CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें VVIP ड्यूटी में पुलिस बस हादसे पर SP-DGP ऑफिस कुर्की के आदेश, भिलाई अस्पताल में 32 लाख का गबन, हाईकोर्ट का विभागीय जांच पर बड़ा फैसला, झीरम कांड में 10 दोषी, बिलासपुर में 23 संदिग्ध बांग्लादेशी गिरफ्तार, साक्षरता सर्वे में 97 हजार निरक्षर, फायर सेफ्टी NOC में फर्जीवाड़ा, कांग्रेस प्रभारी बदले, 8वें वेतन आयोग पर विवाद और रायगढ़ भूमि अधिग्रहण मामला समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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VVIP ड्यूटी में दुर्घटना मामले में हाईकोर्ट का कड़ा रुख, SP और DGP कार्यालय की कुर्की के आदेश

Crime Update: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने पुलिस प्रशासन की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। वर्ष 2023 में VVIP बंदोबस्त के दौरान पुलिस की एक मिनी बस ने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों, बैजनाथ कंवर और रवि यादव को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस भीषण सड़क हादसे में दोनों युवकों की असमय मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दुर्घटना के समय पुलिस विभाग की जिस मिनी बस से यह हादसा हुआ, उसका वाहन बीमा तक खत्म हो चुका था। अदालत ने मृतकों के परिजनों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कुल 43.14 लाख रुपये के मुआवजे की राशि तय की थी, जिस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाना था। हालांकि, फैसला सुनाए जाने और आदेश जारी होने के पांच महीने बाद भी जब पुलिस प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवारों को क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो कोर्ट ने कड़ा कदम उठाया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने अब मुआवजा राशि की वसूली के लिए कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय और छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय की संपत्तियों को कुर्क करने का स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है।

भिलाई के हाईटेक अस्पताल में 32 लाख की धोखाधड़ी, शातिर कैशियर गिरफ्तार

Crime Update: भिलाई के चर्चित हाईटेक अस्पताल में 32 लाख रुपये के वित्तीय गबन का बड़ा मामला उजागर हुआ है। पुलिस ने मामले की त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के मुख्य कैशियर जसविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले छह वर्षों से अस्पताल में कैशियर के पद पर कार्यरत था और दैनिक नकद प्राप्तियों को बैंक खाते में जमा कराने के लिए जिम्मेदार था। आरोपी ने इसी पद का दुरुपयोग करते हुए लंबे समय तक अस्पताल के कैश को बैंक में जमा करने के बजाय खुद के पास रख लिया। इस बड़ी धोखाधड़ी को छिपाने के लिए आरोपी प्रबंधन को फर्जी ई-मेल भेजकर यह भरोसा दिलाता रहा कि रकम बैंक में जमा कर दी गई है। जब अस्पताल के वार्षिक वित्तीय ऑडिट में भारी अंतर पाया गया, तब संचालक मनोज अग्रवाल ने सुपेला थाना क्षेत्र की स्मृति नगर चौकी में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) के तहत मामला दर्ज कर उसे रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी के पास से गबन के पैसों से खरीदा गया 1.5 लाख रुपये का महंगा मोबाइल भी जब्त किया गया है।

कर्मचारी का पक्ष सुने बिना जांच अधिकारी की नियुक्ति गलत

Legal News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों के अनुशासनात्मक मामलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी शासकीय कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करते समय उसे अपना बचाव प्रस्तुत करने का पूरा और न्यायसंगत अवसर दिया जाना अनिवार्य है। बिना कर्मचारी का लिखित जवाब प्राप्त किए और उस पर विचार किए सीधे जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति करना सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है। यह मामला नवा रायपुर में पदस्थ लैब अटेंडेंट मनोज खरे से जुड़ा है, जिनके खिलाफ नियुक्ति के समय जमा किए गए अनुभव प्रमाण पत्र को लेकर विभागीय जांच शुरू की गई थी। विभाग ने कर्मचारी का जवाब लिए बिना ही जांच अधिकारी तय कर दिया था, जिसे न्यायमूर्ति बीडी गुरु की एकल पीठ ने प्रक्रियात्मक त्रुटि माना। कोर्ट ने 16 जुलाई 2026 के उस आदेश के संबंधित हिस्से को रद्द कर दिया है। अब विभाग को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 14 के तहत कर्मचारी को 15 दिनों का समय देकर नए सिरे से नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

