
CG Teacher TET Data Shock: छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और पात्रता को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। राज्य के करीब 1.01 लाख से अधिक शिक्षकों के डेटा विश्लेषण से पता चला है कि बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों के पास शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का वैध प्रमाणपत्र ही नहीं है। इस खुलासे के बाद एक तरफ जहां शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, वहीं दूसरी ओर टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन रायपुर से लेकर दिल्ली तक जारी है।
प्रदेश में सिर्फ 28 हजार से ज्यादा शिक्षक ही टीईटी पास
विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,01,380 विश्लेषित शिक्षकों में से केवल 28,597 शिक्षकों के पास ही टीईटी का प्रमाण पत्र उपलब्ध है। इसके विपरीत 72,783 शिक्षक ऐसे पाए गए हैं जो बिना टीईटी उत्तीर्ण किए ही कक्षाओं में अध्यापन का कार्य करा रहे हैं। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो राज्य के कुल कार्यरत शिक्षकों में से लगभग 71 प्रतिशत शिक्षक बिना टीईटी सर्टिफिकेट के अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बिना टीईटी वाले शिक्षकों को हर हाल में देनी होगी परीक्षा
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन शिक्षकों के पास टीईटी का प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें अब इस पात्रता परीक्षा को उत्तीर्ण करना ही होगा। विभाग ने ऐसे सभी शिक्षकों का एक अलग डेटाबेस तैयार किया है और उनके सत्यापन की प्रक्रिया पर सीधे नजर रखी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन सभी शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी परीक्षा का आयोजन कराया जा सकता है ताकि वे अपने पद की न्यूनतम अर्हता पूरी कर सकें।
बिलासपुर जिले में पाए गए सर्वाधिक बिना टीईटी वाले शिक्षक
Bilaspur Top In Without TET Teachers: जिलेवार विश्लेषण में न्यायधानी बिलासपुर सबसे ऊपर निकलकर सामने आया है। बिलासपुर जिले में सर्वाधिक 5,646 शिक्षक बिना टीईटी प्रमाणपत्र के स्कूल में पढ़ाते पाए गए हैं। इसके अलावा राज्य के अन्य प्रमुख जिलों में भी ऐसे शिक्षकों की संख्या हजारों में है। इस आंकड़े के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में विभागीय नियमों की कड़ाई से पालना कराने को लेकर हलचल तेज हो गई है।
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन जारी
CG TET Protest & New Rules: एक ओर जहां प्रशासन टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों पर परीक्षा देने का दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठन इस नीति के विरोध में उतर आए हैं। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी अध्यापकों पर अब जाकर टीईटी की बाध्यता थोपना अनुचित है। इसी मांग को लेकर शिक्षक संगठनों ने प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के साथ-साथ राजधानी दिल्ली में भी अपनी आवाज उठाई है और नियम में ढील देने की मांग की है।
आंकड़ों की निगरानी के बाद कड़े फैसले ले सकता है विभाग
शिक्षकों के भारी विरोध के बावजूद शिक्षा मंत्रालय और राज्य स्कूल शिक्षा विभाग अपने रुख पर कायम नजर आ रहे हैं। विभाग का तर्क है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और एनसीटीई (NCTE) के मानकों के तहत प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए टीईटी अनिवार्य है। विभाग जल्द ही समीक्षा बैठक कर बिना टीईटी वाले शिक्षकों के भविष्य और उनकी आगामी परीक्षा की तिथियों को लेकर कोई ठोस निर्णय जारी कर सकता है।



