
B.Ed College New Rule: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। ध्यानाकर्षण और शून्यकाल के दौरान बीएड (B.Ed) और डीएलएड (D.El.Ed) जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ विधायक लता उसेंडी ने बस्तर के शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर खाली पड़े शैक्षणिक पदों और शिक्षक भर्ती में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया, जिसके बाद उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा को सदन में विस्तृत सफाई देनी पड़ी।
वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग संभाल रहा है कमान, कॉलेजों में जल्द शुरू होगी नई व्यवस्था
सदन में उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य के भीतर बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों के संचालन की पूरी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग के पास है। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सामान्य कॉलेजों में अभी इन पारंपरिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई शुरू नहीं कराई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय में दो साल के पुराने ढर्रे वाले बीएड कोर्स की जगह चार साल का एक एकीकृत शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रम (ITEP) शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के सभी विश्वविद्यालयों में लागू हो चुकी है एनईपी, दो साल का कोर्स चरणबद्ध तरीके से होगा बंद
विधायक लता उसेंडी ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि प्रदेश के कितने शिक्षण संस्थानों में अब तक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह से लागू किया जा चुका है। इस पर विभागीय मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों सहित उच्च शिक्षण महाविद्यालयों में एनईपी-2020 को पूरी तरह से प्रभावी कर दिया गया है। उन्होंने आगे बताया कि आने वाले वर्षों में वर्तमान में चल रहे दो वर्षीय बीएड कोर्स को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और इसकी जगह केवल चार वर्षीय नया मॉडल ही मान्य होगा।
अजय चंद्राकर के पूरक प्रश्न पर खुली पोल, छत्तीसगढ़ में एक भी कॉलेज नए मानकों के लायक नहीं
मंत्री के इस तकनीकी जवाब के बाद भाजपा के ही वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने एक बेहद तीखा पूरक प्रश्न दाग दिया। उन्होंने पूछा कि जब सरकार दो साल का कोर्स बंद करने की बात कह रही है, तो छत्तीसगढ़ में वर्तमान में ऐसे कितने महाविद्यालय हैं जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कड़े मापदंडों के अनुसार चार साल का बीएड कोर्स शुरू करने की योग्यता रखते हैं। इस सीधे सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने सदन में यह बात स्वीकार की कि फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य का एक भी शासकीय या निजी कॉलेज इस नए एकीकृत पाठ्यक्रम को संचालित करने के निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है।
बी प्लस प्लस ग्रेडिंग वाले संस्थानों की होगी जरूरत, कमियों को दूर करने के लिए बनी टास्क फोर्स
विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार की दूरदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुरानी व्यवस्था बंद हो जाएगी और हमारे पास नए मानक वाले कॉलेज ही नहीं होंगे, तो छात्र पढ़ाई करने कहां जाएंगे। इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने तकनीकी पक्ष समझाते हुए कहा कि चार वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा न्यूनतम ‘बी प्लस प्लस’ (B++) श्रेणी की मान्यता होना अनिवार्य है। चूंकि प्रदेश में अभी इस स्तर के संस्थानों की भारी कमी है, इसलिए मौजूदा कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने और नए नियम तय करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है।

कोंडागांव सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर बनेगी कार्ययोजना
चर्चा के दौरान कोंडागांव क्षेत्र में बीएड कॉलेज खोलने की मांग और वहां के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही उच्च शिक्षा की सुविधाएं मुहैया कराने का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठा। विधायक अजय चंद्राकर ने जानना चाह कि कोंडागांव में नया चार वर्षीय संस्थान स्थापित करने को लेकर सरकार के पास क्या रोडमैप है। उच्च शिक्षा मंत्री ने इस पर दोबारा भरोसा दिलाते हुए कहा कि नवगठित टास्क फोर्स पूरे राज्य के सभी जिलों का दौरा कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट की सिफारिशों और प्राथमिकताओं के आधार पर ही कोंडागांव सहित अन्य दूरस्थ अंचलों में नए मानकों के अनुरूप कॉलेजों के विकास की अंतिम कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

बस्तर यूनिवर्सिटी में स्टाफ की भारी कमी, 265 शैक्षणिक पदों में से केवल 29 कुर्सियों पर ही तैनात हैं प्रोफेसर
शिक्षक पात्रता के अलावा लता उसेंडी ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर यूनिवर्सिटी) में प्रशासनिक और शैक्षणिक अमले की भारी कमी का एक बड़ा आंकड़ा सदन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 265 स्वीकृत शैक्षणिक पदों में से केवल 29 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 236 पद खाली हैं। इसी तरह गैर-शैक्षणिक श्रेणी के 320 पदों में से 291 कुर्सियां खाली पड़ी हैं। इतने बड़े पैमाने पर खाली पदों के कारण बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में उच्च शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है और छात्र परेशान हो रहे हैं।
पांच विभाग अभी तक शुरू ही नहीं हुए, शेष खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी
इस गंभीर प्रशासनिक कमी पर सफाई देते हुए मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि बस्तर विश्वविद्यालय के अंतर्गत कुल 31 स्वीकृत विभागों में से 5 विभाग ऐसे हैं जो फाइलों से निकलकर जमीन पर अभी तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं। विभाग शुरू न होने के कारण उनके हिस्से के लगभग 90 पदों को फिलहाल तकनीकी रूप से शून्य माना जा सकता है। मंत्री ने आगे बताया कि बाकी बचे हुए 146 खाली पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी कर भर्ती की प्रक्रिया काफी तेजी से शुरू कर दी गई है और जल्द ही योग्य प्रोफेसरों की नियुक्तियां कर दी जाएंगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि पूर्व में हुई नियुक्तियों को लेकर मिली तमाम शिकायतों की जांच पूरी कर ली गई है और 13 फरवरी 2026 को सभी आरोपों को निराधार पाते हुए मामले को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।



