
CGPSC SI Pre Result Unique Names Controversy: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की सब इंस्पेक्टर प्री परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद से ही विवादों में घिर गया है। हालांकि, इस बार चर्चा का विषय परीक्षा का कटऑफ या अंक नहीं, बल्कि चयनित अभ्यर्थियों के अजीबोगरीब नाम हैं। मेरिट लिस्ट में स्पेसरानी, न्यूज़, हेराम, भक्त प्रहलाद और तुफैल जैसे नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई और विपक्ष ने भर्ती प्रक्रिया पर उंगली उठाई। बाद में पीएससी और चयनित अभ्यर्थियों ने सामने आकर पूरे मामले की सच्चाई उजागर की।

मेरिट लिस्ट में अनोखे नाम देखकर भड़की राजनीति
12 जुलाई 2026 को आयोजित हुई सब इंस्पेक्टर प्री परीक्षा का रिजल्ट जैसे ही आयोग की वेबसाइट पर अपलोड हुआ, उसकी मेरिट लिस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी। सूची में शामिल कुछ यूनिक नामों को आधार बनाकर कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर हमला बोल दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चयन प्रक्रिया पर संदेह जताया। विपक्षी नेताओं का आरोप था कि ऐसे संदिग्ध नामों के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता कटघरे में आ गई है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
पीएससी ने आधिकारिक बयान जारी कर दी सफाई
विवाद गहराते देख छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर अपना रुख स्पष्ट किया। आयोग ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं। पीएससी के अधिकारियों के अनुसार, परिणाम में वही नाम छापे गए हैं जो अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन भरते समय दर्ज किए थे। इन्हीं नामों पर एडमिट कार्ड जारी किए गए थे। अभ्यर्थियों ने शारीरिक दक्षता परीक्षा और प्रारंभिक लिखित परीक्षा भी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दी है।
चयनित अभ्यर्थियों ने खुद वीडियो जारी कर बताया सच
विवाद बढ़ता देख चयनित अभ्यर्थियों ने स्वयं सामने आकर अपनी पहचान उजागर की। रायगढ़ के रहने वाले न्यूज़ कुमार प्रधान ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उनकी स्कूल मार्कशीट में उनका नाम केवल न्यूज़ ही दर्ज है और सरनेम नहीं लिखा है।

इसी तरह स्पेसरानी, हेराम, तुफैल और भक्त प्रहलाद नाम के अभ्यर्थियों ने भी अपने शैक्षणिक दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि उनके नाम पूरी तरह असली हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका चयन किसी सिफारिश या गड़बड़ी से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और नियमानुसार हुआ है।
बीजेपी ने बोला हमला, कांग्रेस से मांगी सार्वजनिक माफी
अभ्यर्थियों की सच्चाई सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने कहा कि बिना जांच-पड़ताल किए मेधावी और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के चयन पर सवाल उठाना उनका अपमान है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की है कि वे इन लांछित अभ्यर्थियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
दो स्तरों पर सत्यापन के बाद जारी हुआ था परीक्षा परिणाम
सीजीपीएससी ने स्पष्ट किया कि 341 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा का परिणाम दो अलग-अलग स्तरों पर गहन सत्यापन के बाद ही जारी किया गया था। 12 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी 33 जिलों में बने 183 केंद्रों पर प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। आयोग के अनुसार, फिजिकल टेस्ट से लेकर दस्तावेज जांच तक हर चरण में अभ्यर्थियों के नाम और पहचान पत्र का मिलान किया गया था। ऐसे में किसी फर्जी अभ्यर्थी के शामिल होने की कोई गुंजाइश नहीं है।
341 पदों के लिए 7301 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए पात्र
4 अगस्त 2026 को जारी हुए परिणाम के मुताबिक, कुल 341 पदों के लिए 7301 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की है। ये सभी उम्मीदवार अब मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे। आयोग की समय सारिणी के अनुसार, मुख्य परीक्षा का आयोजन 24 से 26 अक्टूबर 2026 के बीच किया जाएगा। भर्ती में सूबेदार, सब इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। आयोग ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं।
नाम के भ्रम से पैदा हुआ विवाद अब शांत होने की ओर
इस पूरे प्रकरण से यह साफ हो गया है कि अभ्यर्थियों के नाम भले ही असामान्य हों, लेकिन उनकी पहचान और शैक्षणिक रिकॉर्ड पूरी तरह वैध हैं। भारतीय समाज में विविध संस्कृतियों और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के कारण कई बार लोग अपने बच्चों के अलग तरह के नाम रख देते हैं। दस्तावेजों के मिलान और खुद अभ्यर्थियों के बयान के बाद यह प्रशासनिक या तकनीकी गड़बड़ी का मामला नहीं बल्कि केवल एक नाम से जुड़ा भ्रम साबित हुआ है।