झीरम घाटी कांड फैसले के बाद सियासत गर्म

Politics: बस्तर के बहुचर्चित और वीभत्स झीरम घाटी हमले पर अदालत का फैसला आने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। वर्ष 2013 में हुए इस नक्सली हमले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत 29 प्रमुख लोगों की जान चली गई थी। जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बावजूद कांग्रेस ने इस फैसले को अधूरा न्याय करार दिया है और जांच की दिशा पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया है कि एनआईए की जांच बेहद लचर रही और हमले की पूरी साजिश रचने वाले मुख्य मास्टरमाइंड तक जांच पहुंच ही नहीं सकी। कांग्रेस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली देवजी से इस बड़े राजनीतिक नरसंहार के सिलसिले में कोई गहन पूछताछ नहीं की गई, जबकि मामले में 28 आरोपी अब भी फरार हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने न्यायिक फैसले का स्वागत करते हुए इसे जांच एजेंसियों की सफलता बताया है। इस मामले में दोषियों की सजा का ऐलान 16 सितंबर को किया जाना तय हुआ है।

बिलासपुर में अवैध घुसपैठ पर बड़ा क्रैकडाउन

National Security: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र से पुलिस ने एक बड़े तलाशी अभियान के दौरान 23 संदिग्ध नागरिकों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच में इनके पास पाए गए निवास और पहचान संबंधी दस्तावेज पूरी तरह से संदिग्ध और फर्जी प्रतीत हुए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया, जिसने दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के लिए पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और जंगीपुर में जाकर पड़ताल की। जांच में पते फर्जी पाए जाने के बाद सभी 23 संदिग्धों को कड़ी सुरक्षा के बीच सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक रायपुर स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि नागरिकता की पुष्टि होने तक सीमा सुरक्षा बल (BSF) के समन्वय से इन्हें यहां रखा जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार वापस भेजा जाएगा। प्रदेश के अन्य संवेदनशील जिलों जैसे कांकेर, कोंडागांव, दुर्ग और राजनांदगांव में भी संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए विशेष निगरानी और सर्च ऑपरेशन लगातार चलाए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में 97 हजार से अधिक लोग मिले निरक्षर

Education News: उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में कराए गए व्यापक साक्षरता सर्वे के आंकड़े सामने आ गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 20 मई से 27 अगस्त तक चलाए गए इस सर्वे में प्रदेशभर में 97 हजार से अधिक लोग ऐसे पाए गए हैं जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। चौंकाने वाली बात यह है कि शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बिलासपुर जिले में सबसे ज्यादा 11,328 निरक्षर पाए गए हैं, जिनमें से 10,908 लोग ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी हैं। राज्य सरकार ने इस निरक्षरता को दूर करने के लिए एक अभिनव योजना तैयार की है, जिसके तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के स्कूली छात्रों को अभियान से जोड़ा जाएगा। जो छात्र 10 निरक्षर व्यक्तियों को पढ़ाकर साक्षरता परीक्षा पास कराएंगे, उन्हें मुख्य बोर्ड या स्थानीय परीक्षाओं में 10 बोनस अंक दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, नवसाक्षरों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए स्मार्टफोन चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। अभियान के अंतर्गत 15 सितंबर तक उल्लास मोबाइल ऐप पर सभी शिक्षार्थियों और स्वयंसेवी शिक्षकों का अनिवार्य पंजीकरण किया जा रहा है।

