CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें PWD की बड़ी कार्रवाई से लेकर बस्तर आबकारी कांड, CGSOS 10वीं-12वीं परीक्षा शेड्यूल, यौन उत्पीड़न के आरोपी अफसर की पोस्टिंग, गरियाबंद अधूरे पुल पर NHRC का नोटिस, राहुल का मिशन 76, नर्सों का हल्लाबोल, हसदेव तारा कोल ब्लॉक विवाद, NDPS केस में पुलिसिया दंड और SECL मानिकपुर में मुआवजे की मांग समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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Pसुस्त रफ्तार पर गाज, PWD ने बस्तर के 6 बड़े ठेकेदारों को किया ब्लैकलिस्ट

Government Action: लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बस्तर संभाग में सड़क और पुल-पुलियों के निर्माण में अत्यधिक देरी और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर 6 प्रमुख ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। रायपुर स्थित विभागीय मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में के. मोहन रेड्डी और मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा का पंजीयन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है, जबकि चार अन्य निर्माण कंपनियों—मेसर्स राघवा कंस्ट्रक्शन, मेसर्स शांति विजय कंस्ट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स पंकज हालदार के लाइसेंस नवीनीकरण पर 2 से 5 साल तक का प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कार्रवाई सुकमा जिले के चिंतलनार-मरियागुड़म, कोंटा-गोलापल्ली व भेज्जी-चिंतागुफा मार्ग तथा नारायणपुर जिले के नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग के समय पर पूरे न होने के कारण की गई है। बस्तर के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क निर्माण अधूरा रहने से आम जनता, सुरक्षा बलों और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। विभाग द्वारा बार-बार कारण बताओ नोटिस जारी करने, अनुबंध अवधि बढ़ाने और ठेकेदारों द्वारा दिए गए शपथ पत्रों के बावजूद जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। भविष्य में संभावित कानूनी अड़चनों को देखते हुए राज्य सरकार ने बिलासपुर उच्च न्यायालय में पहले ही कैविएट दायर कर दी है ताकि ठेकेदारों के कोर्ट जाने पर सरकार का पक्ष सुना जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनसुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचा ढांचागत प्रोजेक्ट्स में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आने वाले दिनों में अन्य सुस्त ठेकेदारों पर भी गाज गिर सकती है।

बस्तर में नकली शराब का भांडाफोड़, कांकेर से महासमुंद तक आबकारी अफसर निलंबित

Crime Update: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर इलाके में पुलिस ने एक सुनसार किराए के घर में दबिश देकर नकली शराब बनाने के एक बड़े अवैध गिरोह का पर्दाफाश किया है। की इस बड़ी कार्रवाई में मौके से 4,409 खाली बोतलें, 170 पेटियों में भरे खाली पौवे, 3,380 ढक्कन और रॉयल स्टैग, रॉयल चैलेंज, मैकडॉवल नंबर-1 व इम्पीरियल ब्लू (IB) जैसी नामी कंपनियों के फर्जी लेबल व होलोग्राम जब्त किए गए हैं। मध्यप्रदेश के सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद चलाए गए इस विशेष जांच अभियान से यह अंदेशा सच साबित हुआ कि नामी ब्रांड्स के नाम पर अवैध शराब तैयार कर सरकारी दुकानों व बाजारों में खपाने की एक बड़ी साजिश रची जा रही थी। इस गंभीर प्रशासनिक चूक और निगरानी में विफलता को देखते हुए भानुप्रतापपुर की आबकारी उप निरीक्षक रानू मरकाम को निलंबित कर दिया गया है, जबकि सहायक जिला आबकारी अधिकारी और प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी मधुकर श्याम हरित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इसके अलावा महासमुंद जिले की बेमचा स्थित सरकारी शराब दुकान में 190 रुपये के पौवे को 200 रुपये में बेचने की शिकायत सही पाए जाने पर आबकारी उप निरीक्षक नितेश सिंह बैस को निलंबित कर दो अन्य अफसरों से जवाब-तलब किया गया है। दुकानों में मनमानी वसूली और बाहरी परिसर में फर्जी शराब पैकेजिंग के इस दोहरे खुलासे ने आबकारी विभाग की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद पूरे प्रदेश की शराब दुकानों का ऑडिट कराने की तैयारी चल रही है।

