
CG Legislative Assembly Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन में भारी राजनीतिक घमासान देखने को मिला। साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में मैराथन चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार की विफलताओं को उजागर करते हुए 136 बिंदुओं का एक लंबा आरोप पत्र पेश किया। वहीं सत्तापक्ष की ओर से भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। दोनों पक्षों के बीच हुई इस तीखी बहस ने सदन का माहौल पूरी तरह गरमा दिया।
विधानसभा के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर ऐतिहासिक बहस
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आखिरी दिन पूरी तरह से अविश्वास प्रस्ताव के नाम रहा। दोपहर से शुरू हुई यह चर्चा देर रात तक चलती रही। सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस ने जहां सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताया, वहीं भाजपा ने पिछली कांग्रेस सरकार के घोटालों को गिनाकर विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने की पूरी कोशिश की।
‘ये सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि आम जनता का आरोप पत्र है’ – महंत
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि यह दस्तावेज केवल विपक्षी दल की आवाज नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की आम जनता की सामूहिक पीड़ा को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में समाज का हर वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। महंत ने कहा कि सरकार की नीतियां जनता के हित में काम नहीं कर रही हैं।
साय सरकार के कार्यकाल का एक-एक हफ्ता नाकामी का दस्तावेज
डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि अब तक का समय केवल वादों और घोषणाओं में बीता है। उन्होंने 136 बिंदुओं के आरोप पत्र का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का हर एक हफ्ता किसानों, महिलाओं और युवाओं के खिलाफ रचे गए षड्यंत्र का गवाह है। उन्होंने इसे प्रशासनिक नाकामी और राजनीतिक धोखे का एक बड़ा पुलिंदा करार दिया।
लोकतंत्र में अविश्वास प्रस्ताव का महत्व और नेहरू का ऐतिहासिक संदर्भ
अपने भाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने भारतीय संसद के इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि साल 1963 में जब आचार्य जेपी कृपलानी ने तत्कालीन नेहरू सरकार के खिलाफ देश का पहला अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उसका खुले दिल से स्वागत किया था। नेहरू ने कहा था कि लोकतंत्र को जीवंत रखने के लिए ऐसी बहसें बेहद जरूरी हैं।
मोरारजी देसाई के त्यागपत्र का उदाहरण देकर सरकार को घेरा
महंत ने आगे बढ़ते हुए साल 1979 के राजनीतिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को लगा कि वे सदन में अपना बहुमत खो चुके हैं या उनकी स्थिति कमजोर है, तो उन्होंने प्रस्ताव पर मतदान होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए वर्तमान सरकार के नैतिक रुख पर सवाल खड़े किए।
संत पवन दीवान की कविता पर बीजेपी विधायकों की तीखी आपत्ति
सदन में उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब नेता प्रतिपक्ष ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध संत और कवि पवन दीवान की कुछ पंक्तियां पढ़ीं। इन पंक्तियों में छत्तीसगढ़ के लोगों के स्वभाव को लेकर कुछ बातें कही गई थीं। इस पर कैबिनेट मंत्री ओपी चौधरी और वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर छत्तीसगढ़ की जनता के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली बातें स्वीकार नहीं की जाएंगी।
‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का नारा मेरे पिता ने दिया था – महंत
विपक्ष के नेता ने सत्तापक्ष की आपत्ति का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वे पंक्तियां उनकी खुद की लिखी हुई नहीं थीं, बल्कि वे केवल एक महान संत की कविता का पाठ कर रहे थे। उन्होंने मंत्री ओपी चौधरी को संबोधित करते हुए कहा कि जब यह नारा बना था तब की राजनीति अलग थी। उन्होंने गर्व से कहा कि ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का ऐतिहासिक नारा सबसे पहले उनके पिता ने ही बुलंद किया था।
मंत्रिमंडल के गठन से पहले ही हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई शुरू
