धमतरी में खेल-खेल में बच्चे ने निगली बैटरी वाली LED लाइट, थोड़ी देर और होती तो पेट में लीक हो सकता था खतरनाक केमिकल

Dhamtari News: छोटे बच्चों की पहुंच से सिक्का, बटन, चुंबक और इलेक्ट्रॉनिक सामान दूर रखना कितना जरूरी है, इसका एक उदाहरण धमतरी में देखने को मिला। बालोद जिले के गुरुर के रहने वाले 5 साल के एक बच्चे ने अनजाने में खेल-खेल के दौरान बैटरी वाली छोटी एलईडी लाइट निगल ली। लाइट पेट में जाकर फंस गई, जिससे बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने बिना कोई बड़ा कट लगाए एंडोस्कोपी की मदद से लाइट को बाहर निकाल लिया।

खेलते समय मासूम ने निगली बैटरी वाली छोटी एलईडी लाइट

Dhamtari Hospital Endoscopy Surgery: रविवार सुबह करीब 10 बजे 5 साल का गर्वित साहू अपने घर में खेल रहा था। इसी दौरान उसने खिलौने से निकली बैटरी वाली छोटी एलईडी लाइट को मुंह में डाल लिया और निगल गया। कुछ ही देर में जब बच्चे को बेचैनी होने लगी, तो परिजनों को स्थिति का अहसास हुआ। घबराए परिजन उसे तुरंत बालोद के एक निजी अस्पताल ले गए। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने मामले को गंभीर मानते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए धमतरी रेफर कर दिया।

धमतरी के अस्पताल में डॉक्टरों ने बिना सर्जरी के निकाला बाहर

धमतरी के अस्पताल पहुंचने के बाद मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए बच्चे की जांच शुरू की। एक्स-रे और अन्य जांचों में पेट के अंदर बैटरी वाली लाइट फंसी हुई दिखाई दी। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए डॉक्टरों ने कोई बड़ा ऑपरेशन करने के बजाय एंडोस्कोपी तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया। डॉक्टरों ने कुशलता से एंडोस्कोप की मदद से पेट के भीतर मौजूद लाइट को बिना किसी नुकसान के बाहर खींच लिया।

थोड़ी देर और होने पर लीक हो सकता था बैटरी का केमिकल

इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि अगर बच्चा समय पर अस्पताल नहीं पहुंचता तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी। पेट के अंदर मौजूद एसिड के संपर्क में आने से बैटरी लीक होने का खतरा बना रहता है। बैटरी से निकलने वाला रसायन शरीर के अंदरूनी हिस्सों और आंतों को जला सकता है, जिससे अंगों को भारी नुकसान पहुंचता है। फिलहाल समय पर उपचार मिलने के बाद बच्चे की हालत ठीक है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

बालोद से धमतरी तक परिजनों की सांसें अटकी रहीं

बच्चे द्वारा लाइट निगलने के बाद से लेकर अस्पताल में प्रक्रिया पूरी होने तक परिजनों का बुरा हाल था। बालोद से धमतरी तक का सफर परिजनों के लिए काफी तनावपूर्ण रहा। डॉक्टरों की टीम द्वारा जब सफल इलाज के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर लाया गया, तब जाकर परिजनों ने राहत की सांस ली। समय पर मिले सही डॉक्टरी इलाज ने एक बड़े हादसे को टाल दिया।

ऐसी स्थिति में घरेलू इलाज के बजाय तुरंत पहुंचे अस्पताल

इस घटना के बाद डॉक्टरों ने सभी अभिभावकों को चेतावनी जारी की है कि बच्चों के आसपास छोटी वस्तुएं न छोड़ें। यदि कभी बच्चा कोई सिक्का, बटन या बैटरी निगल ले तो किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने या इंतजार करने में समय बर्बाद न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी बड़े अस्पताल जाएं, क्योंकि बैटरी जैसी वस्तुएं पेट के अंदर रासायनिक प्रतिक्रिया करके काफी कम समय में गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।

अभिभावक रखें विशेष ध्यान, बच्चों की पहुंच से दूर रखें छोटे सामान

डॉक्टरों ने परिजनों से अपील की है कि वे छोटे बच्चों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखें। घर में इस्तेमाल होने वाले छोटे सेल, रिमोट की बैटरी, बटन, सिक्के और छोटे खिलौनों के पुर्जे हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर किसी सुरक्षित जगह पर रखें। खेलते समय बच्चे मुंह में क्या डाल रहे हैं, इस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी किसी दुर्घटना से बचा जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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