फर्जी D.Ed मार्कशीट से 2011 में पाई शिक्षक की नौकरी, 13 साल बाद ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज

Balodabazar Teacher Suspended: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए शासकीय सेवा प्राप्त करने वाले एक सहायक शिक्षक पर गाज गिरी है। कसडोल विकासखंड के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला कंजिया में पदस्थ सहायक शिक्षक (एलबी) रामेश्वर प्रसाद साहू को फर्जी D.Ed अंकसूची के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश पर जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद की गई है। आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

कलेक्टर जनदर्शन में मिली शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कलेक्टर जनदर्शन में मिली एक शिकायत के बाद हुआ। कसडोल क्षेत्र के पिसीद निवासी हेमदास मानिकपुरी ने जनदर्शन में उपस्थित होकर शिक्षक के खिलाफ लिखित आवेदन दिया था। शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि रामेश्वर प्रसाद साहू ने वर्ष 2011 में नियुक्ति के दौरान सत्र 2008 की फर्जी D.Ed अंकसूची जमा की थी, जिसका रोल नंबर 47240442 दर्ज था। आवेदन को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे।

11 साल बाद दोबारा परीक्षा देने से गहराया शक

जांच अधिकारियों को पड़ताल के दौरान एक अनोखा तथ्य पता चला। शिकायतकर्ता के दावों की पुष्टि तब हुई जब यह बात सामने आई कि नौकरी लगने के करीब 11 साल बाद शिक्षक ने पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर से दोबारा D.Ed की पढ़ाई पूरी की। जब शिक्षक के पास वर्ष 2011 में पहले से ही D.Ed की डिग्री मौजूद थी, तो 11 साल बाद फिर से वही पाठ्यक्रम करने के फैसले ने प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान खींचा और पुराने दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल शुरू हुई।

सील पर दर्ज जिले के नाम ने उजागर की फर्जीवाड़े की पूरी कहानी

जनपद पंचायत कसडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी की संयुक्त जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा सबूत सामने आया। शिक्षक ने 4 जनवरी 2011 को पदभार ग्रहण करते समय जो प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, उसकी मुहर पर ‘जिला बलौदाबाजार’ अंकित था। जबकि ऐतिहासिक रूप से बलौदाबाजार जिले का गठन ही वर्ष 2012 में हुआ था। इसके अलावा एक अन्य संलग्न प्रतिवेदन की मुहर पर ‘जिला रायपुर’ लिखा हुआ पाया गया। जिला बनने से पहले ही प्रमाण पत्र पर उस जिले का नाम दर्ज होना फर्जीवाड़े को साबित करने के लिए पर्याप्त रहा।

सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबन और विभागीय कार्रवाई तय

जांच रिपोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर शिक्षक के इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन का आदेश जारी किया गया। निलंबन अवधि के दौरान संबंधित शिक्षक का मुख्यालय नियमानुसार तय किया जाएगा। प्रशासन अब इस मामले में कड़ी विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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