आरोप पत्र के मुख्य बिंदु पर आते हुए चरणदास महंत ने हसदेव अरण्य का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई 2022 को तत्कालीन विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव के कोल ब्लॉकों को रद्द करने का पवित्र संकल्प लिया था। लेकिन वर्तमान सरकार के आते ही, जब मंत्रियों ने शपथ भी नहीं ली थी, 11 दिसंबर से ही वहां पेड़ों की कटाई का काम प्रशासनिक आदेशों के तहत शुरू करवा दिया गया।
मध्य भारत के फेफड़े कहे जाने वाले जंगल का जारी हुआ डेथ वारंट
महंत ने भावुक होते हुए कहा कि हसदेव अरण्य केवल एक जंगल नहीं है, बल्कि वह मध्य भारत के फेफड़े के समान है जो पूरे पर्यावरण को संतुलित रखता है। वहां के स्थानीय आदिवासियों की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था इस जंगल से जुड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई सरकार के आते ही कॉरपोरेट घरानों के दबाव में करीब 15 हजार हरे-भरे पेड़ों को काटने का एक तरह से डेथ वारंट जारी कर दिया गया।
राजस्थान के उद्योगों के लिए काटा जा रहा छत्तीसगढ़ का जंगल
विपक्ष ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा का दोहन बाहरी राज्यों के फायदे के लिए किया जा रहा है। महंत ने कहा कि राजस्थान के बिजली संयंत्रों को कोयला पहुंचाने के लिए हमारे राज्य के जंगलों को उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने सरकार की इस नीति की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय संप्रभुता और यहां के संसाधनों पर एक बड़ा आघात है।
अपनी जड़ें काटकर दूसरों का महल बनाने की नीति की निंदा
सदन में बोलते हुए महंत ने सरकार से सवाल किया कि क्या छत्तीसगढ़ के जंगल कोई साधारण लकड़ी का गोदाम हैं, जहां जब चाहे तब आरी चला दी जाए? उन्होंने कहा कि अपनी खुद की अमूल्य प्राकृतिक जड़ों को काटकर दूसरों के महलों को रोशन करने की यह नीति बेहद आत्मघाती है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जल्दबाजी में दी गई कटाई की अनुमतियों की उन्होंने सदन में कड़े शब्दों में भर्त्सना की।
भगवान राम के वनगमन मार्ग को उद्योगपतियों को सौंपने का आरोप
भाजपा की सांस्कृतिक राजनीति पर हमला करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जो दल भगवान राम को छत्तीसगढ़ का भांजा बताकर उनकी यात्रा से जुड़े स्थलों के विकास का दावा करता है, उसी दल की सरकार ने राम के पदचिह्नों से पूजनीय वनों को निजी उद्योगपतियों के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस व्यावसायिक दोहन के कारण आज राज्य के ग्रामीण इलाकों में मानव-हाथी संघर्ष की हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं।
15 साल की खदान को 9 साल में ही खोदकर किया गया साफ
महंत ने खनिजों के अंधाधुंध दोहन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन निजी कंपनियों को 15 वर्षों की लंबी अवधि के लिए कोयला खदानें आवंटित की गई थीं, उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर महज 9 साल के भीतर ही पूरा कोयला निकाल लिया। उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य में 170 से अधिक प्रकार की दुर्लभ औषधीय वनस्पतियां मौजूद हैं, जिन्हें इस अनियंत्रित खनन के कारण हमेशा के लिए नष्ट कर दिया गया।
बलौदाबाजार के जैतस्तंभ कांड और सतनामी समाज के आक्रोश का मुद्दा
धार्मिक और सामाजिक अशांति का जिक्र करते हुए विपक्ष ने बलौदाबाजार में हुई हिंसक घटना को याद किया। महंत ने कहा कि गुरु बाबा घासीदास की तपोभूमि पर स्थित पवित्र जैतस्तंभ को कुछ असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। सतनामी समाज द्वारा लगातार चेतावनी दिए जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन, कलेक्टर और एसपी ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके कारण बाद में वहां इतनी बड़ी हिंसा भड़की।
राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाएं और बिगड़ती कानून व्यवस्था
कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए नेता प्रतिपक्ष ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुई आपराधिक वारदातों की एक लंबी सूची सदन के सामने रखी। उन्होंने कोरिया जिले में एक महिला के साथ हुए अनाचार और उसे जिंदा जलाए जाने की जघन्य घटना का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र और रक्षाबंधन के दिन हुई अन्य घटनाओं को रेखांकित करते हुए राज्य में कानून का खौफ खत्म होने का आरोप लगाया।
पंचायतों और मनरेगा के कार्यों को राजनीतिक द्वेष में रोकने का आरोप
