
छत्तीसगढ़ के पखांजूर क्षेत्र में धान खरीदी में करीब 50 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का आरोप सामने आया है। यह घोटाला पिछले दो सत्रों की धान खरीदी के दौरान लैप्स समितियों के 39 खरीदी केंद्रों में ‘सुखत’ (सुखाने) और ‘शॉर्टेज’ (कमी) के नाम पर किए जाने का दावा किया गया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पखांजूर ने इस मामले में कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए जिला कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस पखांजूर को ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से इस पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
दागी कर्मचारियों को दोबारा प्रभारी बनाने की साजिश का आरोप
कांग्रेस नेताओं, जिनमें पूर्व विधायक प्रत्याशी रूपसिंह पोटाई भी शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि स्थानीय विधायक, सांसद और भाजपा कार्यकर्ता खरीदी नीति के विरुद्ध जाकर बड़ा दबाव बना रहे हैं। उनका उद्देश्य वर्ष 2023-24 और 2024-25 के घोटालों में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को पुनः परलकोट क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों में प्रभारी बनाना है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कदम पिछले घोटालों पर पर्दा डालने और पुनः करोड़ों के भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए उठाया जा रहा है।
खरीदी शुरू होने में देरी: दागी प्रभारियों की नियुक्ति का इंतजार
राज्य सरकार की वर्ष 2025-26 की धान उपार्जन नीति में स्पष्ट है कि धान खरीदी का कार्य शासकीय कर्मचारियों द्वारा किया जाना है और समस्त उपार्जन केंद्रों में उनकी नियुक्ति कर दी गई है। आउट सोर्सिंग कंपनी द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति भी हो चुकी है। इसके बावजूद, कांग्रेस का आरोप है कि परलकोट क्षेत्र के किसी भी केंद्र में खरीदी सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया और कहा कि खरीदी कार्य जानबूझकर रोका गया है ताकि घोटालेबाज कर्मचारियों को फिर से केंद्र प्रभारी बनाया जा सके।
जानबूझकर रोकी गई जांच: करोड़ों के भ्रष्टाचार को दबाने का आरोप
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने आरोप लगाया है कि पिछले दो वर्षों में 39 लैप्स समितियों में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच को विभागीय अधिकारियों द्वारा जानबूझकर दबाकर रखा गया है। यह इसलिए किया गया ताकि घोटालेबाज कर्मचारियों और ऑपरेटरों को साल-दर-साल खरीदी कार्य में लगाया जा सके और करोड़ों का घोटाला फिर से हो सके। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए घोटालों में अब तक कोई कार्रवाई न होना कई सारे गंभीर सवालों को जन्म देता है।
बड़े पैमाने पर प्रशासनिक दबाव बनाने की कोशिश
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि दागी कर्मचारियों और ऑपरेटरों को फिर से केंद्र प्रभारी बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन पर बड़े पैमाने पर दबाव बनाया जा रहा है। इसका मकसद यही है कि खरीदी कार्य को रोककर रखा जाए और उन कर्मचारियों को नियुक्त किया जाए जो पिछले घोटालों में शामिल थे। इस तरह के दबाव की राजनीति के कारण खरीदी नीति का उल्लंघन हो रहा है और किसानों को भी असुविधा हो रही है।
कांग्रेस की चेतावनी: मांगें न मानी गईं तो क्रमिक भूख हड़ताल
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि घोटालेबाज अधिकारी, कर्मचारी एवं ऑपरेटरों को पुनः केंद्र प्रभारी बनाया जाता है और उन पर कठोर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो कांग्रेस पार्टी क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर देगी। ज्ञापन सौंपने में निहार सरकार, रविन विश्वास, गोपाल कुंडू सहित सैकड़ों की संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे। कांग्रेस ने कहा है कि इस भूख हड़ताल से उत्पन्न होने वाली संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
धान खरीदी में ‘सुखत’ और ‘शॉर्टेज’ घोटाला कैसे होता है?
धान खरीदी केंद्रों पर ‘सुखत’ का मतलब धान के सूखने से होने वाली वजन की स्वाभाविक कमी से होता है, जिसके लिए एक निश्चित दर निर्धारित होती है। वहीं, ‘शॉर्टेज’ भौतिक रूप से पाई गई कमी होती है। घोटालेबाज कर्मचारी कथित तौर पर वास्तविक सुखत और शॉर्टेज से कहीं अधिक कमी दर्शाते हैं, और इस अतिरिक्त मात्रा के धान को काले बाजार में बेचकर करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं। इसी तरह की अनियमितताओं से यह 50 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगा है।



