Balodabazar Case: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना प्रमुख अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की जमानत याचिका पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

Balodabazar Case: बलौदाबाजार हिंसा और आगजनी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित की गई है।

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

इस मामले में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की जमानत याचिकाएं पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में खारिज हो चुकी हैं। इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और जमानत की मांग करते हुए विशेष अनुमति याचिका दाखिल की।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अब राज्य सरकार के जवाब के बाद अगली सुनवाई में मामले पर आगे विचार किया जाएगा।

बलौदाबाजार प्रदर्शन की तस्वीर

हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों का हवाला देकर खारिज की थी जमानत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 19 मई 2026 को तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं निरस्त कर दी थीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि अमित बघेल और अजय यादव पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ को उकसाने, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और पुलिस बल पर हमले जैसे गंभीर आरोप हैं।

अदालत ने यह भी माना था कि घटना का असर जिले की कानून-व्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ा और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। इसी आधार पर जमानत देने से इनकार किया गया था।

कलेक्टर और एसपी कार्यालय में प्रदर्शनकारियों में लगाई गई थी आग

हिंसा में करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान

जांच एजेंसियों के अनुसार, बलौदाबाजार हिंसा के दौरान जिला मुख्यालय में व्यापक तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। इस घटना में कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय समेत कई सरकारी परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचा।

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक हिंसा में लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति प्रभावित हुई। मामले में कई लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले लंबित बताए गए हैं।

गिरौधपुरी जैतखाम विवाद के बाद भड़का था आंदोलन

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत मई 2024 में गिरौधपुरी धाम स्थित जैतखाम में तोड़फोड़ की घटना के बाद हुई थी। इस घटना से सतनामी समाज में नाराजगी फैल गई थी। पुलिस ने मामले में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन समाज के कई संगठनों ने न्यायिक जांच की मांग उठाई।

बाद में राज्य सरकार ने न्यायिक जांच की घोषणा की। इसके बावजूद 10 जून 2024 को बड़ी संख्या में लोग बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट परिसर के पास एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई और भीड़ का एक हिस्सा हिंसक हो गया।

प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर और एसपी कार्यालय में लगाई गई थी आग

प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय सहित कई सरकारी भवनों में आग लगा दी थी। प्रशासन के अनुसार इस घटना में करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

घटना के बाद पुलिस ने व्यापक कार्रवाई करते हुए कई प्रकरण दर्ज किए और बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया। अब इस मामले में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, जिस पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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