
Gangaram Crocodile Bemetara Bawa Mohatra Village Story: मगरमच्छ का नाम सुनते ही मन में एक खतरनाक और हिंसक जलीय जीव की छवि उभरती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां इंसान और मगरमच्छ के बीच गहरी आत्मीयता देखने को मिली। बेमेतरा जिले का बावा मोहतरा गांव आज भी एक ऐसे मगरमच्छ की यादों को सहेजे हुए है, जिसने इंसानों और वन्यजीवों के बीच भरोसे की एक नई परिभाषा लिखी। इस मगरमच्छ का नाम गंगाराम था, जो दशकों तक गांव के तालाब में रहा लेकिन उसने कभी किसी ग्रामीण या मवेशी को क्षति नहीं पहुंचाई।

गांव की पहचान बना गंगाराम, तालाब में साथ नहाते थे इंसान
बावा मोहतरा गांव के मुख्य तालाब में रहने वाला गंगाराम मगरमच्छ समय के साथ ग्रामीणों के जीवन का हिस्सा बन गया था। गांव की महिलाएं रोज उसी तालाब के घाट से पानी भरती थीं, किसान अपने पालतू मवेशियों को नहलाने लाते थे और बच्चे किनारे खेलते थे। कई बार नहाते समय ग्रामीणों का सामना पानी के भीतर गंगाराम से हो जाता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई बार तो बच्चे तैरते समय उससे टकरा भी जाते थे, लेकिन गंगाराम शांति से अपना रास्ता बदल लेता था और कभी किसी पर आक्रामक नहीं हुआ।
देश ही नहीं विदेशों तक पहुंची इंसान और मगरमच्छ के इस रिश्ते की चर्चा
गंगाराम के शांत और दोस्ताना व्यवहार की ख्याति धीरे-धीरे बेमेतरा जिले से निकलकर देश-विदेश तक फैल गई। पर्यावरणप्रेमी और वन्यजीव विशेषज्ञ इस अनूठे सह-अस्तित्व को देखने के लिए बावा मोहतरा गांव पहुंचने लगे। जब गंगाराम की स्वाभाविक मृत्यु हुई, तो पूरे गांव में शोक छा गया। ग्रामीणों ने एक पारिवारिक सदस्य की भांति उसका रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया और उसकी याद में स्मारक भी बनाया। यह घटना उस समय राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रही थी।

नई पीढ़ी को दी जा रही है गंगाराम और सह-अस्तित्व की सीख
अब बावा मोहतरा की इस अनूठी मिसाल को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय स्कूलों में बच्चों को गंगाराम की कहानी सुनाई जा रही है, ताकि उनमें प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सके। हालांकि, वन विभाग और विशेषज्ञों का मानना है कि गंगाराम का मामला एक दुर्लभ उदाहरण है। इसलिए लोगों को जंगली जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और उनके प्राकृतिक आवास का सम्मान करना चाहिए।

विश्वास और संवेदनशीलता की प्रेरणादायक कहानी
गंगाराम की यह गाथा एक दुर्लभ और प्रेरणादायक उदाहरण पेश करती है। यह बताती है कि यदि इंसान प्रकृति के नियमों का पालन करे और वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाए, तो उनके बीच एक संतुलित वातावरण बन सकता है। भले ही गंगाराम आज उस तालाब में मौजूद नहीं है, लेकिन उसकी यादें बावा मोहतरा के लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से प्रेम करने का संदेश देती रहेंगी।