ग्रामीण विकास के मुद्दे पर बोलते हुए चरणदास महंत ने कहा कि वर्तमान सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है। पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत किए गए पंचायतों और मनरेगा (MGNREGA) के अनेक जनहित कार्यों को तकनीकी कारण बताकर बीच में ही रोक दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में काम ठप हो गया है और स्थानीय मजदूरों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मुंबई के विशेषज्ञों द्वारा बनाए गए ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ मॉडल पर सवाल
सरकार के विजन डॉक्यूमेंट पर सवाल उठाते हुए महंत ने कहा कि ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ का जो खाका तैयार किया जा रहा है, उसे बनाने वाले लोग मुंबई के कन्सलटेंट हैं, जिन्हें छत्तीसगढ़ की जमीनी हकीकत का कोई अंदाजा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल में राज्य की मूल कृषि व्यवस्था को तीसरे स्थान पर धकेल दिया गया है और केवल बड़े उद्योगों तथा सेवा क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।
कॉरपोरेट घरानों को राज्य सौंपने की सोची-समझी राजनीति
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह पूरी आर्थिक नीति देश के चुनिंदा बड़े औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। महंत ने कहा कि सरकार कृषि को कमजोर करके किसानों को अपनी जमीनों से दूर करना चाहती है ताकि वे जमीनें आसानी से उद्योगों को दी जा सकें। उन्होंने इसे राज्य के जल, जंगल और जमीन को पूंजीपतियों के हाथ में सौंपने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया।
पेसा कानून की बदहाली और खदान इलाकों से आदिवासियों का पलायन
मुख्यमंत्री के आदिवासी मूल से होने का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि इसके बावजूद राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा (PESA) कानून की क्या स्थिति है? उन्होंने आरोप लगाया कि खदानों के विस्तार के नाम पर बस्तर और सरगुजा के मूल निवासी आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है और उनके अधिकारों की रक्षा करने में संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।
भू-माफियाओं का बढ़ता आतंक और अबूझमाड़ के जंगलों में अवैध कटाई
महंत ने सदन का ध्यान भू-माफियाओं की बढ़ती सक्रियता की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में जमीनों पर अवैध कब्जों का खेल चल रहा है। इसके साथ ही बस्तर के संवेदनशील क्षेत्र अबूझमाड़ के घने जंगलों में भी अब पेड़ों की अवैध कटाई शुरू हो चुकी है। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह काम कर रहा है जिसकी जांच होनी चाहिए।
धान खरीदी में किसानों की परेशानी और जशपुर के आंकड़े पेश किए
धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसानों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने कहा कि इस बार धान खरीदी के दौरान किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बारदाने की कमी और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई किसान अपनी उपज समय पर नहीं बेच पाए। महंत ने उदाहरण देते हुए बताया कि जशपुर जिले में कुल 50 हजार पंजीकृत किसानों में से लगभग 8 हजार किसान अपना धान बेचने से वंचित रह गए।
भारतमाला परियोजना में 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा
भ्रष्टाचार के मामलों पर आते हुए नेता प्रतिपक्ष ने भारतमाला सड़क परियोजना का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के वितरण में 500 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा घोटाला हुआ है। एक ही भूमि खसरे को कई टुकड़ों में दिखाकर अपात्र लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है।
वन अधिकार पट्टों के वितरण में प्रशासनिक सुस्ती पर उठाए सवाल
डॉ. महंत ने कहा कि केंद्र की तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार के समय आदिवासियों और पारंपरिक वनवासियों के हितों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक वन भूमि अधिकार अधिनियम बनाया गया था। इसके तहत लाखों परिवारों को पट्टे दिए जाने थे। लेकिन वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में पात्र वनवासियों को पट्टे देने की प्रक्रिया को बेहद धीमा कर दिया गया है, जिससे उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।
महतारी वंदन योजना के पैसों का शराब की बिक्री में इस्तेमाल का आरोप
