धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर: ABVP के कार्यकर्ता से केंद्रीय शिक्षा मंत्री और फिर इस्तीफा तक की कहानी: Political journey of Dharmendra Pradhan

Political journey of Dharmendra Pradhan: देश की राजनीति में धर्मेंद्र प्रधान उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू किया और संगठन में लगातार काम करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक पहुंचे। हाल के दिनों में NEET-UG परीक्षा विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच उनके इस्तीफे की खबर ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। दिलचस्प बात यह है कि अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत में वे स्वयं भी प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर चुके थे।

छात्र राजनीति से हुई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत

धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और छात्र हितों से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। तालचेर कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन संगठन में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई।

उनके सहपाठियों के अनुसार छात्र जीवन में वे एक सामान्य छात्र थे, लेकिन संगठनात्मक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

जब पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में खानी पड़ी पुलिस की लाठियां

धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित घटनाक्रम वर्ष 1997 का माना जाता है। उस समय ओडिशा में प्लस-टू परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में एबीवीपी ने विधानसभा के सामने बड़ा प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन का नेतृत्व धर्मेंद्र प्रधान कर रहे थे।

प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान समेत कई कार्यकर्ता घायल हुए। उस समय एबीवीपी के नेताओं का आरोप था कि राज्य में लगातार प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं और सरकार इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही।

करीब 29 वर्ष बाद एक बार फिर परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में छात्रों का आंदोलन देखने को मिला। इस बार प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और अंततः धर्मेंद्र प्रधान ने अपना पद छोड़ दिया।

संगठन में बढ़ी जिम्मेदारियां, फिर शुरू हुआ चुनावी सफर

छात्र राजनीति के बाद धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के संगठन में लगातार आगे बढ़ते गए। वर्ष 1994 से 1997 तक वे एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव रहे। इसके बाद 2004 से 2006 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

भाजपा संगठन में उनकी कार्यशैली को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक सहित कई राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम किया।

उनका चुनावी करियर वर्ष 2000 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पाललहाड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 2004 में वे देवगढ़ लोकसभा सीट से सांसद बने। इसके बाद दो बार राज्यसभा सदस्य रहे और वर्ष 2024 में संबलपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर फिर लोकसभा पहुंचे।

ओडिशा में भाजपा को मजबूत करने में निभाई अहम भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओडिशा में भाजपा के विस्तार में धर्मेंद्र प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी वे नियमित रूप से ओडिशा जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद करते थे और संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति पर काम करते थे।

पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि वे प्रदेश के अधिकांश कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से जानते थे और स्थानीय समस्याओं के समाधान में भी सक्रिय रहते थे। यही वजह रही कि भाजपा ने ओडिशा में अपना संगठनात्मक आधार लगातार मजबूत किया।

केंद्रीय मंत्री बनने के बाद संभाली कई अहम जिम्मेदारियां

नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को वर्ष 2014 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। बाद में उन्होंने कौशल विकास मंत्रालय का भी कार्यभार संभाला और फिर देश के शिक्षा मंत्री बने।

शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया। हालांकि उनके कार्यकाल में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर कई विवाद भी सामने आए।

NEET विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच दिया इस्तीफा

देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर विवाद बढ़ने और छात्रों के लगातार प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे नहीं चाहते कि किसी भी विवाद का असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़े।

उन्होंने अपने इस्तीफे में परीक्षा प्रणाली में सुधार, सीबीआई जांच और भविष्य में अधिक पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का भी उल्लेख किया। उनके इस्तीफे के बाद विपक्ष ने इसे छात्रों की जीत बताया, जबकि भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार परीक्षा सुधार की दिशा में लगातार काम करती रहेगी।

छात्र नेता से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक जीवन संघर्ष, संगठन और लगातार जिम्मेदारियां निभाने की कहानी रहा है। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले प्रधान ने संगठन में कई अहम पद संभाले, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव जीते तथा केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई।

उनका राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि संगठनात्मक राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा जा सकता है। वहीं हालिया इस्तीफा उनके लंबे सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया है, जिस पर देशभर में राजनीतिक चर्चा जारी है।

Also Read: E20 Petrol Reality Check VIDEO: क्या सच में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हो रहा है आपकी गाड़ी का इंजन? सरकार ने दिया जवाब

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button