
Raksha Bandhan Rituals: सनातन परंपरा में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके लंबे और सुखी जीवन की प्रार्थना करती हैं। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई को राखी बांधने से पहले भगवान का आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना गया है। सीधे कलाई पर राखी बांधने के बजाय सबसे पहले देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित करने से पूजा पूर्ण होती है।
प्रथम पूज्य गणेशजी और भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें रक्षा सूत्र
Rakhi Shubh Muhurat: शास्त्रों में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने का विधान है। रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले विघ्नहर्ता गणेश जी को राखी अर्पित करनी चाहिए ताकि जीवन की सभी बाधाएं दूर हों। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को रक्षा सूत्र चढ़ाया जाता है। द्रौपदी और श्रीकृष्ण के प्रसंग को याद करते हुए उनके चरणों में राखी अर्पित करने से भाई-बहन के रिश्ते में मिठास और सुरक्षा का भाव बना रहता है।

कुलदेवी-कुलदेवता का आशीर्वाद लेना है अनिवार्य
Sanatan Parampara Rakhi: गणपति और श्रीकृष्ण के बाद अपने कुलदेवी और कुलदेवता का स्मरण करना चाहिए। परिवार और वंश के रक्षक माने जाने वाले कुलदेवता को रक्षा सूत्र अर्पित कर घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। इन सभी देवी-देवताओं को राखी चढ़ाने के बाद ही बहनों को अपने भाई, परिजनों या अन्य प्रियजनों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना चाहिए।

राखी बांधने के 3 शुभ मुहूर्त
Rakhi Shubh Muhurat 2026: रक्षाबंधन पर सही और शुभ समय में राखी बांधना अत्यंत फलदायी माना जाता है। भद्रा काल से बचकर बहनों को शुभ मुहूर्त में ही रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। इस वर्ष रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए तीन मुख्य समय उपलब्ध हैं।
| समय अवधि | शुभ मुहूर्त समय |
| प्रातःकाल | सुबह 05:58 बजे से 09:48 बजे तक |
| दोपहर (अभिजीत) | दोपहर 12:05 बजे से 01:15 बजे तक |
| सायंकाल | शाम 04:05 बजे से 05:30 बजे तक |

विधि-विधान से राखी बांधने का धार्मिक महत्व
Rakshabandhan 2026 Puja Vidhi: शास्त्रों के अनुसार, बताए गए शुभ समय में विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करके रक्षा सूत्र बांधने से भाई के आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करने और उसके बाद भाई को तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधने से पर्व की धार्मिक मर्यादा पूरी होती है। इससे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी प्रेम में बढ़ोतरी होती है।