10वीं-12वीं ओपन स्कूल परीक्षा के आवेदन शुरू, जानिए अंतिम तारीखें

Education News: छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल (CGSOS), रायपुर ने नवंबर 2026 में आयोजित होने वाली हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) की परीक्षाओं के लिए विस्तृत समय सारणी और आवेदन प्रक्रिया की अधिकारिक घोषणा कर दी है। परीक्षार्थियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण अपडेट है, जिसके तहत सामान्य शुल्क के साथ आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया 10 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। जो छात्र इस अवधि में फॉर्म नहीं भर सकेंगे, उन्हें 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक 500 रुपये के विलंब शुल्क (Late Fee) के साथ आवेदन करने का अंतिम अवसर दिया जाएगा। परीक्षार्थी CGSOS की आधिकारिक वेबसाइट (www.sos.cg.nic.in) से आवेदन पत्र डाउनलोड कर सकते हैं और उसे पूरी तरह भरकर आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेजों के साथ अपने निकटतम निर्धारित अध्ययन केंद्र (Study Centre) में जमा करा सकते हैं। राज्य ओपन स्कूल के निर्देशों के अनुसार, अध्ययन केंद्रों को 19 अक्टूबर तक जिला समन्वयकों के पास और जिला समन्वयकों को 21 से 22 अक्टूबर तक राज्य कार्यालय में फॉर्म जमा कराने होंगे। बोर्ड सचिव ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि बीत जाने के बाद किसी भी स्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस परीक्षा के माध्यम से राज्य के हजारों ड्रॉपआउट्स, कामकाजी लोगों और नियमित शिक्षा से वंचित छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने का बड़ा मौका मिलेगा।

यौन उत्पीड़न के आरोपी अफसर को जिले की कमान, महिला बाल विकास विभाग में विवाद

Government Controversy: महिला एवं बाल विकास विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी की नई पदस्थापना को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। CG Top 10 News Today के तहत सामने आए इस मामले में अधिकारी वरुण नागेश, जिन पर दंतेवाड़ा में जिला कार्यक्रम अधिकारी रहते हुए दो महिला मातहत कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न के संगीन आरोप लगाए थे और कलेक्टर स्तर की जांच समिति द्वारा दोषी पाए जाने के बाद निलंबित किया गया था, उन्हें गरियाबंद जिले का नया जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) बना दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान ही उन्हें पहले राज्य स्तरीय संसाधन केंद्र (SRC) रायपुर में पदस्थ किया गया और अब उन्हें उनके गृह जिले गरियाबंद की कमान सौंप दी गई है। विभागीय नियमों और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के प्रावधानों के तहत किसी भी अधिकारी को सामान्य परिस्थितियों में उसके गृह जिले में पदस्थापित नहीं किया जाता, जब तक कि सेवानिवृत्ति में एक वर्ष का समय न बचा हो। इस नियुक्ति के पीछे अधिकारी द्वारा न्यायालय से स्टे मिलने का हवाला दिया जा रहा है, हालांकि विभागीय स्तर पर स्टे के स्पष्ट निर्देशों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। महिला कर्मचारियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के संवेदनशील मामले में दोषी पाए गए अधिकारी को मुख्य प्रशासनिक पद देने से विभाग के भीतर कर्मचारियों में भारी असंतोष और असुरक्षा की भावना पनप रही है। इस निर्णय से विभागीय कार्यशैली और महिला सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

गरियाबंद में 6 साल से अधूरा पुल, लोहे की सीढ़ी से नदी पार करने पर CS से जवाब तलब

Human Rights: गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड स्थित खंभाठा और देहारगुड़ा गांवों के बीच पैरी नदी पर बन रहे 300 मीटर लंबे अधूरे पुल का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। Chhattisgarh News Today के अनुसार, पिछले छह वर्षों से निर्माण कार्य अधर में लटके होने के कारण स्थानीय स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को मानसून के दौरान उफान मारती नदी पार करने के लिए संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए NHRC ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना है और राज्य के मुख्य सचिव विकासशील को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने राज्य सरकार से पुल निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी के कारणों, स्कूली बच्चों व ग्रामीणों की जान को बने खतरे और सुरक्षा के लिए उठाए गए तात्कालिक कदमों का पूरा ब्योरा मांगा है। मैनपुर क्षेत्र के दर्जनों बच्चों के लिए यह खतरनाक रास्ता ही एकमात्र विकल्प है, जहां बारिश के मौसम में छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि एक वर्ष पूर्व ग्रामीणों को छह महीने में पुल निर्माण पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया गया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। मुख्य सचिव द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आयोग जवाबदेही तय करेगा और निर्माण एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ समयबद्ध पुल निर्माण के निर्देश दे सकता है।

