
Jaundice Outbreak: एक तरफ छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस और उसके बाद रायगढ़ में HIV के कई मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अब सरगुजा जिले के तहत आने वाले पर्यटन क्षेत्र मैनपाट में इन दिनों पीलिया का भारी प्रकोप देखने को मिल रहा है. पिछले एक महीने के भीतर पीलिया की चपेट में आने से एक स्थानीय उपसरपंच और नौवीं कक्षा के छात्र समेत चार लोगों की मौत की खबर सामने आई है. इस जानलेवा बीमारी के फैलने से नर्मदापुर, कुनिया और बरिमा सहित आसपास के कई गांवों में डर का माहौल बना हुआ है. वर्तमान में एक दर्जन से अधिक लोग इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है.
भीषण गर्मी और बेमौसम बारिश के कारण बिगड़ा लोगों का स्वास्थ्य, तेजी से फैले संक्रमण ने बढ़ाई चिंता
क्षेत्र में पड़ रही अत्यधिक गर्मी और पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश के कारण मौसमी बीमारियां तेजी से पनपने लगी हैं. शुरुआत में लोग सामान्य सर्दी, खांसी और उल्टी की शिकायत समझकर स्थानीय स्तर पर ही अपनी जांच और घरेलू इलाज करा रहे थे. राहत न मिलने पर जब मरीजों को जिला मुख्यालय अंबिकापुर के बड़े अस्पतालों में ले जाया गया, तब जाकर डॉक्टरों ने खून की जांच में पीलिया (जॉन्डिस) होने की पुष्टि की.
पूर्व उपसरपंच जितेंद्र यादव और नौवीं के छात्र विकास सहित चार लोगों की जान जाने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, पीलिया के गंभीर संक्रमण की वजह से कुनिया गांव के पूर्व उपसरपंच जितेंद्र यादव, नर्मदापुर की रहने वाली भाग्यवती यादव, बैगहवा गांव की एक अन्य युवती और बरिमा निवासी नौवीं कक्षा के छात्र विकास यादव की असमय मौत हो गई है. एक ही इलाके में एक के बाद एक चार मौतों से ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं और अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं.

मौतों पर स्वास्थ्य विभाग का अलग तर्क, मुख्य कारणों का पता लगाने के लिए शुरू की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच
दूसरी तरफ, सरगुजा जिला स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन सभी मौतों की मुख्य वजह पीलिया को मानने से इनकार किया है. चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि संबंधित मरीजों की मौत किस वजह से हुई है, इसकी वास्तविक पुष्टि केवल विस्तृत मेडिकल ऑडिट और पुरानी केस हिस्ट्री की जांच के बाद ही की जा सकती है. विभाग मामले की गहराई से जांच कर रहा है.
रायपुर और अंबिकापुर के निजी अस्पतालों में चल रहा है मरीजों का इलाज, पीड़ितों ने बयां किया दर्द
पीलिया से गंभीर रूप से पीड़ित कई मरीजों को बेहतर उपचार के लिए अंबिकापुर के निजी चिकित्सालयों और राजधानी रायपुर के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. अंबिकापुर के एक अस्पताल में उपचाराधीन मरीज उदय भान यादव ने बताया कि वह पिछले एक सप्ताह से इस बीमारी से जूझ रहे हैं. उनके मुताबिक, गांवों में पीलिया का असर बहुत ज्यादा है और कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है.
एक महीने तक बेपरवाह रहा स्थानीय अमला, ग्रामीणों ने समय पर सूचना न मिलने का लगाया बड़ा आरोप
गांव के जागरूक नागरिकों का आरोप है कि पीलिया की यह समस्या क्षेत्र में पिछले एक महीने से धीरे-धीरे पैर पसार रही थी. शुरुआत में मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया. जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और मौतें सामने आईं, तब जाकर जिला प्रशासन को इसकी भनक लगी. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो जाता, तो शायद कुछ जानों को बचाया जा सकता था.

स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने दी जानकारी, प्रभावित इलाकों को किया अलर्ट
मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य सेवाएं, सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने मैनपाट के कुछ गांवों में पीलिया फैलने की आधिकारिक बात स्वीकार की है. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुख्यालय को इसकी सूचना मिली, तुरंत ब्लॉक मेडिकल टीम को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया है. वर्तमान में डॉक्टरों और नर्सों की विशेष टीम प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी कर रही है.
नर्मदापुर और कुनिया में लगाए गए विशेष हेल्थ कैंप, बीमार लोगों की हो रही है मुफ्त खून जांच
संक्रमण को और आगे फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित ग्राम पंचायतों में विशेष चिकित्सा शिविर (हेल्थ कैंप) स्थापित किए गए हैं. इन कैंपों में आने वाले हर एक ग्रामीण की स्क्रीनिंग की जा रही है, जिन लोगों में पीलिया के शुरुआती लक्षण जैसे पीली आंखें या लगातार उल्टी की शिकायत मिल रही है, उनकी मौके पर ही मुफ्त ब्लड टेस्टिंग की जा रही है और जरूरी दवाइयां दी जा रही हैं.
पीने के पानी के स्रोतों की जांच शुरू, ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने और सफाई रखने की दी गई हिदायत
संयुक्त संचालक के अनुसार, पीलिया फैलने के मुख्य स्रोत की पहचान करने के लिए गांवों के हैंडपंपों और कुओं के पानी के सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है. जब तक पानी की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक मेडिकल टीम ने सभी ग्रामीणों को पीने के पानी को अच्छी तरह उबालकर ठंडा करने के बाद ही उपयोग में लाने, ताजा व गर्म भोजन करने और अपने आसपास पूरी साफ-सफाई रखने की सख्त समझाइश दी है.