बिना भौतिक जांच निजी एजेंसियां बांट रही हैं प्रमाण पत्र

Corruption Alert: छत्तीसगढ़ में बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों और व्यावसायिक परिसरों की अग्नि सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को सौंपे जाने के बाद से भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। पूर्व में यह काम जिला सेनानी की सरकारी टीम द्वारा निशुल्क और कड़े मानकों के आधार पर किया जाता था। हालांकि, अब चार निजी कंपनियों को अधिकृत किए जाने के बाद से फीस का कोई निश्चित पैमाना तय न होने के कारण मनमानी वसूली की शिकायतें बढ़ गई हैं। एजेंसियां 10 से 20 रुपये प्रति वर्ग फीट तक का मनमाना शुल्क वसूल रही हैं। जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मोटी रकम के एवज में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए एनओसी जारी की जा रही है। अंबिकापुर और भिलाई के कुछ निजी अस्पतालों और होटलों में अंडरग्राउंड वाटर टैंक, स्मोक डिटेक्टर और इमरजेंसी एग्जिट जैसे अनिवार्य संसाधन न होने के बावजूद लाखों रुपये लेकर ओके रिपोर्ट जारी कर दी गई। भवन और अस्पताल संचालकों ने इस व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए शासन से निजी एजेंसियों की मनमानी पर लगाम लगाने और पारदर्शी सरकारी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।

सचिन पायलट की जगह सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ के नए प्रभारी

Politics: आगामी चुनावों और संगठनात्मक पुनर्गठन को ध्यान में रखते हुए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने कई राज्यों के प्रभारियों के दायित्वों में बड़ा बदलाव किया है। इस फेरबदल के तहत सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ के प्रभारी पद से हटाकर पंजाब राज्य की कमान सौंपी गई है। उनकी जगह वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी नई राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें असम कांग्रेस का प्रभारी महासचिव बनाया गया है। राज्य में पिछला विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की बड़ी चुनौती नए प्रभारी सुखदेव भगत के सामने होगी। पार्टी आलाकमान का मानना है कि भगत का सांगठनिक अनुभव प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक विपक्ष की भूमिका तैयार करने में मददगार साबित होगा।

8वें वेतन आयोग की कट-ऑफ डेट पर छिड़ा विवाद, 24 घंटे का अंतर करा सकता है भारी नुकसान

Employee News: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग की प्रस्तावित कट-ऑफ तारीख को लेकर भारी असंतोष और हलचल देखने को मिल रही है। यदि सरकार 1 जनवरी 2026 को नए वेतनमान की कट-ऑफ डेट तय करती है, तो 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले लगभग 1.5 लाख कर्मचारी नए वेतनमान और फिटमेंट फैक्टर के लाभ से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे। महज 24 घंटे के इस मामूली अंतर के कारण इन कर्मचारियों को अगले 10 वर्षों तक पुरानी बेसिक पे पर आधारित कम पेंशन से ही गुजारा करना पड़ेगा। इस विसंगति और संभावित आर्थिक नुकसान के विरोध में देशभर के कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। हैदराबाद में 6 सितंबर को एक विशाल धरने का आयोजन किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के हजारों केंद्रीय कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कर्मचारी संघों की मांग है कि कट-ऑफ तारीख पर पुनर्विचार किया जाए और इसे वेतन आयोग की सिफारिशों के दायरे में लाया जाए। फिलहाल 8वां वेतन आयोग विभिन्न राज्यों का दौरा कर हितधारकों से चर्चा कर रहा है और आयोग की अंतिम रिपोर्ट जून 2027 तक आने की संभावना है।

रायगढ़ में बिना अधिग्रहण निजी जमीन पर बनाई सड़क

Legal Update: रायगढ़ जिले के अमलीभौना गांव में बिना कानूनी अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए और बिना कोई मुआवजा दिए निजी भूमि पर सड़क निर्माण करने का मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता अरुण कुमार गुप्ता की 0.068 हेक्टेयर निजी भूमि का उपयोग प्रशासन द्वारा परिवहन नगर से मिठ्ठूमुड़ा को जोड़ने वाली सार्वजनिक सड़क के निर्माण में कर लिया गया था। जब राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन किया गया, तब यह स्पष्ट हुआ कि जमीन पहले से ही निर्मित सड़क के हिस्से में दर्ज हो चुकी है। पीड़ित भूमि स्वामी ने प्रशासन के समक्ष बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा देने अथवा समान मूल्य की वैकल्पिक सरकारी भूमि आवंटित करने का आवेदन दिया था। महीनों तक आवेदन लंबित रहने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने राज्य शासन के बयान को दर्ज करते हुए रायगढ़ जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता के आवेदन पर कानून के अनुसार 45 दिनों के भीतर स्पष्ट और कारण सहित आदेश जारी करे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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