
Mahtari Vandan Yojana e-KYC Last Date: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ ले रही महिलाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और समय-सीमा से जुड़ी खबर सामने आई है. योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए ई-केवाईसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है. महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसके लिए 30 जून 2026 तक की अंतिम तिथि तय की है. यदि कोई लाभार्थी महिला इस नियत समय के भीतर अपना डिजिटल सत्यापन पूरा नहीं कराती है, तो विभाग द्वारा उनकी अगली किस्त रोक दी जाएगी. इस निर्देश के बाद प्रदेश के सभी जिलों में सत्यापन का काम तेजी से किया जा रहा है.
योजना में पारदर्शिता लाने और फर्जी लाभार्थियों को बाहर करने के लिए उठाया कदम
राज्य सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने और केवल वास्तविक हकदार महिलाओं तक लाभ पहुंचाने के इरादे से ई-केवाईसी की प्रक्रिया को लागू किया है. इस डिजिटल सत्यापन के जरिए लाभार्थी महिला की पहचान, उनकी जीवित होने की स्थिति और बैंक खाते का मिलान किया जाता है. इस प्रक्रिया से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से भेजी जाने वाली सरकारी राशि बिना किसी गड़बड़ी के सीधे पात्र महिला के बैंक खाते में जमा हो पाती है. नियमित जांच के दौरान कई ऐसे नाम भी सामने आए हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है और विभाग अब उन नामों को सूची से हटाने की कार्रवाई कर रहा है.
कई जिलों में हजारों महिलाओं का सत्यापन अब भी बाकी है
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अकेले महासमुंद जिले में कुल 3 लाख 18 हजार पंजीकृत महिलाओं में से करीब 2 लाख 98 हजार महिलाओं का सत्यापन सफलतापूर्वक किया जा चुका है. इसके बावजूद अब भी जिले की 20 हजार 116 महिलाओं की ई-केवाईसी लंबित पड़ी है. इसी तरह कांकेर जिले में लगभग 8 हजार और बसना क्षेत्र में 4,500 से अधिक महिलाओं का वेरिफिकेशन होना बाकी है. यदि इन महिलाओं ने 30 जून की समय-सीमा के भीतर अपने जरूरी दस्तावेज अपडेट नहीं कराए, तो जुलाई महीने से उनके खाते में आने वाली 1000 रुपये की मासिक राशि अटक जाएगी.
बुजुर्गों, दिव्यांगों और पलायन कर चुकी महिलाओं को आ रही है सबसे ज्यादा दिक्कत
जमीनी स्तर पर इस अभियान को पूरा करने में मुख्य रूप से तीन तरह की व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं. सबसे ज्यादा परेशानी उन बुजुर्ग और दिव्यांग महिलाओं को हो रही है जो शारीरिक कमजोरी या बीमारी की वजह से आंगनबाड़ी या चॉइस सेंटर तक पहुंचने में असमर्थ हैं. इसके अलावा कुछ महिलाओं के हाथों की रेखाएं घिस जाने के कारण मशीनों में उनके अंगूठे का निशान यानी बायोमेट्रिक डेटा मैच नहीं हो रहा है. वहीं बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं भी हैं जो खेती या रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुकी हैं. विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन सभी फंसे हुए मामलों का एक अलग डेटा तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है.
गांवों में लग रहे विशेष शिविर
इन तमाम बाधाओं को दूर करने और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की संयुक्त टीमों का गठन किया है. यह टीमें गांव-गांव में उन महिलाओं की सूची लेकर उनके घर तक सीधे पहुंच रही हैं जो केंद्रों पर नहीं आ सकतीं. गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ महिलाओं का वेरिफिकेशन मोबाइल ऐप के माध्यम से उनके घर पर ही किया जा रहा है. इसके साथ ही दूरदराज के ग्रामीण अंचलों और आश्रित गांवों में विशेष शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र महिला इस लाभ से वंचित न रह जाए.
नजदीकी केंद्र पर पहचान पत्र और मोबाइल लेकर पहुंचें और अंतिम तिथि का इंतजार न करें
जो महिलाएं अभी तक इस प्रक्रिया से नहीं जुड़ पाई हैं, वे अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र, चॉइस सेंटर, लोक सेवा केंद्र या महिला एवं बाल विकास विभाग के तहसील कार्यालय में जाकर अपनी ई-केवाईसी आसानी से करवा सकती हैं. इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए महिलाओं को अपने साथ मूल पहचान पत्र, बैंक पासबुक और उससे लिंक मोबाइल नंबर ले जाना जरूरी होगा क्योंकि सत्यापन के दौरान मोबाइल पर एक ओटीपी आता है. विभागीय अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द अपना रजिस्ट्रेशन दुरुस्त करवा लें.