चुनाव के लिए राहुल गांधी का ‘मिशन 76’, विक्रांत भूरिया को सौंपी एमपी-छत्तीसगढ़ की कमान

Politics Update: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने वर्ष 2028 के आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की 76 अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीटों को जीतने के लिए ‘मिशन 76’ की शुरुआत की है। CG News की इस बड़ी रणनीतिक हलचल के तहत अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक विक्रांत भूरिया को दोनों राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों का मुख्य प्रभारी बनाया गया है। दोनों राज्यों का राजनीतिक इतिहास गवाही देता है कि सत्ता की चाबी आदिवासी सीटों से ही निकलती है; जहां 2018 में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ की 29 में से 25 एसटी सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, वहीं 2023 में भाजपा ने 17 सीटों पर परचम लहराकर प्रचंड बहुमत के साथ विष्णुदेव साय सरकार का गठन किया। विक्रांत भूरिया ने दोनों राज्यों के आदिवासी इलाकों में सघन दौरे शुरू कर दिए हैं और वे जल, जंगल, जमीन के जलते मुद्दों पर बड़े जन-आंदोलनों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं, जिनमें स्वयं राहुल गांधी भी शिरकत करेंगे। कांग्रेस जहां मध्य प्रदेश की 47 आरक्षित सीटों में से खोई जमीन पाने और छत्तीसगढ़ के सरगुजा व बस्तर बेल्ट में अपना पुराना जनाधार वापस पाने की कोशिश में है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा का दावा है कि कांग्रेस का यह अभियान केवल चुनावी पैंतरा है और आदिवासी समाज अब उनके झांसे में नहीं आने वाला। दोनों ही दलों के लिए 2028 का मुकाबला बेहद कांटे का होने वाला है, जहां आदिवासी वोटों का ध्रुवीकरण ही सरकार का भविष्य तय करेगा।

पदोन्नति रोक कर संविदा भर्ती के खिलाफ उतरीं नर्सें, 3 दिवसीय राज्यव्यापी प्रदर्शन शुरू

Health Alert: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट मंडराने लगा है क्योंकि नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने पदोन्नति वाले पदों पर संविदा भर्ती किए जाने के फैसले के विरोध में तीन दिवसीय राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। CG Top 10 News Today के अंतर्गत रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय परिसर से इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई, जहां सैकड़ों नियमित, संविदा और दैनिक वेतनभोगी नर्सों ने कार्यस्थल पर 2 घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन किया। संघ की मुख्य आपत्ति चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर के 22 और सहायक प्राध्यापक के 18 पदों पर नई संविदा व सीधी भर्ती निकालने को लेकर है, जबकि विभाग में वर्षों से कार्यरत योग्य एमएससी व पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग कर्मियों को पदोन्नति का इंतजार है। एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें नर्सिंग ऑफिसर व सीनियर नर्सिंग ऑफिसर पदनाम का तत्काल आदेश जारी करना, ग्रेड-पे में बढ़ोतरी, 7,200 रुपये नर्सिंग भत्ता तथा 1,800 रुपये वाशिंग भत्ता देना शामिल है। इसके अलावा, संविदा व कलेक्ट्रेट दर पर कार्यरत स्टाफ नर्सों के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये मासिक वेतन और वर्ष 1998-99 से अटके महज 1,500 रुपये के छात्रवृत्ति (Stipend) को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह करने की पुरजोर मांग की गई है। नर्सों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर शासन ने उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो वे पूरे प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं को बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।

हसदेव अरण्य का तारा कोल ब्लॉक अडानी समूह को मिलने पर विवाद, जयराम रमेश का केंद्र पर हमला

