
अक्टूबर 2025: इस वर्ष धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर को पूरे श्रद्धा भाव से मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। यह दिन दीपावली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस का दिन विशेष रूप से धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है। लोग सोना, चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन आदि की खरीदारी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं जीवन में सुख-समृद्धि लाती हैं।

कैसे करें मां लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा
- प्रातःकाल स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर की सफाई करें और पूजा की चौकी पर मां लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर जी की मूर्ति या तस्वीर रखें।
- दीपक जलाकर चंदन का तिलक करें।
- पूजन के लिए मिठाई, फल, धनिया के बीज, फूल और पंचामृत अर्पित करें।
- मां लक्ष्मी और कुबेर जी की आरती करें और भगवान धन्वंतरि के लिए स्तोत्र का पाठ करें।
- कुबेर मंत्र “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” का 108 बार जाप करें।
- श्रद्धा अनुसार गरीबों और ज़रूरतमंदों को दान करें।
दीपदान करने की विधि
धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी के दिन विशेष रूप से यमराज के नाम पर दीपदान किया जाता है। इसकी विधि इस प्रकार है:
- परिवार का सबसे बड़ा सदस्य एक बड़ा दीपक जलाए।
- इसे पूरे घर में घुमाकर बुरी शक्तियों को बाहर निकालने का संकेत दिया जाता है।
- फिर यह दीपक घर से बाहर ले जाकर किसी सुनसान स्थान या गली में रख दिया जाता है।
- इस दौरान घर के अन्य सदस्य अंदर ही रहें और इस दीपक को न देखें।
इस परंपरा से नरक से मुक्ति और यमराज की कृपा मिलने की मान्यता है। धनतेरस सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना का दिन है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा और दीपदान करने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य बना रहता है।
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