
CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
मौत के 37 दिन बाद आया मैसेज, आयुष्मान योजना पर उठे सवाल
Healthcare Update: अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक बेहद चौंकाने वाला और लापरवाही भरा मामला सामने आया है, जहां मृत आरक्षक को आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में 42 दिन तक लगातार भर्ती दिखाया गया। जशपुर जिले के कटंगखार गांव निवासी देवनारायण राम पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर तैनात थे, जिन्हें तबीयत बिगड़ने पर 26 जून 2026 को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 30 जून 2026 को उनका निधन हो गया था, जिसके बाद अस्पताल ने मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया था। लेकिन हैरानी तब हुई जब उनकी मौत के पूरे 37 दिन बाद परिजनों के मोबाइल पर आयुष्मान सारथी योजना का एक मैसेज पहुंचा, जिसमें दावा किया गया कि मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रहा है और रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें 6 अगस्त तक अस्पताल में भर्ती दर्शाया गया। इस अमानवीय और संवेदनहीन भूल से मृत आरक्षक की पत्नी सीमा कुजूर ने गहरा दुख और रोष व्यक्त करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनता का विश्वास भी डगमगा रहा है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से सीएस आरसी आर्या ने सफाई देते हुए इसे ऑटो-जनरेटेड सिस्टम की तकनीकी गलती बताया है और स्पष्ट किया है कि मरीज का कार्ड 30 जून को ही ब्लॉक कर दिया गया था, केवल पांच दिन का बिल ही क्लेम हुआ है। प्रबंधन ने इस मामले की जानकारी रायपुर स्थित उच्च विभाग को भेजने की बात कही है, ताकि भविष्य में इस तरह की गंभीर तकनीकी त्रुटियों से बचा जा सके और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
CSVTU में कुर्सियों का खेल और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
Education News: स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय यानी CSVTU एक बार फिर बड़े प्रशासनिक विवादों और घोटालों के घेरे में आ गया है, जहां पूर्व और वर्तमान कुलपतियों के साथ-साथ कुलसचिवों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस विवाद की शुरुआत पूर्व कुलपति एमके वर्मा और कुलसचिव केके वर्मा के कार्यकाल से जुड़ी है, जिन पर अपने करीबियों और रिश्तेदारों को उपकृत करने, नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां करने और बिना शासन के स्पष्ट आदेश के डॉ. अंकित अरोड़ा को लगभग दो साल तक कुलसचिव का प्रभार सौंपने के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके अलावा, एमके वर्मा पर कुलपति पद पर रहते हुए सरकारी भवनों के स्ट्रक्चर डिजाइन और कंसल्टेंसी कार्यों के नाम पर अपने निजी बैंक खाते में 20 लाख रुपये से अधिक का भुगतान प्राप्त करने का भी आरोप है, जिसकी शिकायत राजभवन और बिलासपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विश्वविद्यालय में पीएचडी पाठ्यक्रम की फीस के नाम पर 9.44 लाख रुपये के कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, जिसमें शोधार्थियों से 30-30 हजार रुपये लेकर फर्जी रसीदें दी गईं और रकम विश्वविद्यालय खाते में जमा नहीं हुई। वहीं, नई नियुक्तियों के तहत परिवीक्षा अवधि में चल रहे डॉ. राजेश लालवानी को प्रतिनियुक्ति पर लाकर कुलसचिव बनाए जाने और साल 2017 की भर्ती परीक्षा का परिणाम आज तक जारी न किए जाने से हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। इन तमाम आरोपों से घिरे पूर्व कुलपति एमके वर्मा ने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कुछ असंतुष्ट तत्वों की साजिश बताया है, जबकि अब इन पांच बड़े सवालों के जवाब और आगामी जांच रिपोर्ट के बाद ही विश्वविद्यालय की वास्तविक स्थिति पूरी तरह से साफ हो पाएगी।
मोदी कार्यकाल में उजड़ा 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जंगल, एमपी और छत्तीसगढ़ आगे
