CG Jal Jeevan Mission 2.0: गांवों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए लगेंगे वाटर मीटर, अब सरकार नहीं बल्कि पंचायतें संभालेंगी पानी की सप्लाई

CG Jal Jeevan Mission 2.0: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। मंत्रालय में मुख्य सचिव विकासशील की अगुवाई में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के क्रियान्वयन को लेकर अहम नीतिगत फैसला लिया गया। इस नए निर्णय के तहत प्रदेश के गांवों में संचालित सभी नल-जल योजनाओं के संचालन, देखरेख और मरम्मत की पूरी जिम्मेदारी अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के बजाय सीधे तौर पर ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को सौंप दी गई है।

ग्राम सभाओं में सोशल ऑडिट से तय होगी काम की पारदर्शिता

अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें आती हैं कि कागजों पर या जमीन पर पाइपलाइन तो बिछ गई है, लेकिन घरों के नलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस तरह की तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए सरकार ने अब सोशल ऑडिट यानी सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था को अनिवार्य बना दिया है। नए नियमों के मुताबिक अब हर गांव की ग्राम सभा के सामने जल जीवन मिशन के तहत हुए सभी कार्यों और खर्चों का पूरा लेखा-जोखा अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा, जिससे ग्रामीण खुद अपने क्षेत्र में पेयजल की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर सकेंगे।

पानी की बर्बादी रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए लगेंगे वाटर मीटर

बैठक के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के अपव्यय को रोकने और योजना के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार भविष्य की कार्ययोजना के तहत ग्रामीण घरों में भी ‘वाटर मीटर’ लगाने की तैयारी कर रही है। इस तकनीकी कदम से जहां एक तरफ लोग जरूरत के मुताबिक ही पानी का इस्तेमाल करेंगे और बर्बादी पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी तरफ जल शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व की वसूली भी व्यवस्थित हो सकेगी जिससे पंचायतों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी।

स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने से त्वरित रूप से सुधरेंगी कमियां

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने बैठक में स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचे का निर्माण करना नहीं है, बल्कि इन ढांचों को लंबे समय तक कार्यशील बनाए रखना है। जब इस व्यवस्था की कमान सीधे स्थानीय स्तर पर पंचायतों के हाथ में होगी, तो किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या मोटर खराब होने की स्थिति में जिला मुख्यालय से बजट या इंजीनियर का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर ही तुरंत रिपेयरिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा।

पेयजल की गुणवत्ता और सुचारू आपूर्ति के लिए वरिष्ठ अधिकारी मुस्तैद

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित पीएचई विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों का मानना है कि इस त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को शामिल करने से न केवल पानी के वितरण में आने वाली बाधाएं दूर होंगी, बल्कि नलों से मिलने वाले पानी की शुद्धता और गुणवत्ता की नियमित जांच भी आसान हो जाएगी।

नई व्यवस्था के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर टिकी ग्रामीण विकास की नजर

छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही पेयजल की किल्लत पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। शासन द्वारा वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार हस्तांतरित किए जाने के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ग्राम पंचायतें इस बड़ी जिम्मेदारी को कितनी तत्परता से संभालती हैं और जमीनी स्तर पर इसका कितना सकारात्मक असर देखने को मिलता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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