
Kharve Village Mystery Deaths: बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड के अंतर्गत आने वाले खर्वे गांव में पिछले तीन महीनों के भीतर हुई 8 लोगों की रहस्यमयी मौतों ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है. गांव के भीतर इस समय तंत्र-मंत्र, गड़े धन (हंडा) की खोज और नरबलि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. ग्रामीणों के भारी आक्रोश और दबाव को देखते हुए पुलिस ने सात शवों को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है. अब पूरे क्षेत्र की नजरें इस वैज्ञानिक रिपोर्ट पर टिकी हैं ताकि मौतों के पीछे छिपे असली सच का पता चल सके.
फरवरी से शुरू हुआ संदिग्ध मौतों का सिलसिला
खर्वे गांव में अचानक होने वाली इन संदिग्ध मौतों की शुरुआत इस साल 6 फरवरी को बद्री पटेल की जान जाने के साथ हुई थी. इसके ठीक बाद 20 फरवरी को बुढालू साहू, 12 मार्च को बुधराम जायसवाल, 20 मार्च को छत्तूराम साहू और 31 मार्च को विनोद साहू की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. मौतों का यह डरावना सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि 28 अप्रैल को गजानंद मांझी, 29 अप्रैल को चैतूराम साहू और अंततः 14 मई को महेतरू साहू ने भी दम तोड़ दिया जिससे गांव में पूरी तरह मातम पसर गया.

मौतों का तांडव रोकने के लिए गांव में कराई गई शांति पूजा
लगातार हो रही मौतों से भयभीत होकर ग्रामीणों ने गांव को किसी अज्ञात साए या बीमारी से बचाने के लिए एक सामूहिक शांति पूजा का आयोजन किया था. इस विशेष अनुष्ठान के दौरान गांव की परंपरा के अनुसार तीन बकरों, एक सुअर और कई मुर्गों की बलि भी दी गई थी. ग्रामीणों को पूरा भरोसा था कि इस धार्मिक कार्य के बाद गांव में हो रही अकाल मौतों का सिलसिला हमेशा के लिए थम जाएगा, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सबको झकझोर कर रख दिया.

अनुष्ठान कराने वाले बैगा की मौत से गहराया रहस्य
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब गांव में शांति पूजा संपन्न कराने वाले मुख्य बैगा गजानंद मांझी की भी कुछ दिनों बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. बैगा की मौत ने गांव में चल रही तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास की चर्चाओं को और ज्यादा हवा दे दी. लोग अब इस बात को लेकर आश्वस्त होने लगे कि इन मौतों के पीछे कोई सामान्य वजह नहीं है बल्कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश काम कर रही है.
गड़े धन के लिए 21 लोगों की बलि देने का सनसनीखेज दावा
मृतक छत्तूराम के भाई और विनोद साहू के चाचा कामता प्रसाद ने इस मामले में सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने पुलिस और ग्रामीणों के सामने दावा किया है कि जमीन में दबे गुप्त धन को हासिल करने के लिए तांत्रिक क्रिया के तहत कुल 21 लोगों की बलि देने की खौफनाक योजना बनाई गई थी. ग्रामीणों के बीच यह बात तेजी से फैल रही है कि अब तक 8 लोगों की बलि ली जा चुकी है और 13 अन्य लोग अभी भी निशाने पर थे, हालांकि इस दावे की पुलिस की तरफ से कोई पुष्टि नहीं हुई है.

कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पिलाने का लगा आरोप
मृतक बैगा गजानंद मांझी की पत्नी साधिन बाई ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन उनके पति घर पर आराम कर रहे थे, तभी गांव का एक व्यक्ति मोहनलाल जायसवाल वहां शराब लेकर पहुंचा था. इसके बाद गजानंद ने कोल्ड ड्रिंक के भीतर उसी शराब को मिलाकर पिया और कुछ ही देर बाद वे अचानक जमीन पर गिर पड़े. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिजनों का आरोप है कि यह शराब रामसहाय जायसवाल नामक व्यक्ति के यहां से भेजी गई थी.