Environment News: देश में विकास और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के नाम पर वनों के कटान की रफ्तार किस कदर बढ़ी है, इसका खुलासा हाल ही में केंद्र सरकार के आंकड़ों से हुआ है, जिसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य सबसे आगे नजर आ रहे हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच पूरे देश में 2,15,943 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि को गैर-वानिकी उपयोग के लिए आधिकारिक रूप से मंजूरी दी गई है, जिसमें खनन, जलविद्युत, सिंचाई और सड़क निर्माण जैसी बड़ी परियोजनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में ही 45,124.64 हेक्टेयर वनभूमि के डायवर्जन को हरी झंडी दे दी गई, जिसमें अकेले 2025-26 में मध्य प्रदेश में वनभूमि डायवर्जन पिछले वर्ष की तुलना में 116 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 94 प्रतिशत तक बढ़ गया है। मध्य प्रदेश, जो देश के सबसे बड़े वनक्षेत्र वाले राज्यों में शुमार है और जहां लगभग 94,689 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र है, लगातार चार साल की अवधि में 17,393.65 हेक्टेयर वनभूमि डायवर्जन के साथ देश में पहले स्थान पर बना हुआ है, जो छत्तीसगढ़ के मुकाबले करीब 4.25 गुना अधिक है। वहीं, छत्तीसगढ़ में अपनी 44 प्रतिशत भौगोलिक भूमि वन क्षेत्र के रूप में दर्ज होने के बावजूद कोयला खनन, ऊर्जा और रेल परियोजनाओं के भारी दबाव के कारण जंगलों के सिमटने की रफ्तार लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तरह अंधाधुंध वनभूमि के डायवर्जन से जहां एक ओर वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की चुनौती और अधिक गंभीर होती जा रही है, जिस पर तुरंत ठोस नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है।
आरटीई फंड पर गरमाई सियासत, 31 हजार बच्चों के 1.84 करोड़ की जांच के आदेश
Politics: शिक्षा के अधिकार यानी RTE के तहत मिलने वाली सहायता राशि के उपयोग में भारी अनियमितता की आशंका के चलते छत्तीसगढ़ के एक जिले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन शुरू हो गया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। शिक्षा सत्र 2025-26 के दौरान जिले के 562 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से पढ़ने वाले कुल 31,191 विद्यार्थियों के लिए शासन द्वारा ड्रेस और किताबों के नाम पर जारी किए गए लगभग 1.84 करोड़ रुपये के फंड की अब बारीकी से जांच की जाएगी। नियमों के मुताबिक सरकार प्रत्येक बच्चे के लिए गणवेश के एवज में 541 रुपये और किताबों के लिए 250 रुपये यानी कुल 791 रुपये प्रति छात्र की सहायता राशि सीधे निजी स्कूलों के खातों में भेजती है, ताकि गरीब बच्चों को इसका पूरा लाभ मिल सके। लेकिन कई अभिभावकों द्वारा यह गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई कि उन्हें इस प्रकार की किसी भी सरकारी सहायता राशि की कोई जानकारी नहीं दी गई और उन्हें अपनी खुद की जेब से महंगे दामों पर बच्चों के लिए किताबें और ड्रेस खरीदनी पड़ीं। अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने सभी 562 निजी स्कूलों के वित्तीय दस्तावेजों, छात्र-वार रिकॉर्ड और नोडल अधिकारियों के सत्यापन की प्रक्रिया की जांच के आदेश दे दिए हैं, जिसमें कई बड़े स्कूलों की भूमिका संदेह के घेरे में है। यदि जांच के दौरान यह साबित होता है कि स्कूलों ने शासन से मिली इस भारी-भरकम राशि का दुरुपयोग किया है या इसे डकार लिया है, तो संबंधित प्रबंधनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिससे निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
अविवाहित महिलाओं को भी मिलेगा महतारी वंदन योजना का लाभ, जल्द शुरू होगा रजिस्ट्रेशन
Government: छत्तीसगढ़ सरकार की बेहद लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है, जिससे राज्य की हजारों अन्य महिलाओं के जीवन में भी आर्थिक खुशहाली आएगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री राजवाड़े ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि शासन अब इस योजना में उन महिलाओं को भी शामिल करने जा रहा है जो 40 वर्ष से अधिक उम्र की हैं और अविवाहित हैं। अभी तक यह योजना मुख्य रूप से विवाहित, तलाकशुदा या विधवा महिलाओं के लिए ही संचालित हो रही थी, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है। सरकार के इस संवेदनशील और दूरदर्शी कदम से समाज के उस वर्ग को एक मजबूत आर्थिक संबल और सामाजिक सुरक्षा कवच मिलेगा, जिसे अक्सर जीवनयापन के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है और जो अब तक इस कल्याणकारी योजना के दायरे से पूरी तरह बाहर थीं। प्रशासनिक स्तर पर इस नई श्रेणी की पात्रता के नियमों को बेहद सरल बनाने और पोर्टल की तकनीकी तैयारियों को अंतिम रूप देने पर तेजी से मंथन चल रहा है, ताकि जल्द से जल्द औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें। जैसे ही महतारी वंदन योजना का पोर्टल दोबारा खोला जाएगा, 40 वर्ष से अधिक आयु की सभी पात्र अविवाहित महिलाएं अपना पंजीकरण करा सकेंगी और इस योजना का सीधा लाभ प्राप्त कर सकेंगी, जिससे राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ जाएगा।
भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप घोटाला, हिमांशु ब्रदर्स का ठेका रद्द और बड़ा एक्शन
Crime Update: छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगर भिलाई स्थित भिलाई स्टील प्लांट यानी BSP में हुए बहुचर्चित 250 टन लौह स्क्रैप चोरी और हेराफेरी के मामले में प्रबंधन ने अब तक का सबसे कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी फर्म पर बड़ी गाज गिराई है। बीएसपी प्रबंधन ने फ्लू डस्ट शिफ्टिंग के काम में गंभीर अनियमितता और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाए जाने के बाद हिमांशु ब्रदर्स का टेंडर तुरंत प्रभाव से शॉर्ट क्लोज यानी निरस्त कर दिया है और इस कार्य की पूरी जिम्मेदारी अब एक नई एजेंसी को सौंप दी गई है। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि ब्लास्ट फर्नेस से निकलने वाले मूल्यवान फ्लू डस्ट को मगडम से बाहर भेजने के बजाय फर्जी बिल्टियों के जरिए आरडीके इंडस्ट्रीज के नाम पर कागजों में दिखाया जा रहा था, जबकि माल चुपचाप अकलोरडीह स्थित एके ट्रेडर्स के गोदाम में पहुंचाया जा रहा था। इस पूरे अवैध कारोबार का भंडाफोड़ करने के लिए एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी ATS और पुलिस ने पिछले दिनों अकलोरडीह में औचक छापेमारी कर मौके से 250 टन कीमती लौह स्क्रैप और एक संदिग्ध वाहन को बरामद किया था, जिसके बाद से अब तक बीएसपी अधिकारियों, एसोसिएट इंजीनियरों और ट्रांसपोर्टरों समेत 17 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पुलिस इस मामले में फरार चल रहे अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दे रही है और उनकी संपत्तियों व बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, साथ ही संलिप्त पाई गई अन्य एजेंसियों जैसे साईं एसोसिएट्स पर भी कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर कर दिया गया है।
बिलासपुर मुक्त विश्वविद्यालय में कॉपियों के मूल्यांकन के लिए एआई तकनीक की शुरुआत
Technology: छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी क्रांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बिलासपुर स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित आधुनिक ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत कर दी है। विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में आयोजित प्री-बीएड और प्री-डीएलएड प्रवेश परीक्षाओं में शामिल हुए लगभग 54,498 अभ्यर्थियों की 80 हजार से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं के त्वरित और पारदर्शी मूल्यांकन के लिए इस विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब छात्रों की कॉपियों को पहले उच्च गुणवत्ता के साथ स्कैन करके डिजिटल रूप में बदला जाता है और फिर ऑनलाइन सुरक्षित सर्वर के माध्यम से तय समय सीमा में संबंधित शिक्षकों के कंप्यूटर या लैपटॉप पर भेजा जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एआई सॉफ्टवेयर केवल शिक्षकों को विषय की अध्ययन सामग्री और संदर्भ पुस्तकों के आधार पर उत्तरों को समझने और परखने में एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य करेगा, जबकि अंतिम रूप से नंबर देने और मूल्यांकन का अधिकार पूरी तरह से संबंधित शिक्षक के पास ही सुरक्षित रहेगा। इस प्रणाली में प्रत्येक कॉपी की जांच के लिए लगभग 3 मिनट का समय निर्धारित किया गया है और यदि कोई शिक्षक तय अवधि में मूल्यांकन नहीं कर पाता है, तो सिस्टम स्वतः उस कॉपी को दूसरे शिक्षक की आईडी पर ट्रांसफर कर देता है, जिससे न केवल परिवहन खर्च और समय की भारी बचत होगी बल्कि परीक्षा परिणाम भी समय पर जारी हो सकेंगे।
रायपुर में बांग्लादेशी घुसपैठिए पर पुलिस का शिकंजा, संजय नगर से युवक गिरफ्तार
