
Dharti Aaba Janjatiya Gram Utkarsh Abhiyan: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के सतत विकास और सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत प्रदेश के 160 आदिवासी बहुल गांवों का चयन किया जाएगा। इस पहल के जरिए अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम के प्रावधानों को धरातल पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी है। चयनित प्रत्येक गांव में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना बनाकर उस पर अमल किया जाएगा।
प्रत्येक ग्रामसभा के लिए 15 लाख रुपए की राशि स्वीकृत
इस अभियान का सबसे अहम पहलू ग्रामसभाओं को सीधे वित्तीय अधिकार प्रदान करना है। प्रत्येक चयनित ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के कार्य संचालित करने के लिए 15 लाख रुपए की स्वीकृति दी जा चुकी है। इस फंड की मदद से स्थानीय ग्रामीण अपने क्षेत्र के वनों की सुरक्षा और उससे जुड़ी आजीविका गतिविधियों का खाका स्वयं तैयार कर सकेंगे। इससे गांवों के विकास में प्रशासनिक निर्भरता कम होगी और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।
आदिम जाति कल्याण विभाग ने जिला कलेक्टरों को भेजा पत्र
योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग की ओर से राज्य के सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि चयनित 160 गांवों का चुनाव क्लस्टर आधारित और आपस में जुड़े हुए भौगोलिक क्षेत्रों की प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इसके अलावा, प्रत्येक चयनित ग्रामसभा में एक ‘सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति’ का गठन होगा। इस समिति के वित्तीय लेन-देन को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ग्रामसभा के नाम पर एक सिंगल करंट अकाउंट भी खोला गया है।
नागरिक निकायों और तकनीकी संस्थाओं का लिया जाएगा सहयोग
वन प्रबंधन योजना को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने तकनीकी संस्थाओं, सिविल सोसाइटी संगठनों और स्थानीय निकायों के सहयोग का भी प्रावधान रखा है। हालांकि, इन बाहरी संस्थाओं या विशेषज्ञों की सेवाएं लेने के लिए ग्रामसभा का औपचारिक प्रस्ताव और विधिवत अनुमोदन होना अनिवार्य होगा। ये सहयोगी संस्थाएं ग्रामीणों को योजना की रूपरेखा बनाने, उसके क्रियान्वयन और नियमित निगरानी में तकनीकी मदद पहुंचाएंगी।
सामुदायिक वन अधिकार और आजीविका को मिलेगी मजबूती
यह निर्णय आदिवासी क्षेत्रों को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ग्रामसभाओं के पास सीधा बजट और प्रबंधन का अधिकार आने से वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम (FRA) का क्रियान्वयन बेहतर होगा। वनों के संरक्षण के साथ-साथ लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण जैसी आजीविका संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वनों पर निर्भर परिवारों की आय में सुधार की उम्मीद है।
Also Read: Operation Trap Tree Forest Department: कीड़ा मारकर गांव वाले 20 लाख कमा लिए, जानें कैसे



