CG School Drug Free Zone: छत्तीसगढ़ में ‘नशे’ पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक: स्कूल-हॉस्टल के 500 मीटर के दायरे में ‘नो एंट्री’, अब ड्रग्स बिकने पर नपेंगे अफसर!

रायपुर: छत्तीसगढ़ से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर आ रही है! सूबे की सरकार ने युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने और शिक्षण संस्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जिससे ड्रग माफियाओं की कमर टूटना तय है. सरकार ने तत्काल प्रभाव से प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों और छात्रावासों (Hostels) के 500 मीटर के दायरे को पूरी तरह से “ड्रग-फ्री ज़ोन” (नशा मुक्त क्षेत्र) घोषित कर दिया है.

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बाबत सभी कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संस्थान प्रमुखों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं. साफ कह दिया गया है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा.

नए एडमिशन पर होगी ‘स्पेशल स्क्रीनिंग’

अब स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि बच्चों की सेहत और सुरक्षा पर भी ‘तीसरी आंख’ का पहरा होगा. सरकार के नए नियम के मुताबिक, अब स्कूलों में दाखिला लेने वाले नए छात्रों की कंपलसरी स्क्रीनिंग और स्वैच्छिक स्वास्थ्य जांच की जाएगी. इसके लिए बकायदा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की टीमें स्कूलों में पहुंचेंगी. इसका मकसद यह है कि अगर कोई बच्चा अनजाने में भी नशे की गिरफ्त में आ चुका है, तो समय रहते उसकी पहचान की जा सके.

सजा नहीं, सहारा देगी सरकार: होगी काउंसिलिंग

अक्सर देखा जाता है कि नशे की लत पड़ने पर बच्चों को डांट-फटकार या सजा मिलती है, जिससे वो और गर्त में चले जाते हैं. लेकिन सरकार ने यहाँ एक बेहद संवेदनशील रुख अपनाया है.

मासूमों के लिए संजीवनी: अगर जांच के दौरान किसी छात्र में नशे के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे सजा देने या स्कूल से निकालने के बजाय प्यार से संभाला जाएगा. सरकार ऐसे बच्चों के लिए स्पेशल काउंसिलिंग और पुनर्वास (Rehabilitation) की व्यवस्था करेगी, ताकि उन्हें वापस मुख्यधारा में लाया जा सके.

स्कूल के प्रिंसिपलों को ‘पावर’ भी, जिम्मेदारी भी!

इस नए फरमान में स्कूल और हॉस्टल के प्राचार्यों (Principals) को सीधे तौर पर जिम्मेदार बनाया गया है. अब हर स्कूल प्रमुख को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी बाउंड्री के 500 मीटर के भीतर कोई भी पान ठेला, गुमटी या दुकान नशीले पदार्थ न बेचे.

अगर स्कूल के आसपास ऐसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखती है, तो प्रिंसिपल को सीधे लोकल पुलिस थाने में FIR या शिकायत दर्ज करानी होगी. अगर इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो गाज सीधे अधिकारियों पर गिरेगी.

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य के शैक्षणिक माहौल को पूरी तरह बदलने वाला साबित हो सकता है. अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर पुलिस और प्रशासन इस ‘ड्रग-फ्री ज़ोन’ वाले आदेश को कितनी सख्ती से लागू करवा पाते हैं.

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