सरकार की सबसे लोकप्रिय ‘महतारी वंदन योजना’ पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसी योजना के दम पर भाजपा सत्ता में वापस आई है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकार एक हाथ से महिलाओं के खाते में पैसे डाल रही है और दूसरी तरफ शराब की रिकॉर्ड बिक्री करवाकर वही पैसा पुरुषों के माध्यम से वापस सरकारी खजाने में खींच रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में हर महीने एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की शराब बेची जा रही है।
चिटफंड कंपनियों के शिकार निवेशकों और महिलाओं की दुर्दशा
महंत ने कोरबा, जांजगीर-चांपा, धमतरी और बस्तर जैसे जिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां माइक्रो फाइनेंस और चिटफंड कंपनियों के झांसे में आकर हजारों महिलाओं ने कर्ज ले लिया था। अब वे महिलाएं भारी ब्याज और कर्ज के जाल में फंसकर रो रही हैं। उनके पास अपने बच्चों की स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं बचे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री को कई पत्र लिखे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
10 हजार सरकारी स्कूलों को बंद करने और शिक्षकों की कमी का मुद्दा
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर बोलते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर राज्य भर में लगभग 10 हजार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को बंद करने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। महंत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो मंत्री पहले 33 हजार नए शिक्षकों की भर्ती का दावा करते थे, उन्हें खुद सरकार ने चुनाव लड़ाकर लोकसभा भेज दिया ताकि भर्ती न करनी पड़े।
शिक्षकों के तबादलों में विसंगतियां और पाठ्यपुस्तक निगम में गड़बड़ी
शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण और तबादला नीति पर सवाल उठाते हुए महंत ने कहा कि स्थानीय स्तर पर समन्वय किए बिना चांपा के शिक्षकों को बस्तर और सरगुजा जैसी दूरदराज की जगहों पर भेज दिया गया, जिससे उनके पारिवारिक जीवन में अशांति फैल गई है। इसके साथ ही उन्होंने पाठ्यपुस्तक निगम में करोड़ों रुपये की लागत से छपी किताबों को छात्रों में बांटने के बजाय रद्दी और कारखानों में बेचे जाने का गंभीर आरोप लगाया।
उच्च शिक्षा की बदहाली और पीपीपी मोड पर अस्पतालों को सौंपने का विरोध
स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्र का ब्यौरा देते हुए विपक्ष ने कहा कि सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसरों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 1418 पद, चिकित्सा अधिकारियों के 560 पद और पैरामेडिकल स्टाफ के करीब ढाई हजार पद रिक्त हैं। इसके बावजूद नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। बस्तर में केंद्र के सहयोग से बने सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल को भी पीपीपी (PPP) मोड पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।
गौरेला-पेंड्रा में कलेक्टर और स्वास्थ्य मंत्री के बीच हुआ विवाद
डॉ. महंत ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का मामला भी उठाया। उन्होंने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक अस्पताल में हुई तीन महिलाओं की मौत की जांच करने पहुंचे एक युवा प्रशासनिक अधिकारी को स्वास्थ्य मंत्री ने केवल इसलिए फटकार लगाई और वहां से हटवा दिया क्योंकि उसने राजनेताओं की गलत और अनुचित सिफारिशों को मानने से साफ इनकार कर दिया था।
प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं का आरोप
ग्रामीण विकास की केंद्रीय योजनाओं पर बोलते हुए विपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में भी भारी विसंगतियां सामने आ रही हैं। जमीनी सर्वे किए बिना ही कई ऐसे हितग्राहियों को पहली और दूसरी किस्त की राशि जारी कर दी गई है जिनके पास खुद की कोई जमीन ही उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बार-बार दिल्ली दौरे के बाद भी राज्य को केंद्रीय फंड मिलने में देरी हो रही है।
बलरामपुर और सूरजपुर में प्रशासनिक अधिकारियों की कथित गुंडागर्दी
कानून और प्रशासन के गठजोड़ पर बोलते हुए महंत ने कुछ जिलों की घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बलरामपुर जिले में एक अनुविभागीय अधिकारी (SDM) की कथित प्रताड़ना के कारण एक बुजुर्ग ग्रामीण की मौत हो गई। इसी तरह सूरजपुर में भी एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा अपनी शिकायत लेकर आए एक फरियादी के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया। उन्होंने पूछा कि क्या यही सुशासन का मॉडल है?
