
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के एक छात्रावास भवन के भूमिपूजन को लेकर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है. इस 200 सीटर नए हॉस्टल के शिलान्यास के बाद राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आमने-सामने आ गए हैं. दोनों ही कद्दावर नेताओं ने एक-दूसरे पर जनता के बीच केवल श्रेय लेने की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है. इस प्रशासनिक कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया से लेकर बयानों तक खुलकर सामने आ चुका है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया था हॉस्टल का शिलान्यास, बघेल ने उठाए सवाल
इस पूरे विवाद की शुरुआत 6 जुलाई 2026 को मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद हुई. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वहां पहुंचकर छात्र-छात्राओं के लिए बनने वाले इस आधुनिक 200 सीटर छात्रावास भवन का विधिवत भूमिपूजन और शिलान्यास किया. इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आते ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. बघेल ने इसके पीछे विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और सरकार के स्तर पर केवल वाहवाही लूटने की मंशा होने का दावा किया.
भूपेश बघेल का दावा: हमारी सरकार ने 2021 में ही दे दी थी भवन को मंजूरी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए साय सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने लिखा कि इस छात्रावास भवन के निर्माण के लिए कागजी प्रक्रिया और वित्तीय स्वीकृति उनकी कांग्रेस सरकार के समय साल 2021 में ही दे दी गई थी. जब काम को मंजूरी बहुत पहले मिल चुकी थी, तो अब इतने सालों बाद इसका दोबारा शिलान्यास क्यों किया जा रहा है. बघेल ने मुख्यमंत्री साय को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें इस तरह के राजनीतिक प्रपंचों से दूर रहना चाहिए और अधिकारियों के बहकावे में आने से बचना चाहिए.
मुख्यमंत्री साय का पलटवार: रमन सिंह के कार्यकाल में पास हुआ था यह प्रोजेक्ट
भूपेश बघेल के इस हमले पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया. सीएम साय ने साफ शब्दों में कहा कि श्रेय लेने की राजनीति करना असल में कांग्रेस की पुरानी आदत है. उन्होंने असलियत बताते हुए दावा किया कि इस छात्रावास भवन की मुख्य स्वीकृति बहुत पहले डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही मिल चुकी थी. कांग्रेस को प्रदेश में सरकार चलाने के लिए पूरे 5 साल का लंबा समय मिला था, लेकिन वे अपने पूरे कार्यकाल में इस बेहद जरूरी काम को आगे नहीं बढ़ा पाए.
केलो परियोजना का उदाहरण देकर सीएम ने कांग्रेस की कार्यशैली पर कसा तंज
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस सरकार के पुराने कामकाज के तरीकों पर भी तंज कसा. उन्होंने रायगढ़ की केलो सिंचाई परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने समय में केवल राजनीतिक लाभ के लिए एक ही परियोजना का चार बार भूमिपूजन कर डाला, लेकिन काम पूरा करने के लिए जरूरी बजट और राशि कभी जारी नहीं की. भाजपा सरकार ने जब सत्ता संभाली तो इस अटके हुए प्रोजेक्ट को तुरंत बजट देकर काम शुरू कराया, जिसके कारण आज वह बांध पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है.
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दी खुली बहस की चुनौती, मांगे सबूत
इस राजनीतिक बहस में मुख्यमंत्री साय के साथ-साथ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी कूद पड़े हैं. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए उन्हें एक खुला चैलेंज दे दिया. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस मामले में शर्मिंदा मौजूदा सरकार को नहीं बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को होना चाहिए. जायसवाल ने दावा किया कि साल 2018 में ही रमन सरकार ने इस हॉस्टल को मंजूरी दी थी, लेकिन कांग्रेस ने पांच साल तक इस फाइल को दबाकर रखा और काम शुरू तक नहीं होने दिया.
अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने का दावा, कागजी सबूतों के साथ डिबेट के लिए तैयार
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि अगर भूपेश बघेल का यह दावा सच है कि उन्होंने 2021 में इसकी मंजूरी दी थी, तो वे इसके पुख्ता कागजी सबूत जनता के सामने रखें. मंत्री ने कहा कि वे इस विषय पर किसी भी मंच पर लाइव डिबेट करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने पांच साल के शासनकाल में केवल भाजपा सरकार के अच्छे प्रोजेक्ट्स को रोकने का काम किया, जिसे अब साय सरकार तेजी से पूरा कर रही है.