Crime Update: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। रायपुर पुलिस की विशेष टीम ने शहर के संवेदनशील संजय नगर इलाके में सटीक सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक बांग्लादेशी नागरिक शेख रेहान को धर दबोचा, जो कुछ समय पहले चलाए गए पिछले जांच अभियान के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहा था। पुलिस की शुरुआती पूछताछ और तस्दीक में यह बात सामने आई है कि आरोपी शेख रेहान काफी लंबे समय से अपनी असली पहचान छिपाकर रायपुर के इस घनी आबादी वाले इलाके में अवैध रूप से शरण लिए हुए था और शहर के स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद रायपुर पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि आरोपी के पास फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुए, उसे छत्तीसगढ़ में शरण देने वाले स्थानीय मददगार कौन-कौन थे और उसके संपर्क देश के किन अन्य हिस्सों तक फैले हुए हैं। राजधानी में सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन द्वारा अवैध प्रवास करने वाले संदिग्धों की पहचान के लिए इस तरह के सर्च अभियानों को और अधिक तीव्र कर दिया गया है, और जल्द ही इस मामले में कई अन्य स्थानीय सहयोगियों के नाम भी सामने आने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ में गहराया पलायन का संकट, सात महीनों में 58 हजार प्रवासी पंजीकृत
Employment: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य में नई उद्योग नीति लागू कर स्थानीय युवाओं और अकुशल श्रमिकों को शत-प्रतिशत प्राथमिकता देने के लाख दावों के बावजूद राज्य से मजदूरों के पलायन का सिलसिला लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों द्वारा छत्तीसगढ़ के दो निर्दोष प्रवासी मजदूरों की निर्मम हत्या किए जाने की घटना ने एक बार फिर देश के अन्य राज्यों में काम करने वाले हमारे मजदूरों की सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के दावों की पोल खोल दी है। श्रम विभाग के चौंकाने वाले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल वर्ष 2026 के शुरुआती सात महीनों यानी जनवरी से जुलाई के बीच ही महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में काम की तलाश के लिए 58 हजार से अधिक श्रमिकों ने प्रवासी मजदूर के रूप में अपना पंजीकरण कराया है। ग्रामीण अंचलों में कृषि कार्यों के मौसमी होने और गैर-कृषि रोजगार के अवसरों की भारी कमी के कारण बिलासपुर और मुंगेली जैसे प्रमुख जिलों से हर साल हजारों की संख्या में पूरा परिवार ठेकेदारों और बिचौलियों के जाल में फंसकर दूसरे राज्यों की फैक्ट्रियों, ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों का रुख करने को मजबूर होता है। हालांकि उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने पिछले ढाई वर्षों में 3000 से अधिक नए उद्योग स्थापित होने और 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर पलायन के इन बढ़ते आंकड़ों और कागजातों के अभाव में योजनाओं से वंचित हो रहे मजदूरों की वास्तविक स्थिति सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
15 अगस्त से पहले रायपुर में हाई अलर्ट, 45 जगहों पर नाकेबंदी और ताबड़तोड़ जांच
Security Alert: स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत पूरे शहर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सख्त निर्देशों के बाद शहर के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों, आंतरिक चौराहों और अति-संवेदनशील इलाकों को मिलाकर कुल 45 महत्वपूर्ण स्थानों पर मजबूत बैरिकेड्स लगाकर कड़ी नाकेबंदी कर दी गई है, जहां पुलिस बल चौबीसों घंटे तैनात है। राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए पिछले दिनों रायपुर पुलिस ने शाम 8 बजे से रात 12 बजे के बीच सभी 45 चेकिंग पॉइंट्स पर एक साथ एक व्यापक और विशेष जांच अभियान चलाया, जिसके तहत शहर की सीमा में आने-जाने वाले हर छोटे-बड़े वाहन की बारीकी से तलाशी ली गई। इस दौरान कई संदिग्ध चार पहिया और दो पहिया वाहनों से बेसबॉल स्टिक, लकड़ी के डंडे, लोहे की छड़ें, अवैध रूप से लाई जा रही शराब और बिना वैध दस्तावेजों के घूम रहे संदिग्ध वाहन चालकों को पकड़ा गया, जिन्हें तुरंत हिरासत में लेकर संबंधित थानों में पूछताछ के लिए भेजा गया है। वाहन चेकिंग के साथ-साथ पुलिस की विशेष टीमें शहर के होटलों, लॉज, धर्मशालाओं, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों का औचक निरीक्षण कर वहां ठहरने वाले यात्रियों के आईडी प्रूफ का सत्यापन कर रही हैं तथा बिना पुलिस वेरीफिकेशन के किराएदार रखने वाले मकान मालिकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।



