
Gangrel Dam Water Dispute: छत्तीसगढ़ में किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। धमतरी स्थित प्रदेश के सबसे बड़े गंगरेल बांध के पूरी तरह भर जाने के बावजूद नहरों में पानी न छोड़े जाने पर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ किसान नेता धनेंद्र साहू ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र भेजकर मांग की है कि किसानों की फसलों को बचाने के लिए गंगरेल बांध से तुरंत नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए।
अतिरिक्त पानी नदी में बहाने पर उठाए गंभीर सवाल
Dhamtari News: पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ बांध का जलस्तर घटने और सुरक्षा के नाम पर अतिरिक्त पानी को महानदी में बहाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आसपास के किसान खेतों की सिंचाई के लिए बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल अगस्त की शुरुआत में ही खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए नहरें खोल दी जाती थीं, लेकिन इस बार सितंबर का पहला पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी जल संसाधन विभाग खामोश बैठा है।
भर्री और मुरम क्षेत्र की फसलों पर मंडराया संकट
Gangrel Dam Update: धनेंद्र साहू के अनुसार इस समय क्षेत्र की मुरम, भांठा और भर्री जमीनों पर बोई गई फसलों को तत्काल पानी की आवश्यकता है। समय पर सिंचाई न होने की स्थिति में धूप और उमस के कारण फसलों के सूखने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। किसानों ने अपनी सीमित जमापूंजी और मेहनत फसल तैयार करने में लगा दी है। ऐसे ऐन मौके पर अगर पानी नहीं मिला तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कई बार हुई चर्चा
पूर्व मंत्री ने जानकारी दी कि उन्होंने पिछले चार-पांच दिनों के भीतर धमतरी जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता से कई बार दूरभाष पर चर्चा की है। उन्होंने अफसरों को मैदानी स्थिति से अवगत कराते हुए तत्काल मुख्य और उप नहरों में जलापूर्ति शुरू करने का आग्रह किया था। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस और त्वरित कदम नहीं उठाया गया, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
बांध में जमा पानी का वास्तविक उपयोग किसानों के लिए हो
साहू ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि किसी भी जलाशय का लबालब भरना तभी सार्थक माना जाएगा जब उसका सीधा लाभ खेतों में खड़ी फसलों को मिले। पानी को केवल बांध में जमा रखना या बिना उपयोग के नदी में प्रवाहित कर देना जनहित के विपरीत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि जल संसाधन विभाग को सख्त निर्देश जारी कर फसलों की जरूरत के हिसाब से नियमित अंतराल पर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।
जल संसाधन विभाग की सुस्ती पर जताई नाराजगी
किसान नेता ने विभाग की सुस्त रवैये पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह मौसम और फसल की स्थिति का सही आकलन करे। जब बांध में पर्याप्त जलभराव उपलब्ध है तो नहर संचालन में देरी का कोई औचित्य नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक हठधर्मिता के कारण किसानों की तैयार हो रही खरीफ फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है।
समय पर पानी न मिलने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
धनेंद्र साहू ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को तुरंत यह तय करना होगा कि गंगरेल का पानी नदी में बहेगा या किसानों के खेतों तक पहुंचेगा। यदि विभाग ने समय रहते नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय नहीं लिया, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।



