षा के लिहाज से बंद कर दी गई थी ताकि जलभराव वाले इलाकों में करंट फैलने का खतरा न हो। बिजली गुल होने का असर जलापूर्ति पर पड़ा। नगर निगम के पंप बंद रहने से घरों में पीने के पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। लोगों को दैनिक कार्यों और पीने के लिए बाजार से बोतल बंद पानी खरीदकर काम चलाना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी दोगुनी हो गई।
जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए तीन साल में खर्च हुए अठारह करोड़
शहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने का दावा करते हुए नगर निगम ने पिछले तीन साल के भीतर चार प्रमुख क्षेत्रों में लगभग 18 करोड़ रुपये का बजट खर्च कर बड़े नालों का निर्माण कराया था। इन योजनाओं को मंजूरी देते समय दावा किया गया था कि इनके बनते ही बस्तियों में पानी भरने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। इसके बावजूद इस पहली बड़ी बारिश में ही ये सारे दावे और निर्माण कार्य नाकाम साबित हुए।

बंधवापारा में पांच करोड़ की लागत से बना नाला भी साबित हुआ नाकाम
सरकंडा के बंधवापारा इलाके में बिरकोना खार से आने वाले बरसाती पानी के निकास के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा नाला बनाया गया था। इमलीभाठा से कोनी स्थित सुपर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल तक बने इस 10 फीट चौड़े नाले से जल निकासी की उम्मीद थी। इसके बावजूद निर्माण में तकनीकी कमियों या सफाई के अभाव के कारण पानी का बहाव रुक गया और आसपास की रिहायशी कॉलोनियां जलमग्न हो गईं।
पुराना बस स्टैंड और लिंक रोड पर सात करोड़ खर्च के बाद भी हालात खराब
व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण पुराना बस स्टैंड और लिंक रोड क्षेत्र में जलजमाव रोकने के लिए पुराना दीप होटल से जवाली नाले तक 20 फीट चौड़ा नाला तैयार किया गया था। इस पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च हुए। विभागीय लापरवाही के कारण इस नए नाले को जोड़ते समय बीच के 6 फीट पुराने संकरे नाले को चौड़ा नहीं किया गया। इस तकनीकी खराबी की वजह से पानी आगे नहीं बढ़ पाया और पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में फिर से घुटनों तक पानी भर गया।

तालापारा और बालमुकुंद स्कूल क्षेत्र में स्मार्ट सिटी का बजट भी बेअसर
ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए स्मार्ट सिटी योजना के बजट से तालापारा इलाके में 1 किलोमीटर लंबा नाला बनाया गया था। इसके साथ ही बालमुकुंद स्कूल से तैयबा चौक तक भी 3 करोड़ रुपये की लागत से नाले का निर्माण हुआ था। इन भारी-भरकम निर्माण कार्यों के बाद भी जमीनी हकीकत नहीं बदली। बारिश होते ही इन इलाकों की सड़कों ने नदियों का रूप ले लिया और पानी लोगों की दुकानों और घरों में घुस गया।
यदुनंदन नगर में सवा तीन करोड़ का निर्माण कार्य आज तक पड़ा है अधूरा
तिफरा क्षेत्र के यदुनंदन नगर से लेकर शनि मंदिर तक 400 मीटर लंबा और 10 फीट चौड़ा नाला बनाने के लिए 3.27 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इस नाले का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के निवासियों को जलभराव से बचाना था। शनि मंदिर के पास आखिरी छोर पर इसका काम आज तक अधूरा छोड़ दिया गया है। नाले का आगे का रास्ता बंद होने के कारण बारिश का पूरा पानी वापस कॉलोनी के भीतर आ गया।

रेल पटरियां पानी में डूबने से बिलासपुर रेल मंडल में सात ट्रेनें रद्द
बिलासपुर रेलवे स्टेशन और यार्ड के भीतर रेलवे ट्रैक पूरी तरह पानी में डूब गए। पटरियों पर जलजमाव के कारण ट्रेनों के परिचालन की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने 7 ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया। इसके अलावा 4 अन्य ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया। कुछ यात्री ट्रेनों को चांपा और दाधापारा स्टेशनों पर ही रोककर वहीं से वापस रवाना किया गया, जबकि एक मेमू लोकल ट्रेन को बीच रास्ते में ही समाप्त करना पड़ा।

शनिचरी और व्यापार विहार समेत सत्रह ट्रांसफार्मर एहतियातन बंद किए गए
विद्युत वितरण कंपनी के कार्यपालन निदेशक एके अम्बस्थ के अनुसार, लगातार हुई बारिश की वजह से शनिचरी, व्यापार विहार और एसबीआर कॉलेज के पास स्थित बिजली सब-स्टेशनों में पानी भर गया था। इसके अलावा शहर के अलग-अलग वार्डों में स्थित 17 भारी क्षमता वाले ट्रांसफार्मर भी जलमग्न हो गए। किसी भी बड़े हादसे या करंट लगने की घटना को रोकने के लिए विभाग ने इन क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद रखी।
आपदा प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन ने बांटे सत्रह सौ भोजन के पैकेट
शहरी और ग्रामीण इलाकों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने खुद राहत कार्यों की कमान संभाली। आधी रात से ही नगर निगम, जिला प्रशासन और राजस्व अमले ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू किया। जिन परिवारों के घरों में पानी भरने के कारण चूल्हे नहीं जल सके, उन्हें राहत पहुंचाने के लिए नगर निगम की टीम ने 1,700 से अधिक तैयार भोजन के पैकेट वितरित किए।
एसडीआरएफ की टीमों ने विभिन्न जलमग्न इलाकों से दो सौ चार लोगों को बचाया
होमगार्ड के जिला कमांडेंट दीपांकर नाथ के नेतृत्व में रेस्क्यू टीमों ने शहर के विभिन्न हिस्सों से कुल 204 लोगों को सुरक्षित निकाला। राहत कार्यों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जगदंबा कॉलोनी से 25, बंधवापारा से 70, श्रीकांत वर्मा मार्ग मित्र विहार से 20, गीतांजलि सिटी से 20, मंगला से 5, देवनंदन नगर से 20, विजयापुरम से 15, चौबे कॉलोनी से 4 और रिस्दा मल्हार क्षेत्र से 25 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। जगदंबा कॉलोनी में तीन फीट पानी के बीच फंसे एक गंभीर मरीज तक टीम ने ऑक्सीजन सिलेंडर भी पहुंचाया।

पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच शुरू हुई तीखी राजनीतिक बयानबाजी
शहर में आई इस आपदा के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने आरोप लगाया कि इस भारी तबाही के बाद भी शहर के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और महापौर प्रभावित लोगों की सुध लेने नहीं पहुंचे। वहीं शहर विधायक अमर अग्रवाल ने प्रशासनिक टास्क फोर्स की बैठक लेकर अधिकारियों को जल्द से जल्द जलनिकासी, पेयजल आपूर्ति और बिजली व्यवस्था बहाल करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अलर्ट पर रहने को कहा है।
मौसम विभाग ने बिलासपुर संभाग में अगले चौबीस घंटे के लिए जारी किया अलर्ट
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, क्षेत्र में एक निम्न दाब का क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ही मानसून द्रोणिका और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव के कारण बिलासपुर संभाग में अगले 24 घंटों के दौरान अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। प्रशासन ने मौसम विभाग की इस चेतावनी को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है और निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।



