
Kharif Season Fertilizer Price Hike: खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश के अन्नदाताओं को एक और बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा सहित देश भर के किसान डीजल की बढ़ती कीमतों से पहले ही परेशान थे, लेकिन अब रासायनिक खादों के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी ने उनकी चिंताएं और ज्यादा बढ़ा दी हैं। रबी सीजन में खाद की किल्लत और लंबी कतारों का सामना कर चुके किसानों के सामने अब खरीफ फसलों की बुआई से पहले बढ़ी हुई कीमतों की नई मुसीबत आ खड़ी हुई है। सरकार द्वारा इस महीने से लागू की गई नई दरों के कारण खेती की लागत में सीधा इजाफा होने जा रहा है, जिससे किसानों की जेब और ढीली होगी।

पोटाश और एनपीके के दामों में 175 से लेकर 550 रुपये तक का भारी उछाल, तैयारियों में जुटे अन्नदाता हुए परेशान
बाजार में आई नई रेट लिस्ट के मुताबिक, अलग-अलग खादों के दामों में 175 रुपये से लेकर 550 रुपये प्रति बोरी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें पोटाश की प्रति बोरी की कीमत 1800 रुपये से बढ़कर सीधे 1975 रुपये पर पहुंच गई है, यानी पोटाश पर सीधे 175 रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ा है। इसी तरह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एनपीके (NPK) खाद की कीमत 1900 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर अब 2450 रुपये तक पहुंच चुकी है, जिसमें एकमुश्त 550 रुपये का तगड़ा इजाफा किया गया है। रबी फसलों की कटाई और बिक्री से फुर्सत पाते ही किसान अब खरीफ की तैयारियों में लगे हैं, लेकिन इस महंगाई ने उनकी आर्थिक प्लानिंग बिगाड़ दी है।
कृषि वैज्ञानिकों ने समझाया खरीफ फसलों में खाद का गणित, मक्के की खेती करने वालों पर पड़ेगा सीधा असर
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर गौरव महाजन ने इस संबंध में तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में खरीफ सीजन के दौरान मक्के की फसल बड़े पैमाने पर ली जाती है। मक्के की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को प्रति एकड़ औसतन दो बोरी यूरिया, एक बोरी एनपीके और कम से कम 20 किलो पोटाश की जरूरत पड़ती है। चूंकि इस बार एनपीके और पोटाश दोनों के ही दाम बढ़े हैं, इसलिए मक्के की बुआई करने वाले किसानों की शुरुआती लागत काफी बढ़ जाएगी। कृषि वैज्ञानिक ने यह भी सलाह दी कि कई किसान खेतों में जरूरत से ज्यादा खाद डाल देते हैं, इस ओवरडोज के कारण जमीन खराब होती है और सही उत्पादन भी नहीं मिल पाता, इसलिए संतुलित मात्रा में ही खाद का उपयोग करें।
राहत की बात यह है कि यूरिया और डीएपी के रेट नहीं बढ़े, लेकिन बाजार से डीएपी गायब होने से बढ़ी परेशानी
इस पूरे महंगाई के दौर में राहत की एकमात्र बात यह है कि खरीफ सीजन के लिए यूरिया और डीएपी (DAP) के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। प्रशासन का दावा है कि यूरिया की उपलब्धता बाजार में पर्याप्त है और किसानों को इसके लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। हालांकि, जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है क्योंकि डीएपी 12-32-16 का स्टॉक इस समय न तो सहकारी समितियों में मिल रहा है और न ही खुले बाजार में उपलब्ध हो पा रहा है। इसकी अनुपलब्धता के कारण दुकानदारों द्वारा किसानों को विकल्प के तौर पर दूसरी खादों की खरीदी करने की सलाह दी जा रही है।
प्रति एकड़ बढ़ जाएगा हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च, खाद के साथ-साथ उन्नत बीजों के दाम भी हुए महंगे
खेती के जानकारों का कहना है कि अगर कोई किसान अपने खेतों के लिए एनपीके और पोटाश के 10 से 12 बैग (प्रति बैग 50 किलो) खरीदता है, तो उसका कुल बजट पिछले साल के मुकाबले सीधे 5 हजार रुपये तक बढ़ जाएगा। केवल रासायनिक खाद ही नहीं, बल्कि इस बार खरीफ फसलों के लिए आने वाले उन्नत बीजों की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। खाद और बीज दोनों के एक साथ महंगे होने से कृषि लागत का ग्राफ काफी ऊपर चला गया है। यदि आने वाले समय में फसलों के उचित दाम नहीं मिले, तो यह पूरी खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकती है।

बढ़े हुए नए रेट को इस तालिका के माध्यम से आसानी से समझें, जानिए कितना आया अंतर
विभिन्न रासायनिक खादों के पुराने और नए दामों के अंतर को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखा जा सकता है, जिससे यह साफ होता है कि इस बार किस खाद पर कितना अतिरिक्त पैसा खर्च करना होगा:
| खाद का प्रकार | रबी सीजन का रेट (रुपये में) | खरीफ सीजन का नया रेट (रुपये में) | प्रति बोरी बढ़ा हुआ अंतर (रुपये में) |
| NPK 12-32-16 | 1900 | 2450 | 550 |
| NPK 16-16-16 | 1725 | 2050 | 325 |
| NPK 24-24-24 | 1900 | 2300 | 400 |
| NPK 19-19-19 | 1600 | 2400 | 800 |
| पोटाश (प्रति बोरी) | 1800 | 1975 | 175 |
भाजपा किसान मोर्चा का दावा है कि आवश्यक खादों के दाम स्थिर हैं, वैश्विक हालातों के कारण हुई आंशिक बढ़ोतरी
खाद की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी पर सत्ताधारी दल का रुख अलग है। भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह रघुवंशी ने बताया कि जिन सोसायटियों और केंद्रों पर पुराना स्टॉक बचा हुआ है, वहां आज भी किसानों को पुराने रेट पर ही खाद दी जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सबसे आवश्यक मानी जाने वाली डीएपी और यूरिया के रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले 12 वर्षों के दौरान रासायनिक खादों के दामों को नियंत्रण में रखा गया है और वर्तमान में जो मामूली या आंशिक बढ़ोतरी दिख रही है, उसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक परिस्थितियां मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल, कहा रबी के बाद अब खरीफ में भी किसानों के साथ हो रहा है अन्याय
दूसरी ओर, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि देश का किसान पहले से ही चौतरफा दिक्कतों से घिरा हुआ है। रबी सीजन की उपज बेचने के समय किसानों को मंडियों में सही दाम नहीं मिले और वे अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हुए। अब जब नई फसल लगाने का समय आया है, तो उन पर खाद की बढ़ी हुई कीमतें थोप दी गई हैं। इसके अलावा सोसायटियों में लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, सरकार की ये नीतियां पूरी तरह किसान विरोधी हैं।



