
CG Assistant Teachers Reinstated Supreme Court Order: छत्तीसगढ़ में करीब 11 वर्षों तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अंततः 43 सहायक शिक्षकों को न्याय मिल गया है। नगर पालिक निगम रायपुर ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेशों का पालन करते हुए सभी प्रभावित शिक्षकों की सेवा बहाल कर दी है। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थापना के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद पीड़ित शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
वर्ष 2013 की भर्ती और 45 दिन में नौकरी गंवाने का पूरा मामला
यह पूरा विवाद वर्ष 2013 में शुरू हुई सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। चयन प्रक्रिया की तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 43 अभ्यर्थियों ने 15 अक्टूबर 2014 को अपने-अपने पदों पर कार्यभार ग्रहण किया था। हालांकि, इसके मात्र 45 दिन बाद यानी 29 नवंबर 2014 को बिना कोई ठोस प्रक्रिया अपनाए उनकी नियुक्तियां अचानक निरस्त कर दी गईं। प्रशासन के इस एकतरफा फैसले के खिलाफ शिक्षकों ने अदालत की शरण ली।
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने निरस्तीकरण आदेश को माना गैर-कानूनी
शिक्षकों ने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। गवेंद्र साहू, घनश्याम साहू, पुरुषोत्तम यादव और कृष्ण कुमार सिंगरोल समेत अन्य अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता रूपेश साहू ने पैरवी की। 16 अप्रैल 2019 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने इस कार्रवाई को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद-14 का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया।
सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता के लाभ देने के निर्देश
एकलपीठ ने अपने फैसले में याचिकाकर्ताओं को सेवा की निरंतरता, वरिष्ठता और नोशनल लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने ‘नो वर्क, नो पे’ के कानूनी सिद्धांत का पालन करते हुए इस दौरान का बकाया वेतन देने से इंकार कर दिया। अदालत के इस निर्णय से शिक्षकों की बहाली का रास्ता साफ हो गया था, लेकिन राज्य सरकार ने इस फैसले को आगे चुनौती देने का निर्णय लिया।
डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रहा फैसला
एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की। 2 मार्च 2022 को डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकलपीठ के निर्णय की पुष्टि की। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। 15 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका निरस्त कर हाईकोर्ट के निर्णय को यथावत रखा, जिससे याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आया फैसला अंतिम और बाध्यकारी हो गया।
अवमानना याचिका दायर होने पर हरकत में आया प्रशासन
सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय आने के बाद भी जब लंबे समय तक प्रशासनिक स्तर पर आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष अवमानना याचिका प्रस्तुत की। अवमानना की कार्यवाही शुरू होते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई। इसके बाद नगर पालिक निगम रायपुर ने 4 अगस्त 2026 को औपचारिक आदेश जारी कर सभी 43 शिक्षकों की सेवाएं बहाल कर दीं।
रायपुर के विभिन्न शासकीय स्कूलों में दी गई पदस्थापना
रायपुर नगर निगम द्वारा जारी आदेश के तहत सभी 43 सहायक शिक्षकों को शहर के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थापित कर दिया गया है। कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उन्हें सेवा की निरंतरता, वरिष्ठता और अन्य सभी परिणामी सेवा लाभ प्रदान किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद 6 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का अंतिम रूप से निस्तारण कर दिया।
11 साल लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार खत्म हुआ इंतजार
इस फैसले से उन 43 परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो पिछले एक दशक से अधिक समय से अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे थे। बिना कारण नौकरी से निकाले जाने के बावजूद इन शिक्षकों ने हिम्मत नहीं हारी और न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखा। अब स्कूलों में पदस्थापना मिलने से वे एक बार फिर अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।



