
Gariaband Bridge Collapse: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के दावों की पोल खोल कर रख दी है। छुरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले मड़ेली-जरगांव मार्ग पर घुनघुटी नाला में एक बड़ा पुल बनाया जा रहा है। इस पुल के एप्रोच रोड का एक बड़ा हिस्सा पहली ही बरसात के पानी में बह गया है। सड़क धंसने और मिट्टी का भराव बह जाने की वजह से अब पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस घटना के बाद से ही आसपास के ग्रामीणों में प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है।
पहली बारिश में बहा करोड़ों का काम
घुनघुटी नाला पर बन रहा यह उच्चस्तरीय पुल अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुआ था कि मौसम की पहली मार ने इसे भारी नुकसान पहुंचा दिया। तेज बारिश की वजह से पुल को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले एप्रोच रोड की मिट्टी बह गई, जिससे सड़क कई जगहों से कट गई है। इस कटान के कारण रास्ते पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे यहां से गुजरना बेहद खतरनाक हो गया है। करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे इस काम की ऐसी हालत देखकर स्थानीय लोग इसे सीधे तौर पर लापरवाही का नतीजा मान रहे हैं।
भाजपा नेता ने लगाया मिलीभगत का आरोप
मामले की जानकारी मिलते ही भाजपा के जिला उपाध्यक्ष प्रीतम सिन्हा ने प्रभावित इलाके का दौरा किया। उन्होंने मौके की स्थिति देखने के बाद लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए। सिन्हा का कहना है कि यह परियोजना पिछले पांच सालों से मंजूर है। विभाग की ओर से ठेकेदार को लगातार ढील दी जा रही थी, जिसकी वजह से काम में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने एस्टीमेट (एसओआर) पर काम होने के कारण लागत बचाने के लिए मुख्य ढांचे के साथ समझौता किया गया है।
विभाग ने रोका भुगतान और लगाया जुर्माना
निर्माण की निगरानी कर रहे पीडब्ल्यूडी सेतु शाखा के एसडीओ एसके पंडोले ने विभाग का पक्ष रखते हुए बताया कि इस मामले में ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले सड़क के किनारों पर की जाने वाली सुरक्षात्मक दीवार (पिचिंग कार्य) का काम पूरा नहीं हो पाया था। इसी बीच अचानक हुई मूसलाधार बारिश के कारण मिट्टी बह गई। अधिकारी के मुताबिक काम में देरी करने की वजह से ठेकेदार पर छह प्रतिशत की पेनाल्टी लगाई गई है और उसका मौजूदा भुगतान भी रोक दिया गया है।
रायपुर की कंपनी कर रही है निर्माण
इस परियोजना की कुल प्रशासनिक स्वीकृति 3 करोड़ 91 लाख 75 हजार रुपये की है। पुल और सड़क बनाने का मुख्य ठेका 2 करोड़ 88 लाख 64 हजार 800 रुपये में रायपुर की मेसर्स शिवानी कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही आई इस आपदा ने तकनीकी खामियों को उजागर कर दिया है। एप्रोच रोड के कटने से मड़ेली और जरगांव के बीच का सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है, जिससे रोजमर्रा के कामों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने की थर्ड पार्टी जांच की मांग
सड़क के बह जाने से नाराज स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी बातें रखी हैं। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि सबसे पहले इस कटे हुए रास्ते की तुरंत मरम्मत कराई जाए ताकि लोगों का आवागमन सामान्य हो सके। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी (थर्ड पार्टी) से इस पूरे पुल निर्माण की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि जो सड़क पहली ही बारिश नहीं झेल पाई, वह आने वाले समय में भारी वाहनों का दबाव कैसे बर्दाश्त करेगी।
योजना को लेकर शुरू में रहा भ्रम
शुरुआती दौर में इस पुल के निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। कई लोग इसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत स्वीकृत कार्य मान रहे थे। हालांकि, मौके पर लगे सूचना बोर्ड को देखने के बाद स्थिति साफ हुई कि यह असल में पीडब्ल्यूडी की ब्रिज विंग का एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मनीष साहू ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह काम सेतु शाखा के अंतर्गत ही कराया जा रहा है, लेकिन विभाग की ओर से अभी विस्तृत रिपोर्ट आना बाकी है।
पुरानी जानकारी वाले बोर्ड ने बढ़ाई उलझन
प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग को लेकर एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। कार्यस्थल पर जो सूचना पटल लगाया गया है, उस पर लिखे गए कई अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर पुराने हैं। इनमें से कुछ अधिकारी नौकरी से रिटायर हो चुके हैं तो कुछ का दूसरे जिलों में तबादला हो चुका है। इस वजह से जब ग्रामीण या मीडिया कर्मी शिकायत के लिए उन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो कोई सही जवाब नहीं मिलता। पुराने विवरणों के कारण परियोजना की वास्तविक देखरेख पर सवाल उठ रहे हैं।
लापरवाही से बेकार हो सकता है पूरा पुल
इंजीनियरों और जानकारों का मानना है कि मानसून की शुरुआत में ही अगर एप्रोच रोड को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ सकता है। यदि लगातार बारिश होती रही तो पुल के आसपास बची हुई मिट्टी भी पूरी तरह कट जाएगी। ऐसी स्थिति में करोड़ों रुपये की लागत से खड़ा किया गया यह मुख्य पुल किसी काम का नहीं रह जाएगा क्योंकि इस तक पहुंचने का रास्ता ही खत्म हो जाएगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में आगे क्या सख्त कदम उठाता है।



