
त्यौहारों और आगामी शादी-विवाह के सीजन से ठीक पहले रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। चाय की चुस्की से लेकर रोजमर्रा के खान-पान में इस्तेमाल होने वाली शक्कर के दामों में भारी तेजी आई है। थोक बाजार में शक्कर की कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। अगस्त महीने की शुरुआत से लेकर अब तक महज 18 दिनों के भीतर शक्कर 18 रुपये महंगी हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि कीमतों में तेजी का यह रुख बना रहा तो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में शक्कर 70 रुपये प्रति किलो और थोक में 65 रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर सकती है।
कम बारिश से गन्ने की फसल प्रभावित होने की आशंका, आपूर्ति पर पड़ा असर
व्यापारियों का कहना है कि शक्कर की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के पीछे कम बारिश एक प्रमुख कारण है। इस साल कई प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से गन्ने की पैदावार घटने की चिंता जताई जा रही है। बाजार में जब भी गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनती है, तब कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को मिलता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार और आयात से जुड़ी परिस्थितियों के कारण भी स्थानीय स्तर पर आपूर्ति का संतुलन प्रभावित हुआ है।
एथेनॉल निर्माण और सरकारी स्टॉक जारी न होने से बाजार पर बढ़ा दबाव
चीनी की किल्लत और कीमतों में उछाल के पीछे एथेनॉल उत्पादन को भी एक वजह माना जा रहा है। गन्ने और उसके बाई-प्रोडक्ट्स का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने से शक्कर के लिए कच्चे माल की उपलब्धता कम हुई है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से अभी तक बाजार में अतिरिक्त स्टॉक जारी नहीं किया गया है। सरकारी गोदामों से अतिरिक्त चीनी बाजार में न आने से थोक कारोबारियों पर दबाव बढ़ा है। व्यापारियों का कहना है कि मिलों से माल आने में 15 से 20 दिन का समय लग रहा है, जिसे घटाकर 7 से 8 दिन किया जाना जरूरी है।
त्यौहारों और शादियों के सीजन में 15 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं मिठाइयां
शक्कर की महंगाई का सबसे बड़ा असर आगामी त्यौहारों और शादी के सीजन में मिठाई कारोबार पर पड़ना तय माना जा रहा है। शक्कर के साथ-साथ काजू, बादाम और अन्य मेवों की कीमतें भी पहले से चढ़ी हुई हैं। कच्चे माल के दाम बढ़ने की वजह से हलवाई और मिठाई निर्माता दुकानों पर मिठाइयों के भाव 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि शक्कर की जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए और बाजार में आपूर्ति तेज की जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।