राज्य में बढ़ते सूखे नशे के कारोबार पर गहरी चिंता
युवाओं में बढ़ते नशे की लत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ की हर गली और चौक-चौराहों पर आज सूखा नशा आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने अपने एक दूर के रिश्तेदार का बेहद दुखद उदाहरण देते हुए बताया कि नशे की आदत के कारण टोकने पर उस युवक ने लोकलाज के डर से अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। उन्होंने सरकार से इस अवैध नशे के कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।
सक्ती और कोटमी में सरेआम हुई गोलीबारी की घटनाओं का जिक्र
अपराध के बढ़ते ग्राफ को दिखाते हुए महंत ने हाल ही में हुई कुछ बड़ी हिंसक घटनाओं का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि सक्ती जिले में दो अज्ञात बदमाशों ने एक घर में घुसकर सरेआम एक युवती पर तीन गोलियां दाग दीं। इसी तरह कोटमी क्षेत्र में सर्राफा व्यापारियों से लूटपाट के प्रयास के दौरान असफल होने पर अपराधियों ने बिना किसी खौफ के गोलीबारी की। उन्होंने सवाल उठाया कि महज कुछ महीनों के भीतर राज्य की शांतिपूर्ण संस्कृति इतनी हिंसक कैसे हो गई?
नदियों में अवैध रेत उत्खनन और पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान
पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए विपक्ष ने कहा कि राज्य की जीवनदायिनी नदियां आज रेत माफियाओं के चंगुल में हैं। महानदी, शिवनाथ और अरपा जैसी प्रमुख नदियों के किनारों पर भारी मशीनों से अवैध उत्खनन किया जा रहा है जिससे भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। बलरामपुर में इस अवैध उत्खनन को रोकने गए एक ईमानदार सरकारी कर्मचारी को रेत माफियाओं ने वाहन से रौंदकर मार डाला था।
निर्दोष आदिवासियों की जेलों से रिहाई का मामला अभी भी लंबित
बस्तर के सुरक्षा परिदृश्य पर बात करते हुए चरणदास महंत ने कहा कि सरकार भले ही नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलताओं का दावा कर रही हो, लेकिन इस लड़ाई के बीच पिसने वाले निर्दोष आदिवासियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। पिछली समितियों की सिफारिशों के बाद भी जेलों में बंद सैकड़ों बेकसूर आदिवासियों की रिहाई की प्रक्रिया अधूरी पड़ी है, जबकि बड़े अपराधी और हथियारों के सौदागर खुलेआम घूम रहे हैं।
बिजली की दरों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी से आम जनता त्रस्त
महंत ने अपने भाषण के समापन बिंदु में आम उपभोक्ताओं से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में बिजली की दरों में जो भारी बढ़ोतरी की है, उसने आम मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों की कमर तोड़कर रख दी है। लगातार बढ़ रहे बिजली बिलों के कारण जनता में भारी असंतोष है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को याद दिलाते हुए कहा कि शासकों को हमेशा जनता का सेवक बनकर रहना चाहिए।
‘ऐसा विपक्ष किस काम का जो सिर्फ औपचारिकता पूरी करे’ – अजय चंद्राकर
भाजपा की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का करारा जवाब देते हुए वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष की भूमिका पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष एक प्रहरी यानी ‘वाचडॉग’ की भूमिका में होता है, लेकिन वर्तमान कांग्रेस विपक्ष पूरी तरह से दिशाहीन और रीढ़विहीन नजर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने केवल एक राजनीतिक औपचारिकता पूरी करने के लिए यह कमजोर प्रस्ताव पेश किया है।
‘पिछली कांग्रेस सरकार नादिर शाह के शासन जैसी लुटेरी थी’ – चंद्राकर
अजय चंद्राकर ने इतिहास का संदर्भ देते हुए कांग्रेस की पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में हमने महमूद गजनवी, तैमूर लंग और अहमद शाह अब्दाली जैसे कई आक्रमणकारियों के बारे में पढ़ा है, लेकिन इतिहास गवाह है कि सबसे बेरहमी से दिल्ली को लूटने का काम नादिर शाह ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकार का चरित्र भी ठीक उसी नादिर शाह की तरह केवल राज्य के संसाधनों को लूटने का था।
टीएस सिंहदेव की पुरानी चिट्ठी का हवाला देकर कांग्रेस को घेरा
पूर्ववर्ती सरकार के आंतरिक अंतर्विरोधों को उजागर करने के लिए चंद्राकर ने तत्कालीन पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव द्वारा मुख्यमंत्री को लिखी गई एक पुरानी गोपनीय चिट्ठी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सिंहदेव ने खुद अपनी चिट्ठी में स्वीकार किया था कि राज्य सरकार द्वारा फंड जारी न किए जाने के कारण वे गरीबों के लिए 8 लाख प्रधानमंत्री आवास बनाने में असमर्थ रहे। उन्होंने पूछा कि क्या यह अपनी ही सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण नहीं था?
