
Ghar Ghar Chalo Abhiyan BJP: छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के सफल कार्यकाल के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार से पूरे प्रदेश में ‘घर-घर चलो अभियान’ का शंखनाद कर दिया है। इस बार संगठन ने साफ कर दिया है कि नेताओं को केवल मंचों से भाषण देकर औपचारिकता पूरी करने की इजाजत नहीं होगी, बल्कि उन्हें सीधे जनता के चौखट तक पहुंचना होगा। इस पूरे अभियान की कमान खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने हाथों में ले ली है, जिससे पार्टी के छोटे-बड़े सभी कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री साय और प्रदेश अध्यक्ष ने ली वर्चुअल बैठक, वीआईपी कल्चर छोड़ जमीन पर उतरने के सख्त निर्देश
अभियान की रूपरेखा तय करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और संगठन महामंत्री पवन साय ने सोमवार को राज्य के सभी पार्टी विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण डिजिटल बैठक ली। इस बैठक में साफ शब्दों में हिदायत दी गई है कि सभी जनप्रतिनिधि अपने वीआईपी दर्जे को किनारे रखकर सीधे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मतदाताओं से संपर्क साधें। संगठन ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर बहानेबाजी या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पद और कद के हिसाब से बंटा काम, जानिए किस नेता को कितने घरों में देनी होगी दस्तक
पार्टी आलाकमान ने संगठन के प्रत्येक स्तर के पदाधिकारी के लिए बकायदा एक लिखित टारगेट सेट कर दिया है। इसके तहत मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को अनिवार्य रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में कम से कम 50-50 नए लोगों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करनी होगी। राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के पदाधिकारियों के साथ ही जिला अध्यक्षों को 25-25 घरों में जाना होगा। इसी तरह जिला स्तर के अन्य पदाधिकारियों को 15-15 और स्थानीय मंडल अध्यक्षों को न्यूनतम 10-10 नए परिवारों के ड्राइंग रूम तक पहुंचकर संपर्क साधना होगा।
10 जून को प्रदेश के सभी बड़े मंदिरों में होगी महापूजा, धार्मिक माहौल के साथ जनता को जोड़ने की रणनीति
इस जनसंपर्क अभियान के तहत आगामी 10 जून को पूरे छत्तीसगढ़ में एक विशेष धार्मिक और सामाजिक माहौल बनाने की तैयारी की गई है। राज्य की सभी विधानसभा सीटों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख और ऐतिहासिक मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती का आयोजन रखा गया है। इन आयोजनों में भाजपा के तमाम दिग्गज चेहरों के साथ-साथ स्थानीय आम नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि धार्मिक मंचों के जरिए लोगों से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत किया जा सके।
आम जनता के घर अचानक पहुंचेंगे मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम, सीधे पूछेंगे सरकारी योजनाओं का हाल
इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित पूरी कैबिनेट इस काम में जुट रही है। मुख्यमंत्री अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र के अलावा प्रदेश के किसी भी जिले में औचक रूप से किसी भी आम नागरिक के घर का दरवाजा खटखटा सकते हैं। बड़े नेता लोगों के घरों में बैठकर सीधे संवाद करेंगे और पूछेंगे कि उन्हें मुफ्त राशन, उज्ज्वला गैस, पेयजल आपूर्ति और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ बिना किसी परेशानी के मिल रहा है या नहीं।
जमीनी स्तर पर शिकायतों का तुरंत होगा निपटारा, फीडबैक के आधार पर सुधरेगी प्रशासनिक व्यवस्था
नेताओं के इस दौरों का मकसद केवल राजनीतिक नहीं है। घर-घर पहुंचने के दौरान यदि कोई नागरिक किसी सरकारी योजना का लाभ न मिलने या स्थानीय प्रशासन द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत करता है, तो उसे तुरंत नोट किया जाएगा। मुख्यमंत्री सचिवालय और संगठन स्तर पर इन शिकायतों की एक सूची तैयार होगी, जिसके आधार पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को कमियां दूर करने के निर्देश दिए जाएंगे। इस व्यवस्था से जमीनी स्तर की वास्तविक प्रशासनिक रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी।
साल 2028 के विधानसभा चुनाव की अभी से बिछने लगी बिसात, जमीन मजबूत करने की कवायद में जुटी भाजपा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरी भारी-भरकम कसरत के पीछे का मुख्य लक्ष्य साल 2028 में होने वाला छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव है। भाजपा नेतृत्व अभी से ही राज्य में अपनी पकड़ को इतना मजबूत और अभेद्य बना लेना चाहता है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को वापसी के लिए कोई राजनीतिक जमीन न मिल सके। इसी सुदूर सोच के तहत पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में ला दिया है।
हाथ में झोला लेकर क्षेत्रों में निकले नेताजी, गांवों और कस्बों में दिखने लगा चुनावी जैसा नजारा
सोमवार सुबह से ही छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर सरगुजा संभाग तक के अलग-अलग जिलों में इस अभियान की शुरुआती तस्वीरें सामने आने लगी हैं। कई क्षेत्रों में पार्टी के विधायक और सांसद हाथ में सरकारी योजनाओं के पत्रक और झोला लेकर पैदल ही गलियों में घूमते नजर आ रहे हैं। इस सघन जनसंपर्क के कारण प्रदेश के गांवों और छोटे कस्बों में असमय ही चुनाव जैसा माहौल दिखाई देने लगा है, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।



