
CG DEd Candidates Protest: छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर डीएलएड (D.Ed) पास बेरोजगार युवाओं का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर महीनों से आंदोलन कर रहे इन अभ्यर्थियों के धरने को गुरुवार को 206 दिन पूरे हो गए। इस मौके पर युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना और धरना स्थल से ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।
डीएड अभ्यर्थियों के आंदोलन के 206 दिन पूरे, दंडवत प्रणाम रैली निकाल शुरू किया मार्च
नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर पिछले 206 दिनों से डटे डीएड अभ्यर्थियों ने गुरुवार को न्याय के लिए अनोखा प्रदर्शन किया। मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो चुके युवाओं ने जमीन पर लेटकर दंडवत प्रणाम रैली निकाली। अभ्यर्थियों का यह समूह इस तरह से प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा का घेराव करने के लिए आगे बढ़ा। युवाओं का कहना है कि इतने लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बाद भी सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है।
विधानसभा का घेराव करने निकले बेरोजगार युवाओं को पुलिस ने मुख्य गेट पर ही रोका
जैसे ही दंडवत रैली करते हुए अभ्यर्थियों का यह हुजूम विधानसभा परिसर की ओर आगे बढ़ने लगा, वहां पहले से मुस्तैद भारी पुलिस बल ने उन्हें रोकने के लिए मोर्चा संभाल लिया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को तूता धरना स्थल के मुख्य प्रशासनिक गेट पर ही बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारी युवाओं के बीच काफी देर तक तीखी बहस और हल्की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।

न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी 2300 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया अटकी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पदाधिकारियों और अभ्यर्थियों ने राज्य शासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवाओं का कहना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 2,300 पद पूरी तरह से रिक्त पड़े हैं। इस संबंध में माननीय न्यायालय ने भी स्पष्ट तौर पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी इस संवेदनशील मामले में कोई भी ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।
संवैधानिक मूल्यों और न्यायपालिका के निर्देशों की अवहेलना पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल
संघर्षरत अभ्यर्थियों ने प्रशासन के इस ढुलमुल रवैए पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में अदालत के फैसले सर्वोपरि होते हैं, लेकिन राज्य का प्रशासनिक तंत्र इन आदेशों को भी ठंडे बस्ते में डाले हुए है। युवाओं ने सवाल उठाया कि क्या अब नौकरशाही संविधान और न्यायपालिका से भी बड़ी हो गई है। अभ्यर्थियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक सभी 2,300 पदों पर नियुक्ति पत्र जारी नहीं हो जाते, उनका यह अनिश्चितकालीन आंदोलन समाप्त नहीं होगा।