बोधघाट परियोजना में 12 करोड़ रुपये स्वाहा करने का आरोप
आर्थिक विसंगतियों पर बात करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि पिछली सरकार के मुख्यमंत्री ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हुए सीना ठोककर कहा था कि वे बस्तर की महत्वाकांक्षी बोधघाट सिंचाई परियोजना को हर हाल में शुरू करेंगे। इस परियोजना के नाम पर बिना किसी जमीनी काम के परामर्श और विज्ञापनों में 12 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि पानी की तरह बहा दी गई और अंत में पूरी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
पीएससी घोटाले और एक ही कमरे से 35 नियुक्तियों पर तीखा हमला
युवाओं के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ का मुद्दा उठाते हुए अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CG-PSC) के कथित घोटाले का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान भाई-भतीजावाद इस कदर हावी था कि एक ही कोचिंग संस्थान और एक ही परीक्षा केंद्र के एक ही कमरे से करीब 35 प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों का चयन ऊंचे पदों पर हो गया था। साय सरकार ने आते ही इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपकर युवाओं को न्याय देने का काम किया है।
नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी और गोधन न्याय योजना में भ्रष्टाचार का दावा
कांग्रेस की फ्लैगशिप योजना ‘गोधन न्याय योजना’ को आड़े हाथों लेते हुए चंद्राकर ने कहा कि यह योजना केवल भ्रष्टाचार का एक माध्यम थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सेस के माध्यम से एकत्रित किए गए लगभग 2713 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी के नाम पर बिना किसी ऑडिट के ठिकाने लगा दिया गया। वर्मी कंपोस्ट और गोबर से पेंट बनाने के नाम पर 125 करोड़ रुपये का भारी नुकसान सरकारी खजाने को पहुंचाया गया।
चार महीने में छह छत्तीसगढ़ ओलंपिक कराने के दावों पर उठाए सवाल
पूर्व खेल मंत्री पर निशाना साधते हुए चंद्राकर ने पूछा कि दुनिया के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि महज 4 महीनों के भीतर छह ओलंपिक स्तर के खेल करा दिए जाएं, लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा कागजी चमत्कार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने और बेरोजगारी भत्ता तय करने के नाम पर एक गैर-मान्यता प्राप्त निजी कंपनी को बिना किसी निविदा के 2 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कानून और 18 लाख आवास देने का वादा पूरा
साय सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि वर्तमान सरकार ने आते ही समाज को तोड़ने वाली ताकतों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं और धर्मांतरण विरोधी कानून को अधिक कठोर बनाया है। इसके साथ ही पिछली सरकार द्वारा रोके गए गरीबों के 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को तुरंत मंजूरी देकर उनके खातों में राशि ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है। राज्य में 5 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार इसका सीधा प्रमाण है।
‘रहमान डकैत की तरह महंत जी को अपनों ने ही निपटा दिया’ – चंद्राकर
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में अजय चंद्राकर ने फिल्मी अंदाज में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत पर कटाक्ष किया। उन्होंने पुरानी फिल्म ‘धुरंधर’ के एक किरदार का हवाला देते हुए कहा कि महंत जी की स्थिति भी वैसी ही हो गई है जो हर गुट के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में कोई दम नहीं है और खुद कांग्रेस के भीतर के विरोधियों ने मिलकर सीधे-साधे महंत जी को आगे कर दिया है ताकि वे इस कमजोर प्रस्ताव के मलबे के नीचे दब जाएं।



