बिजली बिल वसूली में पॉवर कंपनी के छूटे पसीने: IAS एसोसिएशन और विधानसभा ने भी नहीं पटाया बिल, सरकारी विभागों पर 3 हजार करोड़ बकाया

रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी इन दिनों भारी वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। प्रदेश में बिजली बिल की कुल बकाया राशि अब 7 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ कंपनी आम जनता और छोटे दुकानदारों का बिल बकाया होने पर तुरंत कनेक्शन काट रही है, वहीं रसूखदार संस्थानों और सरकारी विभागों पर कार्रवाई करने में उसके हाथ-पांव फूल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अकेले सरकारी विभागों पर ही करीब 3 हजार करोड़ रुपये का बोझ है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद अब कंपनी कंट्रोल रूम से मैसेज भेजकर छोटे उपभोक्ताओं की बत्ती तो गुल कर रही है, लेकिन करोड़ों दबाकर बैठे बड़े नामों पर शिकंजा कसने में हिचक रही है।

IAS एसोसिएशन और विधानसभा की लिस्ट आई सामने: 10 सालों से नहीं भरा बिल, बकाया लाखों में पहुंचा

पावर कंपनी की ताज़ा सूची ने राजधानी के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार ‘आईएएस एसोसिएशन’ पर 64 लाख 35 हजार रुपये का बिल बकाया है। रिकॉर्ड बताते हैं कि इस एसोसिएशन ने आखिरी बार जनवरी 2011 में महज ढाई हजार रुपये जमा किए थे। वहीं, लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले ‘विधानसभा’ पर भी 22 लाख 75 हजार रुपये का बकाया है, जिसका भुगतान पिछले 10 सालों से नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के नाम पर दर्ज कनेक्शन पर भी 13 लाख रुपये से ज्यादा की राशि बकाया बताई जा रही है।

गांवों से लेकर शहरों तक फैला कर्ज का जाल: पंचायतों और स्कूलों पर भी लाखों का भार

बिजली बिल न भरने की यह बीमारी केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। रायपुर के ग्रामीण इलाकों में टेमरी और नकटा जैसी ग्राम पंचायतों पर 14 से 16 लाख रुपये का बिल बकाया है, जिसे पिछले तीन साल से जमा नहीं किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले सड्दू स्थित ‘प्रयास बालक विद्यालय’ पर भी 38 लाख रुपये से अधिक का बकाया खड़ा है। इसके अलावा, प्रदेश भर में 729 ऐसे व्यवसायिक (गैर-घरेलू) उपभोक्ता हैं, जिनसे कंपनी को करीब 16 करोड़ रुपये वसूलने हैं। इनमें सबसे ज्यादा डिफॉल्टर्स बिलासपुर और अंबिकापुर क्षेत्र से सामने आए हैं।

नोटिस और मैसेज का दौर जारी: शासन स्तर पर चर्चा के बीच कनेक्शन काटने की चेतावनी

बिजली कंपनी के कार्यपालक निदेशक (राजस्व) एस. के. ठाकुर का कहना है कि बकाया राशि वसूलने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उपभोक्ताओं को लगातार मैसेज और नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों से वसूली के लिए शासन स्तर पर उच्च अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है ताकि बजट आवंटन के जरिए इस कर्ज को चुकाया जा सके। हालांकि, कंपनी ने संकेत दिए हैं कि यदि बड़े संस्थान जल्द भुगतान नहीं करते, तो उन्हें भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, कंपनी की इस कार्यप्रणाली ने ‘आम और खास’ के बीच कार्रवाई के भेदभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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