
CG Vidhan Sabha Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सदन के भीतर एक अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला। शून्यकाल के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस ने अयोध्या में नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और उसके लिए देश भर से इकट्ठा किए गए चंदे में भारी वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच जमकर नारेबाजी और तीखी बहस हुई जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने पेश किया काम रोको प्रस्ताव
विधानसभा की कार्यवाही जैसे ही शून्यकाल तक पहुंची, वैसे ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस पूरे मामले को लेकर एक स्थगन सूचना (काम रोको प्रस्ताव) पटल पर रख दी। डॉ. महंत ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के लिए देश सहित छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से करोड़ों रुपये का चंदा जुटाया गया था, लेकिन उस राशि के उपयोग में भारी अपारदर्शिता और अनियमितता की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने इस गंभीर विषय पर सदन की सामान्य कार्यवाही रोककर तुरंत विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने नियमों का हवाला देकर कांग्रेस की मांग का किया कड़ा विरोध
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की इस मांग पर सत्ता पक्ष की ओर से कुरुद के वरिष्ठ बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने विधानसभा की नियम-प्रक्रिया की किताबों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव पर कड़ी कानूनी आपत्ति दर्ज कराई। चंद्राकर ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक केंद्रीय ट्रस्ट के माध्यम से हो रहा है और यह पूरी तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के क्षेत्राधिकार से बाहर का विषय है। इसलिए राज्य की विधानसभा में इस पर किसी भी तरह की चर्चा कराना नियमों के खिलाफ होगा।
तीन करोड़ रामभक्तों की आस्था का हवाला देकर विपक्ष ने की निंदा प्रस्ताव लाने की मांग
अजय चंद्राकर के कड़े विरोध के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने 23 फरवरी 2024 को विधानसभा में पारित हुए एक पुराने कृतज्ञता ज्ञापन का संदर्भ दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जब बीजेपी सदस्य के रूप में बृजमोहन अग्रवाल यह प्रस्ताव लाए थे, तब पूरा सदन राम मंदिर के प्रति अपनी गहरी आस्था से जुड़ा हुआ था। महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ नागरिकों ने मंदिर के लिए ईंटें और अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा दान में दिया है। अगर उनके पैसे की लूट हो रही है, तो सरकार को खुद सदन में इसके खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव लेकर आना चाहिए, जिसका विपक्ष भी पूरा समर्थन करेगा।
किसने लूटा नाम बताइए, सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के पुराने इतिहास पर दागे तीखे सवाल
बहस के दौरान जब अजय चंद्राकर ने चुनौती देते हुए पूछा कि आखिर किसने पैसे लूटे हैं, कांग्रेस उसका साफ नाम उजागर करे, तब माहौल और ज्यादा गरमा गया। डॉ. महंत ने कहा कि जिस मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम की गूंज पूरे ब्रह्मांड में होती है, दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज उनके नाम पर चर्चा करने से सत्ता पक्ष को इतनी ज्यादा आपत्ति हो रही है। इस पर पलटवार करते हुए बीजेपी विधायक धर्मजीत सिंह ने कांग्रेस के पुराने स्टैंड पर निशाना साधा और कहा कि जिस पार्टी ने सालों तक अदालतों में भगवान राम के ऐतिहासिक अस्तित्व को ही पूरी तरह नकार दिया था, आज वही रामभक्त बनने का ढोंग कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के डकैती वाले बयान से सदन में एकाएक भड़का भारी आक्रोश
इस तीखी नोकझोंक के बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी चर्चा में कूद पड़े। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लाखों आम नागरिकों ने अयोध्या जाकर राम मंदिर के लिए अपनी क्षमता के अनुसार चंदा दिया था। अब यह साफ हो चुका है कि उस पावन चंदे की राशि पर बड़ी डकैती डाली गई है। बघेल ने आरोप लगाया कि अयोध्या में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों में 40 फीसदी तक का मोटा कमीशन खाया गया है। उनके इस ‘डकैती’ शब्द का प्रयोग करते ही सत्ता पक्ष के विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और सदन का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
धरमलाल कौशिक ने पूछा आपने कितना दिया, तो भूपेश ने सार्वजनिक किया अपना चेक नंबर
जब बीजेपी के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने सीधे तौर पर भूपेश बघेल से सवाल किया कि वे दूसरों की बात छोड़ें और यह बताएं कि उन्होंने खुद राम मंदिर के लिए कितनी राशि का योगदान दिया है, तो पूर्व मुख्यमंत्री ने तुरंत इसका करारा जवाब दिया। भूपेश बघेल ने सदन के भीतर खड़े होकर अपने बैंक खाते का पूरा ब्यौरा और बाकायदा चेक नंबर सार्वजनिक करते हुए बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1 लाख 21 हजार रुपये की राशि का चेक दिया था। इस सीधे जवाब के बाद विपक्षी खेमे के विधायकों ने मेज थपथपाकर उनका स्वागत किया।
विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने राज्य का विषय न मानकर प्रस्ताव को किया अग्राह्य
पक्ष-विपक्ष के बीच चल रही इस लंबी और शोर-शराबे से भरी बहस को शांत कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) डॉ. रमन सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत रहने की हिदायत देते हुए अपना अंतिम फैसला सुनाया। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा यह वित्तीय मामला पूरी तरह से केंद्रीय स्तर का है और छत्तीसगढ़ सरकार का इससे कोई सीधा प्रशासनिक संबंध नहीं है। राज्य की सीमा से बाहर का विषय होने के कारण डॉक्टर रमन सिंह ने कांग्रेस के इस स्थगन प्रस्ताव को पूरी तरह से नियम विरुद्ध बताते हुए अग्राह्य (खारिज) कर दिया।
भारी हंगामे और लगातार नारेबाजी के चलते 5 मिनट के लिए स्थगित हुई सदन की कार्यवाही
अध्यक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव को खारिज किए जाने के तुरंत बाद कांग्रेस के तमाम विधायक गर्भगृह की ओर बढ़ने लगे और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। वहीं सत्ता पक्ष के सदस्य भी अपनी कुर्सियों के पास आकर कांग्रेस की पुरानी नीतियों को लेकर चिल्लाने लगे। सदन के भीतर दोनों ओर से हो रहे इस भारी शोर-शराबे और हंगामे के कारण अध्यक्ष के लिए कार्यवाही को आगे बढ़ा पाना पूरी तरह असंभव हो गया। बिगड़ते हालातों को देखते हुए स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने विधानसभा की कार्यवाही को 5 मिनट के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
आगामी दिनों में भी मानसून सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के पूरे आसार
इस पांच मिनट के निलंबन के बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब भी दोनों पक्षों के बीच तल्खी कम नहीं हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का आठवां विधानसभा सत्र केवल इसी एक मुद्दे तक सीमित रहने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में विपक्ष राज्य की कानून-व्यवस्था, बस्तर के अंदरूनी इलाकों के हालात और स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सरकार को पूरी ताकत से घेरने की तैयारी में है, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में भी सदन में भारी हंगामा देखने को मिल सकता है।