Environment Dispute: छत्तीसगढ़ के जैव-विविधता से परिपूर्ण और जैव-संवेदनशील हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित तारा कोल ब्लॉक के आवंटन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। में इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने नियमों को दरकिनार कर तारा कोल ब्लॉक को ‘सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड’ के जरिए अडानी समूह के सुपुर्द कर दिया है। यह कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज और मुंद्रा सिनएनर्जी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई है, जिसने 37.50 प्रतिशत की उच्चतम राजस्व हिस्सेदारी की बोली लगाकर वाणिज्यिक खनन का अधिकार हासिल किया है। कांग्रेस नेता ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव अरण्य के सभी कोयला ब्लॉक रद्द करने का अशासकीय संकल्प पारित किया था और 2023 में तत्कालीन राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर (Denotified) कर दिया था। लगभग 5,000 एकड़ में फैले इस कोल ब्लॉक के 4,000 एकड़ घने जंगल में खनन शुरू होने से करीब 10 लाख बहुमूल्य पेड़ों की कटाई का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व से सटा होने के कारण मानव-हाथी द्वंद्व को और भड़का सकता है। हसदेव बचाओ आंदोलन से जुड़े स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी पिछले 15 वर्षों से इस खनन के खिलाफ संघर्षरत हैं, जो अब और उग्र रूप ले सकता है।

NDPS केस की विवेचना में ढिलाई पर आईजी का ‘पुलिसिया दंड’, DSP पर नाराजगी और TI पर जुर्माना

Law and Order: बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) रामगोपाल गर्ग ने कार्य में लापरवाही और वरिष्ठ कार्यालय के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ा अनुशासनिक रुख अपनाया है। इस कार्रवाई के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के थाना डोंगरीपाली में दर्ज एनडीपीएस (NDPS Act) के एक मामले की केस डायरी जांच में गंभीर त्रुटियां पाई गईं। रेंज कार्यालय के परिपत्र अनुसार निर्धारित फॉर्मेट में गवाहों के बयान दर्ज न करने और स्पष्टीकरण का तय समय सीमा में जवाब न देने पर आईजी ने इसे शासकीय कर्तव्यों के प्रति घोर उपेक्षा माना है। जारी आदेश के अनुसार, थाना प्रभारी डोंगरीपाली (सउनि भगवती कुर्रे) और मामले के विवेचक (सउनि छोटेलाल सिदार) दोनों पर 500-500 रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, मामले में ढीली पर्यवेक्षण प्रणाली के कारण सारंगढ़ मुख्यालय की उप पुलिस अधीक्षक (DSP) श्रीमती संतोषी ग्रेस के प्रति लिखित में “गंभीर अप्रसन्नता” व्यक्त की गई है। आईजी ने निर्देश दिया है कि इस दंडात्मक आदेश की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक (DGP) छत्तीसगढ़ और जिला एसपी को भेजी जाए तथा इसे संबंधित अधिकारियों की सेवा पुस्तिका (Service Book) में दर्ज किया जाए। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में यह कड़ा संदेश गया है कि विवेचना में लापरवाही और विभागीय आदेशों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।

1963 से जमीन गई पर रोजगार नहीं मिला, मानिकपुर परियोजना की जनसुनवाई रोकने पर अड़े ग्रामीण

Public Dispute: कोरबा जिले में एसईसीएल (SECL) की मानिकपुर कोयला परियोजना के विस्तार के लिए 25 सितंबर को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई से पहले भूमि विस्थापित ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। भिलाई खुर्द और आसपास के गांवों के प्रभावितों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जब तक उनकी दशकों पुरानी लंबित मांगों का ठोस निराकरण नहीं होता, तब तक जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी। ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वर्ष 1963-64 में परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों के बदले कई किसानों को आज तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही परिवार के सदस्यों को नीतिगत रोजगार दिया गया है। ग्रामीणों और भूमि विस्थापित संगठन ने जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि 25 सितंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई से पूर्व प्रभावित परिवारों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर बिंदुवार समाधान की लिखित समय-सीमा तय की जाए। इसके पूर्व भी ग्रामीणों के पुरजोर विरोध और आपत्तियों के चलते जनसुनवाई की तारीख को स्थगित करना पड़ा था। मुआवजे और रोजगार के अलावा प्रभावित गांवों में सम्मानजनक पुनर्वास नीति लागू करने, पक्की सड़कें, शुद्ध पेयजल, निर्बाध बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पुरानी समस्याओं का समाधान किए बिना जबरन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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