बीमार पड़े कार्तिक के ठीक होने से खुली पहली कड़ी
इस पूरे रहस्यमयी घटनाक्रम के बीच कार्तिक कुम्हार नाम के एक ग्रामीण का मामला सामने आने के बाद कड़ियां जुड़नी शुरू हुईं. कार्तिक भी अचानक बेहद संदिग्ध हालत में गंभीर रूप से बीमार पड़ गया था, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई. होश में आने के बाद कार्तिक ने ग्रामीणों को बताया कि उसके दोस्त प्रमोद साहू ने उसे पीने के लिए शराब दी थी जिसका स्वाद बहुत कड़वा था. शराब पीने के तुरंत बाद उसके पेट में तेज दर्द उठा और वह बेहोश हो गया था.
ग्रामीणों के आरोपों के घेरे में आए किराना व्यवसायी रामसहाय
कार्तिक ने पूछताछ में यह भी खुलासा किया कि उसे वह कड़वी शराब प्रमोद साहू ने दी थी, और प्रमोद को वह बोतल रामसहाय जायसवाल से मिली थी. इस बयान के सामने आते ही ग्रामीणों का शक पूरी तरह हकीकत में बदल गया और गांव में एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई. ग्रामीणों ने सीधे तौर पर रामसहाय जायसवाल को इन सभी मौतों का सूत्रधार मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग शुरू कर दी.
मुख्य चौक पर स्थित दुकान बंद, परिजनों ने दी सफाई
आरोपों के घेरे में आए रामसहाय जायसवाल की किराना दुकान गांव के सबसे व्यस्त इलाके यानी गुड़ी चौक पर स्थित है. मुख्य रास्ते पर होने के कारण रामसहाय का संपर्क गांव के लगभग हर छोटे-बड़े परिवार से था. घटना के बाद से ग्रामीणों में इस परिवार के प्रति भारी नाराजगी है और लोगों ने उनकी दुकान से सामान खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया है जिससे दुकान पर ताला लटका है. हालांकि रामसहाय के बेटे रुद्रेश्वर ने सफाई दी है कि उनके पिता फरार नहीं हैं और पुलिस को अपना बयान दे चुके हैं.
कबीर पंथ की परंपरा के चलते दफनाए गए थे शव
खर्वे गांव के अधिकांश निवासी कबीर पंथ विचारधारा को मानते हैं. इस पंथ की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर शव का दाह संस्कार करने के बजाय उसे भूमि में दफनाया जाता है. यही वजह थी कि सभी आठों मृतकों के शव जमीन के नीचे दफन थे. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सात कब्रों को दोबारा खुदवाया और डॉक्टरों की टीम से शवों का परीक्षण कराया.

सभी मामलों में पुलिस को मिला एक जैसा संदिग्ध पैटर्न
मामले की बारीकी से तफ्तीश कर रहे कसडोल के एसडीओपी केके वासनिक ने बताया कि शुरुआती जांच और पूछताछ में सभी आठ मौतों के भीतर एक जैसा संदिग्ध पैटर्न देखने को मिला है. मरने वाले सभी लोगों ने मौत से ठीक पहले किसी न किसी माध्यम से शराब का सेवन किया था. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या सभी मृतकों को दी गई शराब एक ही जगह से आई थी और क्या उसमें कोई जहरीला पदार्थ मिलाया गया था.
विसरा और फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी पूरे इलाके की नजर
पुलिस ने कब्र से निकाले गए सात शवों के विसरा और अन्य जरूरी अंगों के सैंपल एकत्र करके उन्हें रायपुर स्थित राज्य फोरेंसिक प्रयोगशाला भेज दिया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रासायनिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के असली और वैज्ञानिक कारणों का खुलासा हो पाएगा. फिलहाल पूरे खर्वे गांव की सांसें इस रिपोर्ट पर अटकी हुई हैं, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की दंडात्मक कार्रवाई करेगी.



